हर्षवर्धन (606-647 ईस्वी) और चालुक्य वंश का संघर्ष मध्यकालीन भारत की सबसे निर्णायक घटनाओं में से एक था
September 20, 2026
हर्ष ने उत्तर भारत में एक विशाल साम्राज्य खड़ा किया, लेकिन दक्षिण में बढ़ने का उनका सपना चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर तोड़ दिया। यही वजह है कि नर्मदा को उत्तर और दक्षिण भारत के बीच की स्थायी सीमा मान लिया गया।
👑 हर्षवर्धन: उत्तर भारत का अंतिम महान सम्राट
- सत्ता और विस्तार: 606 ईस्वी में थानेसर की गद्दी पर बैठे। उन्होंने पंजाब, कन्नौज, बंगाल, बिहार और उड़ीसा को जीता। उनका साम्राज्य पश्चिम में सौराष्ट्र से पूर्व में असम (कामरूप) तक और उत्तर में हिमालय से दक्षिण में नर्मदा तक फैला था।
- पुलकेशिन द्वितीय से टकराव: हर्ष ने एकछत्र साम्राज्य की महत्वाकांक्षा से दक्षिण पर आक्रमण किया, लेकिन 620 ईस्वी के आसपास नर्मदा के तट पर पुलकेशिन द्वितीय ने उन्हें करारी शिकस्त दी। इसके बाद हर्ष को दक्षिण की ओर बढ़ने का विचार त्यागना पड़ा।
- धार्मिक नीति: हर्ष शुरू में शैव थे, बाद में बौद्ध हो गए। उन्होंने कन्नौज की सभा (643 ईस्वी) बुलाई और ह्वेनसांग को सम्मानित किया।
🛡️ चालुक्य वंश: दक्षिण भारत की ढाल
- वंश और शक्ति: चालुक्यों ने वातापी (बादामी) से 543 से 757 ईस्वी तक शासन किया। इनके सबसे प्रतापी शासक पुलकेशिन द्वितीय (609-642 ईस्वी) थे।
- पुलकेशिन द्वितीय की विजय: उन्होंने कई युद्ध जीते और ‘परमेश्वर’ की उपाधि धारण की। ऐहोल अभिलेख में हर्ष के खिलाफ उनकी जीत का वर्णन है।
📝 BPSC PT के लिए मॉडल प्रश्न
- हर्षवर्धन और पुलकेशिन द्वितीय के बीच युद्ध किस नदी के तट पर हुआ था?
- चालुक्य वंश की राजधानी कहाँ थी?
- हर्षवर्धन के काल में बिहार का क्या महत्व था?
- उत्तर: हर्ष के साम्राज्य का महत्वपूर्ण हिस्सा होने के साथ-साथ नालंदा बौद्ध शिक्षा का प्रमुख केंद्र था।