राष्ट्रपति की शक्तियां और महाभियोग प्रक्रिया — BPSC PT हेतु विस्तृत नोट्स
प्रिय अभ्यर्थी, BPSC प्रारंभिक परीक्षा में भारतीय राजव्यवस्था से प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। राष्ट्रपति की शक्तियां और महाभियोग प्रक्रिया संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेदों से जुड़ी है। नीचे दिए गए नोट्स आपकी तैयारी को दिशा देंगे।
1. राष्ट्रपति की शक्तियां (Powers of President)
राष्ट्रपति भारत के संवैधानिक प्रमुख हैं और संघ की कार्यपालिका शक्ति उनमें निहित है । उनकी शक्तियों को निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है:
कार्यपालिका संबंधी शक्तियां
- संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित है, जिसका प्रयोग वे प्रत्यक्ष रूप से या अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करते हैं
- सर्वोच्च सेनापति: संघ के रक्षा बलों का सर्वोच्च शासन राष्ट्रपति का होता है
- प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति
- राज्यपालों, राजदूतों, मुख्य न्यायाधीशों आदि की नियुक्ति
विधायी शक्तियां
- संसद के सत्रावसान का आह्वान करना, संबोधित करना और संदेश भेजना
- लोकसभा भंग करना
- अध्यादेश जारी करना: जब संसद के दोनों सदनों में सत्र नहीं चल रहा हो, तब राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकते हैं
- वित्तीय और धन विधेयक लाने की सिफारिश करना
न्यायिक शक्तियां
- क्षमादान की शक्ति (अनुच्छेद 72): राष्ट्रपति को निम्नलिखित मामलों में क्षमा, दया, राहत या सजा में कमी करने की शक्ति है :
- कोर्ट मार्शल के मामले
- संघ की कार्यपालिका शक्ति से संबंधित कानून के विरुद्ध अपराध
- मृत्युदंड के मामले
- सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श लेने का अधिकार (अनुच्छेद 143)
आपातकालीन शक्तियां
- राष्ट्रीय आपातकाल: युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह की स्थिति में
- राज्य आपातकाल: राज्य में संवैधानिक मशीनरी विफल होने पर (अनुच्छेद 356)
- वित्तीय आपातकाल
अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
- राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है
- राष्ट्रपति पुनर्निर्वाचन के लिए पात्र है
- राष्ट्रपति को भारत का नागरिक होना चाहिए, आयु 35 वर्ष से कम न हो, और लोकसभा सदस्य के रूप में चुने जाने योग्य हो
2. महाभियोग प्रक्रिया (Impeachment Procedure)
संवैधानिक प्रावधान
राष्ट्रपति को संविधान के उल्लंघन के आधार पर महाभियोग द्वारा पद से हटाया जा सकता है (अनुच्छेद 61) ।
महाभियोग की प्रक्रिया (अनुच्छेद 61)
चरण 1: आरोप का प्रस्ताव
- महाभियोग का आरोप संसद के किसी भी सदन में लाया जा सकता है
- 14 दिन की लिखित पूर्व सूचना आवश्यक है, जिस पर सदन के कुल सदस्यों के 1/4 (एक-चौथाई) सदस्यों के हस्ताक्षर हों
चरण 2: प्रस्ताव का पारित होना
चरण 3: दूसरे सदन द्वारा जांच
- जिस सदन में आरोप प्रस्ताव पारित हुआ, वह दूसरे सदन को सौंपा जाता है
- दूसरा सदन आरोप की जांच करता है या जांच करवाता है
- राष्ट्रपति को जांच में उपस्थित होने और प्रतिनिधित्व करने का अधिकार है
चरण 4: अंतिम संकल्प
- यदि जांच के परिणामस्वरूप यह घोषित करने वाला संकल्प पारित होता है कि आरोप सिद्ध हुआ, तो उस सदन के कुल सदस्यों के 2/3 बहुमत से संकल्प पारित होना चाहिए
- संकल्प पारित होने की तिथि से राष्ट्रपति पदमुक्त हो जाते हैं
महत्वपूर्ण बिंदु
अमेरिकी प्रणाली से तुलना
- अमेरिका में राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग की सुनवाई में प्रधान न्यायाधीश अध्यक्षता करते हैं
- भारत में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है; सदन का पीठासीन अधिकारी ही अध्यक्षता करता है
- भारत में महाभियोग का आधार केवल “संविधान का उल्लंघन” है, जबकि अमेरिका में “राजद्रोह, रिश्वत या अन्य उच्च अपराध” भी शामिल हैं
संविधान सभा में चर्चा
संविधान सभा में महाभियोग प्रक्रिया पर 28 दिसंबर 1948 को बहस हुई :
- कुछ सदस्यों ने केवल लोकसभा को महाभियोग का अधिकार देने का प्रस्ताव रखा, परंतु यह स्वीकार नहीं हुआ
- प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता का प्रस्ताव भी अस्वीकार किया गया
- 2/3 बहुमत की शर्त को कठोर बताया गया, परंतु यह बरकरार रखा गया
3. BPSC PT के लिए मॉडल प्रश्न
प्रश्न 1: भारत के राष्ट्रपति का कार्यकाल कितने वर्ष का होता है?
