BPSC प्रारंभिक परीक्षा: मराठा साम्राज्य और पेशवा – विस्तृत नोट्स एवं PYQ प्रश्न
प्रिय अभ्यर्थी, BPSC प्रारंभिक परीक्षा में मध्यकालीन एवं आधुनिक भारत के संक्रमणकालीन इतिहास से प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। मराठा साम्राज्य और पेशवा का काल भारतीय इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी काल में मुगल साम्राज्य का पतन हुआ और अंग्रेजों के विस्तार का मार्ग प्रशस्त हुआ। नीचे दिए गए नोट्स आपकी तैयारी को दिशा देंगे।
मराठा साम्राज्य की पृष्ठभूमि
मराठा शक्ति का उदय
भौगोलिक कारण:
- सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला (पश्चिमी घाट) – प्राकृतिक सुरक्षा
- महाराष्ट्र का कठिन भूभाग – युद्ध कौशल का विकास
- समुद्री तट – नौसेना का विकास
राजनीतिक कारण:
- मुगल साम्राज्य का पतन (औरंगजेब की मृत्यु 1707 ई. के बाद)
- दक्कन में मुगल नियंत्रण का कमजोर पड़ना
- स्थानीय सरदारों का स्वतंत्र होने का प्रयास
सामाजिक-आर्थिक कारण:
- मराठा जाति में सैन्य परंपरा
- भूमि की कमी एवं कृषि पर निर्भरता
- व्यापार एवं वाणिज्य का विकास
शिवाजी (1674-1680 ई.) – मराठा साम्राज्य के संस्थापक
प्रारंभिक जीवन
- जन्म: 1627 ई., शिवनेरी दुर्ग (पुणे)
- पिता: शाहजी भोंसले
- माता: जीजाबाई
- गुरु: समर्थ रामदास (राजनीतिक एवं धार्मिक प्रेरणा)
- संरक्षक: दादाजी कोणदेव
शिवाजी का साम्राज्य विस्तार
प्रारंभिक विजय:
- 1646 ई.: तोरणा दुर्ग पर अधिकार (16 वर्ष की आयु में)
- 1659 ई.: अफजल खाँ की हत्या (बीजापुर के सुल्तान का सेनापति)
- 1660 ई.: शाइस्ता खाँ (मुगल सेनापति) को पराजित किया
मुगल संघर्ष:
- 1665 ई.: पुरंदर की संधि – शिवाजी ने 23 दुर्ग मुगलों को दिए
- 1666 ई.: आगरा दरबार में औरंगजेब द्वारा कैद; बाद में भाग निकले
- 1670 ई.: पुनः युद्ध प्रारंभ; सूरत पर आक्रमण (दो बार)
- 1674 ई.: राज्याभिषेक – रायगढ़ में छत्रपति की उपाधि धारण
दक्षिण विजय:
- 1677-78 ई.: कर्नाटक अभियान; जिंजी, वेल्लोर पर अधिकार
- 1680 ई.: मृत्यु (50 वर्ष की आयु में)
शिवाजी का प्रशासन
केंद्रीय प्रशासन:
- छत्रपति: सर्वोच्च सत्ता
- अष्टप्रधान मंडल: आठ मंत्रियों की परिषद
- पेशवा: प्रधानमंत्री (सबसे महत्वपूर्ण)
- अमात्य: वित्त मंत्री
- सचिव: पत्राचार
- मंत्री: राजा के निजी सचिव
- सेनापति: सेनापति
- दानाध्यक्ष: धार्मिक एवं दान कार्य
- न्यायाधीश: न्याय व्यवस्था
- सुमंत: विदेश मंत्री
प्रांतीय प्रशासन:
- प्रांत: सूबेदार द्वारा शासन
- जिला: हवलदार द्वारा
- परगना: कारखाना द्वारा
- ग्राम: पटेल एवं कुलकर्णी द्वारा
सैन्य व्यवस्था:
- स्थायी सेना: पैदल, घुड़सवार, हाथी
- नौसेना: समुद्री तट की सुरक्षा
- दुर्ग प्रणाली: 300 से अधिक दुर्ग
- शस्त्र: तलवार, भाला, धनुष, बंदूक
राजस्व व्यवस्था:
- चौथ: पड़ोसी राज्यों से वसूला जाने वाला कर (25% आय)
- सरदेशमुखी: अतिरिक्त कर (10%)
- भूमि कर: उपज का 33-40%
शिवाजी की विशेषताएँ
- धार्मिक सहिष्णुता: मुस्लिमों एवं अन्य धर्मों के प्रति उदार
