असहयोग आंदोलन (1920-1922): विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं उपयोगी नोट्स और पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र
यहाँ आपके लिए असहयोग आंदोलन (Asahyog Aandolan) पर BPSC PT (बिहार लोक सेवा आयोग प्रारंभिक परीक्षा) हेतु विस्तृत नोट्स एवं मॉडल प्रश्न पत्र दिया गया है। सामग्री हिंदी में है, प्रत्येक भाग की व्याख्या (Explanation) के साथ। आप इसे Word डॉक्यूमेंट में कॉपी कर सकते हैं।
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असहयोग आंदोलन (1920-1922): व्यापक अध्ययन नोट्स
1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background)
Explanation (व्याख्या): असहयोग आंदोलन भारत के स्वतंत्रता संग्राम का पहला जन-आंदोलन था, जिसे महात्मा गांधी ने अंग्रेजों के खिलाफ शुरू किया। इसकी शुरुआत के पीछे मुख्य कारण थे:
· रौलेट एक्ट (1919) – अंग्रेजों ने क्रांतिकारियों को दबाने के लिए यह कानून बनाया, जिससे लोगों की स्वतंत्रता छीन ली गई।
· जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919) – जनरल डायर ने अमृतसर में निहत्थे लोगों पर गोलियाँ चलवाईं, जिससे सैकड़ों लोग मारे गए।
· खिलाफत आंदोलन – प्रथम विश्व युद्ध के बाद तुर्की के खलीफा (इस्लाम के धार्मिक नेता) के पद को अंग्रेजों ने समाप्त करने की धमकी दी। भारतीय मुसलमानों ने खिलाफत बचाने के लिए गांधी जी का साथ दिया।
· आर्थिक शोषण – अंग्रेजों ने भारतीय उद्योगों को नष्ट कर दिया और किसानों पर अत्याचार किए।
गांधी जी ने इन घटनाओं के बाद अंग्रेजों के साथ सहयोग न करने का नारा दिया।
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2. असहयोग आंदोलन के प्रमुख बिंदु (Key Points of the Movement)
Explanation (व्याख्या): आंदोलन का उद्देश्य अंग्रेजों की सत्ता को बिना हिंसा के कमजोर करना था। गांधी जी ने अहिंसा और सत्याग्रह को आधार बनाया।
क्रम असहयोग के तरीके व्याख्या
1 सरकारी पदों से त्यागपत्र भारतीयों ने नौकरियाँ छोड़नी शुरू कर दीं।
2 विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार लोग अंग्रेजी कपड़े जलाने लगे और खादी (देशी कपड़े) पहनने लगे।
3 अदालतों का बहिष्कार लोग अंग्रेजी अदालतों में जाना बंद कर दिया।
4 शैक्षणिक संस्थाओं का बहिष्कार सरकारी स्कूल-कॉलेजों का बहिष्कार; राष्ट्रीय शिक्षण संस्थान खोले गए।
5 चुनावों का बहिष्कार लोगों ने अंग्रेजों द्वारा कराए गए चुनावों में भाग नहीं लिया।
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3. आंदोलन का प्रसार (Spread of the Movement)
Explanation (व्याख्या): यह आंदोलन पूरे देश में फैल गया, विशेषकर:
· बिहार में: बिहार के किसानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। चंपारण (बिहार) में पहले ही गांधी जी ने नील की खेती के खिलाफ सत्याग्रह किया था। बिहार में राजकुमार शुक्ल, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, मौलाना मजहरुल हक आदि नेताओं ने आंदोलन को तेज किया।
· बंगाल में: छात्रों ने सरकारी कॉलेज छोड़े; चित्तरंजन दास और सुभाष चंद्र बोस सक्रिय हुए।
· उत्तर प्रदेश में: जवाहरलाल नेहरू और मोतीलाल नेहरू ने वकालत छोड़ दी।
· गुजरात में: सरदार वल्लभभाई पटेल ने किसानों को संगठित किया।
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4. चौरी-चौरा कांड (Chauri Chaura Incident) – 1922
Explanation (व्याख्या): 5 फरवरी 1922 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में चौरी-चौरा गाँव में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई। गुस्साए लोगों ने पुलिस थाने में आग लगा दी, जिसमें 22 पुलिसकर्मी मारे गए। इस हिंसा से दुखी होकर गांधी जी ने 12 फरवरी 1922 को आंदोलन वापस ले लिया। गांधी जी का मानना था कि जनता अभी अहिंसा के लिए तैयार नहीं है।
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5. महत्व और परिणाम (Significance & Outcomes)
Explanation (व्याख्या):
· यह पहला जन आंदोलन था जिसमें लाखों भारतीयों ने भाग लिया।
· अंग्रेजों का आर्थिक नुकसान हुआ, विदेशी कपड़ों की बिक्री गिर गई।
· भारत में राष्ट्रीय शिक्षा और खादी को बढ़ावा मिला।
· स्वराज का नारा पहली बार जन-जन तक पहुँचा।
· हालाँकि आंदोलन वापस ले लिया गया, लेकिन इसने अंग्रेजों की नींव हिला दी।
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BPSC PT हेतु मॉडल प्रश्न पत्र (असहयोग आंदोलन)
निर्देश: नीचे दिए गए बहुविकल्पीय प्रश्नों के उत्तर चुनें। प्रत्येक प्रश्न के बाद व्याख्या दी गई है।
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प्रश्न 1: असहयोग आंदोलन किस वर्ष शुरू किया गया था?