(a) 4 वर्ष
(b) 5 वर्ष
(c) 6 वर्ष
(d) 7 वर्ष
उत्तर: (b) 5 वर्ष
व्याख्या: राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है और वे पुनर्निर्वाचन के लिए पात्र हैं ।
प्रश्न 2: राष्ट्रपति को महाभियोग द्वारा पद से हटाने का आधार क्या है?
(a) अक्षमता
(b) संविधान का उल्लंघन
(c) भ्रष्टाचार
(d) राजद्रोह
उत्तर: (b) संविधान का उल्लंघन
व्याख्या: अनुच्छेद 61 के अनुसार, राष्ट्रपति को केवल “संविधान के उल्लंघन” के आधार पर महाभियोग द्वारा हटाया जा सकता है ।
प्रश्न 3: राष्ट्रपति के महाभियोग प्रस्ताव को कम से कम कितने सदस्यों के हस्ताक्षर के साथ पेश किया जा सकता है?
(a) 50 सदस्य
(b) 100 सदस्य
(c) सदन के कुल सदस्यों का 1/4
(d) सदन के कुल सदस्यों का 1/3
उत्तर: (c) सदन के कुल सदस्यों का 1/4
व्याख्या: महाभियोग प्रस्ताव को 14 दिन की पूर्व सूचना के साथ सदन के कुल सदस्यों के 1/4 सदस्यों के हस्ताक्षर से पेश किया जा सकता है ।
प्रश्न 4: राष्ट्रपति के महाभियोग प्रस्ताव को पारित करने के लिए कितने बहुमत की आवश्यकता होती है?
(a) साधारण बहुमत
(b) उपस्थित सदस्यों का 2/3
(c) कुल सदस्यों का 2/3
(d) कुल सदस्यों का 3/4
उत्तर: (c) कुल सदस्यों का 2/3
व्याख्या: महाभियोग प्रस्ताव को सदन के कुल सदस्यों के 2/3 बहुमत से पारित किया जाना चाहिए ।
प्रश्न 5: राष्ट्रपति के महाभियोग की जांच कौन करता है?
(a) सर्वोच्च न्यायालय
(b) दूसरा सदन
(c) प्रधानमंत्री
(d) चुनाव आयोग
उत्तर: (b) दूसरा सदन
व्याख्या: जिस सदन में आरोप प्रस्ताव पारित होता है, वह दूसरे सदन को सौंपा जाता है, जो जांच करता है ।
प्रश्न 6: राष्ट्रपति को क्षमादान की शक्ति कौन से अनुच्छेद के अंतर्गत प्राप्त है?
(a) अनुच्छेद 61
(b) अनुच्छेद 72
(c) अनुच्छेद 74
(d) अनुच्छेद 78
उत्तर: (b) अनुच्छेद 72
व्याख्या: अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति को क्षमादान, दया, राहत या सजा में कमी करने की शक्ति प्राप्त है ।
प्रश्न 7: राष्ट्रपति को महाभियोग के दौरान अपना प्रतिनिधित्व करने का अधिकार है या नहीं?
(a) हाँ, अधिकार है
(b) नहीं, कोई अधिकार नहीं
(c) केवल लोकसभा में
(d) केवल राज्यसभा में
उत्तर: (a) हाँ, अधिकार है
व्याख्या: अनुच्छेद 61(3) के अनुसार, जांच के दौरान राष्ट्रपति को उपस्थित होने और प्रतिनिधित्व करने का अधिकार है ।
प्रश्न 8: अमेरिका में राष्ट्रपति के महाभियोग की सुनवाई में अध्यक्षता कौन करता है?
(a) स्पीकर
(b) उपराष्ट्रपति
(c) प्रधान न्यायाधीश
(d) विदेश मंत्री
उत्तर: (c) प्रधान न्यायाधीश
व्याख्या: अमेरिकी संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति के महाभियोग की सुनवाई में प्रधान न्यायाधीश अध्यक्षता करते हैं । भारत में ऐसा प्रावधान नहीं है।
4. BPSC PT के लिए रणनीति
- अनुच्छेद 61: महाभियोग प्रक्रिया का मुख्य आधार
- महत्वपूर्ण संख्याएँ: 14 दिन (सूचना), 1/4 (हस्ताक्षर), 2/3 (बहुमत)
- क्षमादान: अनुच्छेद 72 के अंतर्गत तीन प्रकार के मामले
- राष्ट्रपति का कार्यकाल: 5 वर्ष, पुनर्निर्वाचन पात्र
- अमेरिकी प्रणाली से तुलना: प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता का अंतर
- पिछले प्रश्न पत्र: BPSC के राजव्यवस्था से संबंधित प्रश्नों का अभ्यास करें
इन नोट्स के आधार पर तैयारी करें और नियमित रूप से मॉडल प्रश्नों का अभ्यास करें। शुभकामनाएँ!