- मराठी भाषा: संस्कृत के स्थान पर मराठी का प्रयोग
- कृषि सुधार: सिंचाई एवं बंजर भूमि का विकास
- व्यापार: व्यापारियों को प्रोत्साहन
पेशवा काल (1713-1818 ई.) – मराठा साम्राज्य का स्वर्ण युग
शिवाजी की मृत्यु के बाद मराठा साम्राज्य में पेशवाओं का प्रभुत्व बढ़ा। बालाजी विश्वनाथ को पेशवा पद मिला और उनके बाद उनके वंशजों ने मराठा साम्राज्य को नई ऊँचाई पर पहुँचाया।
प्रमुख पेशवा
| क्र.सं. | पेशवा | शासनकाल | विशेषताएँ |
|---|---|---|---|
| 1 | बालाजी विश्वनाथ | 1713-1720 | पेशवा पद की स्थापना; शाहूजी से अधिकार प्राप्त |
| 2 | बाजीराव प्रथम | 1720-1740 | “बाजीराव बल्लाल”; मराठा साम्राज्य का सबसे बड़ा विस्तार |
| 3 | बालाजी बाजीराव | 1740-1761 | “नाना साहेब”; पानीपत का युद्ध |
| 4 | माधवराव प्रथम | 1761-1772 | पानीपत के बाद पुनर्निर्माण |
| 5 | माधवराव द्वितीय | 1774-1795 | “माधवराव नारायण”; अंग्रेजों से संघर्ष |
| 6 | बाजीराव द्वितीय | 1796-1818 | अंतिम पेशवा; अंग्रेजों से पराजित |
बाजीराव प्रथम (1720-1740 ई.)
विस्तार:
- उत्तर भारत: मालवा, गुजरात, बुंदेलखंड पर अधिकार
- दक्षिण: हैदराबाद, मैसूर, तंजौर पर प्रभाव
- मध्य भारत: होल्कर, सिंधिया, गायकवाड़, भोंसले – चार प्रमुख सरदारों का उदय
प्रमुख युद्ध:
- 1720 ई.: खंडवा का युद्ध (मुगलों पर विजय)
- 1728 ई.: पालखेड़ का युद्ध (हैदराबाद के निजाम को पराजित)
- 1737 ई.: दिल्ली पर आक्रमण
- 1739 ई.: करनाल का युद्ध (नादिर शाह के आक्रमण का समय)
महत्व:
- मराठा साम्राज्य को उत्तर भारत में सर्वोच्च शक्ति बनाया
- हिंदूपदपादशाही (हिंदू साम्राज्य) की अवधारणा को मूर्त रूप दिया
- 1740 ई.: मृत्यु (39 वर्ष की आयु में)
बालाजी बाजीराव (1740-1761 ई.)
विस्तार:
- उत्तर भारत: पंजाब तक मराठा प्रभुत्व
- दक्षिण: हैदराबाद एवं मैसूर पर नियंत्रण
- राजस्थान: राजपूत राज्यों पर प्रभाव
पानीपत का तृतीय युद्ध (1761 ई.):
- पक्ष: मराठा (सदाशिवराव भाऊ) बनाम अहमद शाह अब्दाली (अफगान)
- कारण: पंजाब पर नियंत्रण का संघर्ष
- परिणाम: मराठा पराजित; सदाशिवराव भाऊ की मृत्यु
- प्रभाव: मराठा साम्राज्य की शक्ति कमजोर; उत्तर भारत में प्रभाव समाप्त
माधवराव प्रथम (1761-1772 ई.)
- पानीपत के बाद मराठा साम्राज्य का पुनर्निर्माण
- 1767 ई.: हैदराबाद के निजाम को पराजित किया
- 1771 ई.: दिल्ली पर पुनः अधिकार
- 1772 ई.: मृत्यु (27 वर्ष की आयु में)
मराठा संघ (Confederacy)
माधवराव की मृत्यु के बाद मराठा साम्राज्य संघीय ढाँचे में बँट गया। प्रमुख सरदार:
| सरदार | क्षेत्र | राजधानी |
|---|---|---|
| होल्कर | मालवा | इंदौर |
| सिंधिया | ग्वालियर | ग्वालियर |
| गायकवाड़ | गुजरात | बड़ौदा |
| भोंसले | नागपुर | नागपुर |
संघ की विशेषताएँ:
- केंद्रीय सत्ता कमजोर
- प्रत्येक सरदार स्वतंत्र
- पेशवा केवल नाममात्र प्रमुख
- आपसी संघर्ष एवं प्रतिस्पर्धा
अंग्रेजों से संघर्ष
प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध (1775-1782 ई.):
- कारण: सूरत की संधि (1775 ई.)
