राज्य के नीति निर्देशक तत्व (DPSP) — BPSC PT नोट्स
September 20, 2026
राज्य के नीति निर्देशक तत्व (Directive Principles of State Policy) भारतीय संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36 से 51) में दिए गए हैं। ये तत्व राज्य के लिए गैर-न्यायिक (non-justiciable) दिशानिर्देश हैं, जिनका उद्देश्य देश में सामाजिक-आर्थिक न्याय स्थापित करना और भारत को एक कल्याणकारी राज्य बनाना है।
🔑 मूल तथ्य
- स्रोत: यह अवधारणा आयरिश संविधान से ली गई है (जो स्पेनिश संविधान से प्रेरित थी)।
- प्रवर्तनीयता: अनुच्छेद 37 के अनुसार, ये तत्व किसी भी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं। लेकिन कानून बनाते समय राज्य के लिए ये मौलिक (fundamental) हैं।
- डॉ. आंबेडकर की दृष्टि: उन्होंने DPSP को संविधान की ‘अद्वितीय विशेषता’ (novel feature) और ‘वाद्य यंत्र के निर्देशों’ (Instrument of Instructions) के समान बताया।
- वर्गीकरण: इन्हें मुख्यतः तीन भागों में बाँटा जाता है — समाजवादी, गांधीवादी, और उदार-बौद्धिक सिद्धांत।
📝 BPSC PT के लिए मॉडल प्रश्न
- राज्य के नीति निर्देशक तत्व किस भाग में हैं?
- उत्तर: भाग IV (अनुच्छेद 36–51)।
- DPSP का स्रोत किस देश के संविधान से है?
- उत्तर: आयरिश संविधान।
- क्या DPSP न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय हैं?
- उत्तर: नहीं (अनुच्छेद 37)।
💡 BPSC PT के लिए रणनीति
- अनुच्छेद 38 (कल्याणकारी राज्य), 40 (पंचायत), 44 (समान नागरिक संहिता), 48A (पर्यावरण) — इन अनुच्छेदों को याद रखें।
- मौलिक अधिकार (FR) और DPSP का अंतर स्पष्ट करें: FR नकारात्मक/प्रवर्तनीय हैं, DPSP सकारात्मक/गैर-प्रवर्तनीय हैं।