1942 का भारत छोड़ो आंदोलन (अगस्त क्रांति) – BPSC नोट्स

1942 का भारत छोड़ो आंदोलन (अगस्त क्रांति) – BPSC नोट्स

  1. आंदोलन का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य (कारण)

BPSC में अक्सर पूछा जाता है कि यह आंदोलन क्यों हुआ। मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

· क्रिप्स मिशन की विफलता (मुख्य कारण): मार्च 1942 में सर स्टैफोर्ड क्रिप्स भारत आया, लेकिन उसके प्रस्तावों (डोमिनियन स्टेटस का वादा) को कांग्रेस ने अस्वीकार कर दिया। इस विफलता ने साबित कर दिया कि अंग्रेज भारतीयों को तुरंत सत्ता हस्तांतरित नहीं करना चाहते ।
· युद्धकालीन परिस्थितियाँ: द्वितीय विश्व युद्ध में ब्रिटेन की पराजय (सिंगापुर, बर्मा में) ने “ब्रिटिश शक्ति की अजेयता” का मिथक तोड़ दिया। जापानी सेना भारत की सीमाओं तक आ पहुंची थी ।
· आर्थिक संकट: युद्ध के कारण महंगाई बेतहाशा बढ़ गई थी, आवश्यक वस्तुओं का अभाव हो गया था, जिससे जनता में व्यापक असंतोष था ।
· बर्मा (म्यांमार) में भेदभाव: भारतीय शरणार्थियों के साथ यूरोपियनों की तुलना में अमानवीय व्यवहार ने आक्रोश पैदा किया ।

  1. आंदोलन का प्रारंभ (8 अगस्त 1942)

· बैठक स्थल: गोवालिया टैंक मैदान, मुंबई (आज का ‘अगस्त क्रांति मैदान’) ।
· प्रस्ताव: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने ‘भारत छोड़ो’ प्रस्ताव पारित किया।
· प्रमुख घोषणाएँ:
· तत्काल स्वतंत्रता की मांग।
· ब्रिटिश हटने के बाद अस्थायी सरकार का गठन।
· नारा: इसी दिन गांधीजी ने ‘करो या मरो’ (Do or Die) का ऐतिहासिक नारा दिया ।
· नोट: ‘भारत छोड़ो’ का नारा यूसुफ मेहरअली ने गढ़ा था ।

  1. आंदोलन का प्रसार और प्रमुख विशेषताएं

9 अगस्त 1942 को अंग्रेजों ने गांधी, नेहरू, पटेल सहित सभी बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। इसके परिणामस्वरूप, आंदोलन का नेतृत्व युवाओं और क्रांतिकारियों के हाथों में आ गया और यह हिंसक हो गया ।

· समानांतर सरकारें (Parallel Governments): यह BPSC के लिए सबसे महत्वपूर्ण टॉपिक है।
· बलिया (उत्तर प्रदेश): चित्तू पांडे के नेतृत्व में।
· तामलुक (बंगाल): सत्याग्रही के नेतृत्व में।
· सतारा (महाराष्ट्र): पति सरकार (प्रति सरकार) – यह सबसे सफल और लंबे समय तक चलने वाली समानांतर सरकार थी (1946 तक चली) ।
· भूमिगत गतिविधियाँ:
· कांग्रेस रेडियो: उषा मेहता ने मुंबई से भूमिगत रेडियो चलाया।
· जयप्रकाश नारायण ने हजारीबाग जेल से साहसिक भाग निकले और ‘आजाद दस्ता’ का गठन किया ।
· अन्य प्रमुख नेता: राम मनोहर लोहिया और अरुणा आसफ अली (जिन्होंने गोवालिया टैंक में झंडा फहराया था) ।

  1. BPSC के लिए विशिष्ट तथ्य (बिहार का योगदान)

बिहार की धरती ने इस आंदोलन में अहम भूमिका निभाई। ये तथ्य प्रीलिम्स में पूछे जा सकते हैं:

· बिहार में केंद्र: पूर्वी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ बिहार आंदोलन का प्रमुख गढ़ था। यहाँ हिंसक विद्रोह हुए, रेलवे ट्रैक उखाड़े गए और पुलिस स्टेशनों पर हमले हुए ।
· हजारीबाग जेल (झारखंड, पूर्व में बिहार): जयप्रकाश नारायण की 1942 में हजारीबाग सेंट्रल जेल से भागने की घटना अत्यंत महत्वपूर्ण है ।
· दामिन-ए-कोह क्षेत्र: संथाल परगना (झारखंड/बिहार) के पहाड़िया जनजाति ने भी इस आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया था ।

  1. सरकारी दमन और आंदोलन का अंत

· ब्रिटिश प्रतिक्रिया: अत्यंत क्रूरता। अनुमानित 10,000 लोग मारे गए, 1 लाख से अधिक लोग जेल में डाले गए ।
· अहिंसा की हार: गांधीजी के अहिंसक आह्वान के बावजूद, यह आंदोलन कई जगहों पर प्रशासन विरोधी हिंसक विद्रोह में बदल गया।

  1. BPSC परीक्षा के लिए बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) अभ्यास

· प्रश्न 1: ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ (1942) शुरू करने का तात्कालिक कारण क्या था?
a) जापान का भारत पर आक्रमण
b) क्रिप्स मिशन की विफलता
c) महंगाई
d) गांधी-इरविन समझौता
उत्तर: b) क्रिप्स मिशन की विफलता
· प्रश्न 2: 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान ‘हजारीबाग जेल’ से निम्नलिखित में से कौन फरार हुआ था?
a) राम मनोहर लोहिया
b) जयप्रकाश नारायण
c) यूसुफ मेहरअली
d) चित्तू पांडे
उत्तर: b) जयप्रकाश नारायण
· प्रश्न 3: भारत छोड़ो आंदोलन (1942) के समय भूमिगत रेडियो ‘कांग्रेस रेडियो’ का संचालन किसने किया?
a) अरुणा आसफ अली
b) सुचेता कृपलानी
c) उषा मेहता
d) विजयलक्ष्मी पंडित
उत्तर: c) उषा मेहता
· प्रश्न 4: निम्नलिखित में से कौन सा स्थान 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान समानांतर सरकार नहीं था?
a) बलिया
b) सतारा
c) तामलुक
d) चौरी-चौरा
उत्तर: d) चौरी-चौरा (चौरी-चौरा 1922 में था)


संक्षिप्त निष्कर्ष (Exam की दृष्टि से)

भारत छोड़ो आंदोलन 1942, क्रिप्स मिशन की विफलता के परिणामस्वरूप आरम्भ हुआ। हालाँकि इसे एक वर्ष के भीतर कुचल दिया गया, लेकिन इसने यह साबित कर दिया कि अंग्रेज भारत में बिना जनता के सहयोग के नहीं रह सकते। बिहार की दृष्टि से, जयप्रकाश नारायण का हजारीबाग से पलायन एवं पूर्वी बिहार में सक्रिय जन विद्रोह अति महत्वपूर्ण है

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