- परिणाम: सालबाई की संधि (1782 ई.) – मराठा लाभान्वित
द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध (1803-1805 ई.):
- कारण: पेशवा एवं सिंधिया का संघर्ष
- परिणाम: बेसिन की संधि (1802 ई.) – अंग्रेजों का प्रभुत्व
तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध (1817-1818 ई.):
- कारण: पेशवा बाजीराव द्वितीय का अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह
- परिणाम: मराठा साम्राज्य का अंत; बाजीराव द्वितीय का पदत्याग
- 1818 ई.: मराठा साम्राज्य का अंतिम रूप से पतन
मराठा साम्राज्य का प्रशासन
केंद्रीय प्रशासन
- छत्रपति: नाममात्र प्रमुख (शिवाजी के बाद)
- पेशवा: वास्तविक सत्ता (1713 ई. के बाद)
- अष्टप्रधान मंडल: मंत्रिपरिषद (शिवाजी काल से)
- दरबार: निर्णय लेने का स्थान
प्रांतीय प्रशासन
- प्रांत: सूबेदार
- जिला: हवलदार
- परगना: कारखाना
- ग्राम: पटेल
राजस्व व्यवस्था
- चौथ: पड़ोसी राज्यों से 25% कर
- सरदेशमुखी: 10% अतिरिक्त कर
- भूमि कर: उपज का 33-40%
- व्यापार कर: वाणिज्य पर कर
सैन्य व्यवस्था
- स्थायी सेना: पैदल, घुड़सवार, तोपखाना
- नौसेना: समुद्री सुरक्षा
- दुर्ग: 300+ दुर्ग
- सैन्य संगठन: पेशवा के अधीन
मराठा साम्राज्य का महत्व
राजनीतिक महत्व:
- मुगल साम्राज्य के पतन के बाद उत्तर भारत में शक्ति संतुलन
- अंग्रेजों के विस्तार में बाधा
- हिंदू साम्राज्य की स्थापना
सांस्कृतिक महत्व:
- मराठी भाषा एवं साहित्य का विकास
- हिंदू धर्म एवं संस्कृति का संरक्षण
- कला एवं स्थापत्य का विकास
सामाजिक महत्व:
- जाति व्यवस्था में परिवर्तन
- महिलाओं की स्थिति में सुधार (ताराबाई, अहिल्याबाई होल्कर)
- शिक्षा का प्रसार
बिहार से संबंध
- बिहार पर मराठा आक्रमण: 1740 के दशक में बाजीराव प्रथम ने बिहार पर आक्रमण किया
- अलीवर्दी खाँ (बंगाल के नवाब) ने मराठा आक्रमण का प्रतिरोध किया
- 1741 ई.: मराठा सेना ने बिहार में प्रवेश किया
- 1743 ई.: मराठा एवं बंगाल के नवाब के बीच संधि
- बिहार में मराठा प्रभाव: सीमावर्ती क्षेत्रों पर नियंत्रण
मॉडल प्रश्न (BPSC PT पैटर्न पर आधारित)
प्रश्न 1: मराठा साम्राज्य के संस्थापक कौन थे?
(a) बाजीराव प्रथम
(b) शिवाजी
(c) बालाजी विश्वनाथ
(d) माधवराव प्रथम
उत्तर: (b) शिवाजी
व्याख्या: शिवाजी ने 1674 ई. में रायगढ़ में राज्याभिषेक करके मराठा साम्राज्य की स्थापना की।
प्रश्न 2: शिवाजी के प्रशासन में ‘अष्टप्रधान मंडल’ में सबसे महत्वपूर्ण पद कौन सा था?
(a) अमात्य
(b) पेशवा
(c) सेनापति
(d) सचिव
उत्तर: (b) पेशवा
व्याख्या: अष्टप्रधान मंडल में पेशवा (प्रधानमंत्री) सबसे महत्वपूर्ण पद था, जो बाद में मराठा साम्राज्य का वास्तविक शासक बन गया।
प्रश्न 3: पानीपत का तृतीय युद्ध (1761 ई.) किनके बीच हुआ?
