बिहार विशेष सर्वे एवं सेटलमेंट अधिनियम, 2011
बिहार के कानूनों में “सर्वे” (Survey) मुख्यतः दो प्रसंगों में आता है, जो BPSC परीक्षा के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं:
- भूमि रिकॉर्ड सर्वे: यह “बिहार विशेष सर्वे एवं सेटलमेंट अधिनियम, 2011” द्वारा संचालित होता है।
- जाति-आधारित सर्वे: यह हालिया राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय रहा है।
नीचे दोनों का विस्तृत विवरण दिया जा रहा है:
- बिहार विशेष सर्वे एवं सेटलमेंट अधिनियम, 2011
यह अधिनियम बिहार में भूमि रिकॉर्ड के आधुनिकीकरण और सुदृढ़ीकरण हेतु सबसे महत्वपूर्ण कानून है।
उद्देश्य:
· राज्य में भूमि रिकॉर्ड का व्यवस्थित सर्वेक्षण और बंदोबस्त (सर्वे एंड सेटलमेंट) करना।
· प्रौद्योगिकी (GIS, डिजिटलीकरण) का उपयोग करके रिकॉर्ड को पारदर्शी और छेड़छाड़ रहित बनाना।
· भूमि विवादों को कम करना और भू-उपयोग की स्पष्टता सुनिश्चित करना।
प्रमुख प्रावधान एवं प्रक्रिया:
· धारा 5 (स्व-घोषणा): जमींदार/धारक अपनी जमीन का स्व-घोषणा पत्र जमा कर सकते हैं, जिसे अंचल कार्यालय सत्यापित करता है।
· तकनीकी सर्वेक्षण (Kistwar by technology): सीमांकन (Demarcation) और ग्राउंड ट्रुथिंग के लिए GPS जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग अनिवार्य किया गया है।
· खानापूरी (Khanapuri): यह खेतिहरों के नाम, कब्जा और क्षेत्रफल को दर्ज करने की प्रक्रिया है।
· लाइसेंस प्राप्त सर्वेक्षक (Licensed Surveyor): अधिनियम “लाइसेंस प्राप्त सर्वेक्षकों” का प्रावधान करता है, जो मानचित्र तैयार कर सकते हैं और रिकॉर्ड अपडेट कर सकते हैं। यह डिजिटल और ग्राउंड ट्रुथिंग कार्यों के बीच की कड़ी का काम करते हैं।
· डिजिटल रखरखाव: तैयार रिकॉर्ड की प्रतियां डिजिटल रूप में रखी जाती हैं।
BPSC विशेष
यह अधिनियम राष्ट्रीय भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम (NLRMP) का राज्य स्तरीय कार्यान्वयन है। परीक्षा में आपको “खानापूरी” (रिकॉर्ड लिखने की प्रक्रिया) और “लाइसेंस प्राप्त सर्वेक्षक” से संबंधित परिभाषाएं याद रखनी होंगी।
- बिहार जाति-आधारित सर्वे, 2023
हालाँकि यह कानून नहीं है, लेकिन यह एक सरकारी कार्रवाई है, जिसने महत्वपूर्ण कानूनी चुनौतियाँ देखी हैं और BPSC के लिए यह अत्यंत सामयिक विषय है।
उद्देश्य:
· बिहार की 12.70 करोड़ (लगभग) की आबादी के आर्थिक और सामाजिक डेटा के साथ जाति-आधारित गणना करना।
· पिछड़े वर्गों के लिए बेहतर नीतियां और योजनाएं बनाना। (नोट: आखिरी सार्वजनिक जाति जनगणना 1931 में हुई थी)।
कानूनी लड़ाई और चुनौतियाँ:
· प्रारंभिक रोक: पटना हाईकोर्ट ने दूसरे चरण के दौरान इस पर रोक लगा दी थी (4 मई, 2023)।
· याचिकाकर्ताओं के तर्क:
· कानूनी क्षमता: जनगणना केंद्र सूची (सातवीं अनुसूची, प्रविष्टि 69) का विषय है। राज्य के पास जनगणना कराने का अधिकार नहीं है।
· गोपनीयता का अधिकार (अनुच्छेद 21): जाति थोपना निजता के अधिकार का उल्लंघन है।
· हाईकोर्ट की पुष्टि: पटना हाईकोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए सर्वे को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि इंद्र साहनी केस (1992) के अनुसार, अनुच्छेद 16(4) के तहत सामाजिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए जातियों की पहचान करने में कोई दोष नहीं है।
BPSC विशेष
इस सर्वे में डेटा संग्रह के लिए मोबाइल एप का उपयोग किया गया और पंचायती राज संस्थाओं को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया। यह 1931 के बाद पहली बड़ी जाति-आधारित गणना थी।
त्वरित तुलना (Quick Revision)
विशेषता भूमि सर्वे (2011 अधिनियम) जाति सर्वे (2023 अभियान)
प्रमुख उद्देश्य भूमि रिकॉर्ड का आधुनिकीकरण व डिजिटलीकरण सामाजिक-आर्थिक नीति हेतु जाति डेटा एकत्र करना
कानूनी स्थिति अधिनियमित कानून (Act) सरकारी कार्य (अभियान)
कानूनी चुनौती नहीं हाँ (गोपनीयता और क्षेत्राधिकार को लेकर)
तकनीक का उपयोग GIS, GPS, डिजिटल रिकॉर्ड मोबाइल एप्लिकेशन
सुझाव: परीक्षा में यदि “Special Survey and Settlement Act” पूछे तो उत्तर भूमि रिकॉर्ड से जुड़ा होगा। जाति सर्वेख पेपर में यदि पूछा जाए तो उससे जुड़े अनुच्छेद 21 (गोपनीयता), अनुच्छेद 16(4) और इंद्र साहनी केस को याद रखना अत्यंत आवश्यक है।