(a) मराठा और मुगल
(b) मराठा और अफगान
(c) मराठा और अंग्रेज
(d) मुगल और अफगान
उत्तर: (b) मराठा और अफगान
व्याख्या: पानीपत का तृतीय युद्ध मराठा (सदाशिवराव भाऊ) और अहमद शाह अब्दाली (अफगान) के बीच हुआ, जिसमें मराठा पराजित हुए।
प्रश्न 4: ‘चौथ’ क्या था?
(a) भूमि कर
(b) पड़ोसी राज्यों से वसूला जाने वाला 25% कर
(c) व्यापार कर
(d) धार्मिक कर
उत्तर: (b) पड़ोसी राज्यों से वसूला जाने वाला 25% कर
व्याख्या: चौथ मराठा साम्राज्य की आय का प्रमुख स्रोत था, जो पड़ोसी राज्यों से 25% के रूप में वसूला जाता था।
प्रश्न 5: मराठा संघ के प्रमुख सरदारों में कौन सम्मिलित नहीं था?
(a) होल्कर
(b) सिंधिया
(c) गायकवाड़
(d) निजाम
उत्तर: (d) निजाम
व्याख्या: मराठा संघ में होल्कर, सिंधिया, गायकवाड़ और भोंसले प्रमुख सरदार थे। निजाम हैदराबाद का शासक था, मराठा सरदार नहीं।
प्रश्न 6: प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध किस संधि से समाप्त हुआ?
(a) बेसिन की संधि
(b) सालबाई की संधि
(c) पुरंदर की संधि
(d) सूरत की संधि
उत्तर: (b) सालबाई की संधि
व्याख्या: प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध (1775-1782 ई.) सालबाई की संधि (1782 ई.) से समाप्त हुआ, जिसमें मराठा लाभान्वित हुए।
प्रश्न 7: अंतिम पेशवा कौन था?
(a) माधवराव द्वितीय
(b) बाजीराव द्वितीय
(c) बालाजी बाजीराव
(d) माधवराव प्रथम
उत्तर: (b) बाजीराव द्वितीय
व्याख्या: बाजीराव द्वितीय (1796-1818 ई.) अंतिम पेशवा था, जिसने तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध के बाद पद त्याग दिया।
प्रश्न 8: बिहार पर मराठा आक्रमण किसके नेतृत्व में हुआ?
(a) शिवाजी
(b) बाजीराव प्रथम
(c) बालाजी बाजीराव
(d) माधवराव प्रथम
उत्तर: (b) बाजीराव प्रथम
व्याख्या: 1740 के दशक में बाजीराव प्रथम के नेतृत्व में मराठा सेना ने बिहार पर आक्रमण किया, जिसका प्रतिरोध अलीवर्दी खाँ ने किया।
प्रश्न 9: ‘सरदेशमुखी’ क्या था?
(a) 25% कर
(b) 10% अतिरिक्त कर
(c) भूमि कर
(d) व्यापार कर
उत्तर: (b) 10% अतिरिक्त कर
व्याख्या: सरदेशमुखी चौथ के अतिरिक्त 10% कर था, जो मराठा साम्राज्य की आय का स्रोत था।
प्रश्न 10: मराठा साम्राज्य का अंतिम रूप से पतन कब हुआ?
(a) 1761 ई.
(b) 1802 ई.
(c) 1818 ई.
(d) 1857 ई.
उत्तर: (c) 1818 ई.
व्याख्या: तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध (1817-1818 ई.) के बाद मराठा साम्राज्य का अंतिम रूप से पतन हो गया।
BPSC PT के लिए रणनीति
- शिवाजी: अष्टप्रधान मंडल, चौथ, सरदेशमुखी, प्रमुख युद्ध (अफजल खाँ, पुरंदर संधि)
- पेशवा: बाजीराव प्रथम, बालाजी बाजीराव, पानीपत का तृतीय युद्ध, मराठा संघ
- आंग्ल-मराठा युद्ध: तीनों युद्धों के कारण एवं परिणाम
- बिहार संबंध: बाजीराव प्रथम का बिहार आक्रमण, अलीवर्दी खाँ का प्रतिरोध
- पिछले प्रश्न पत्र: BPSC 71वें CCE तक के प्रश्न पत्रों का अभ्यास करें
इन नोट्स के आधार पर तैयारी करें और नियमित रूप से मॉडल प्रश्नों का अभ्यास करें। शुभकामनाएँ!