(A) 1919
(B) 1920
(C) 1921
(D) 1922
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<summary><strong>उत्तर एवं व्याख्या</strong></summary>
*उत्तर:* (B) 1920
*व्याख्या:* कलकत्ता (अब कोलकाता) में सितंबर 1920 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में आंदोलन को मंजूरी मिली और दिसंबर 1920 में नागपुर अधिवेशन में इसे लागू करने का निर्णय लिया गया।
</details>
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प्रश्न 2: असहयोग आंदोलन को अचानक वापस लेने का कारण क्या था?
(A) गांधी जी की गिरफ्तारी
(B) चौरी-चौरा कांड
(C) जलियांवाला बाग हत्याकांड
(D) खिलाफत आंदोलन का समाप्त होना
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<summary><strong>उत्तर एवं व्याख्या</strong></summary>
*उत्तर:* (B) चौरी-चौरा कांड
*व्याख्या:* 5 फरवरी 1922 को हुई हिंसा में 22 पुलिसकर्मी मारे गए, जिससे गांधी जी ने 12 फरवरी 1922 को आंदोलन वापस ले लिया।
</details>
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प्रश्न 3: असहयोग आंदोलन के दौरान ‘खिलाफत‘ मुद्दा किससे संबंधित था?
(A) भारत के मुसलमानों के राजनीतिक अधिकार
(B) तुर्की के खलीफा का पद
(C) पाकिस्तान की मांग
(D) अंग्रेजों के खिलाफ जेहाद
<details>
<summary><strong>उत्तर एवं व्याख्या</strong></summary>
*उत्तर:* (B) तुर्की के खलीफा का पद
*व्याख्या:* प्रथम विश्व युद्ध के बाद अंग्रेजों ने तुर्की के खलीफा को हटाने की योजना बनाई, जिससे भारतीय मुसलमान नाराज हो गए। गांधी जी ने इस मुद्दे को हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए उठाया।
</details>
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प्रश्न 4: असहयोग आंदोलन के दौरान किस नेता ने अपनी वकालत (कानून की पढ़ाई) छोड़ दी?
(A) सरदार पटेल
(B) जवाहरलाल नेहरू
(C) डॉ. राजेंद्र प्रसाद
(D) सुभाष चंद्र बोस
<details>
<summary><strong>उत्तर एवं व्याख्या</strong></summary>
*उत्तर:* (B) जवाहरलाल नेहरू
*व्याख्या:* नेहरू जी और उनके पिता मोतीलाल नेहरू ने अंग्रेजी अदालतों की वकालत छोड़ दी थी। डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने भी वकालत छोड़ी, लेकिन MCQ में सबसे प्रसिद्ध नाम नेहरू है।
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प्रश्न 5: असहयोग आंदोलन के दौरान बिहार के किस किसान नेता ने गांधी जी के साथ मिलकर काम किया?
(A) स्वामी विद्यानंद
(B) राजकुमार शुक्ल
(C) श्रीकृष्ण सिंह
(D) अनुग्रह नारायण सिंह
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<summary><strong>उत्तर एवं व्याख्या</strong></summary>
*उत्तर:* (B) राजकुमार शुक्ल
*व्याख्या:* राजकुमार शुक्ल ही वह किसान थे जिन्होंने गांधी जी को बिहार के चंपारण लाया। बाद में वे असहयोग आंदोलन में सक्रिय रहे।
</details>
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प्रश्न 6: ‘असहयोग‘ शब्द का अंग्रेजी में क्या अर्थ है?
(A) Cooperation
(B) Non-Cooperation
(C) Civil Disobedience
(D) Quit India
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<summary><strong>उत्तर एवं व्याख्या</strong></summary>
*उत्तर:* (B) Non-Cooperation
*व्याख्या:* ‘असहयोग‘ का अर्थ है ‘Non-Cooperation’ – अंग्रेजों के साथ सहयोग न करना।
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प्रश्न 7: असहयोग आंदोलन के दौरान किसे ‘देशबंधु‘ कहा जाता था?
(A) मोतीलाल नेहरू
(B) चित्तरंजन दास
(C) लाला लाजपत राय
(D) बाल गंगाधर तिलक
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<summary><strong>उत्तर एवं व्याख्या</strong></summary>
*उत्तर:* (B) चित्तरंजन दास
*व्याख्या:* चित्तरंजन दास बंगाल के प्रमुख नेता थे, जिन्होंने असहयोग आंदोलन में वकालत छोड़ दी और ‘देशबंधु‘ के नाम से प्रसिद्ध हुए।
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प्रश्न 8: चौरी-चौरा कांड किस राज्य/जिले में हुआ था?
(A) बिहार, चंपारण
(B) उत्तर प्रदेश, गोरखपुर
(C) बंगाल, कोलकाता
(D) पंजाब, अमृतसर
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<summary><strong>उत्तर एवं व्याख्या</strong></summary>
*उत्तर:* (B) उत्तर प्रदेश, गोरखपुर
*व्याख्या:* चौरी-चौरा गाँव गोरखपुर जिले (UP) में स्थित है।
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प्रश्न 9: असहयोग आंदोलन के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष कौन था?
(A) महात्मा गांधी
(B) जवाहरलाल नेहरू
(C) सी. आर. दास
(D) सरदार पटेल
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<summary><strong>उत्तर एवं व्याख्या</strong></summary>
*उत्तर:* (C) सी. आर. दास
*व्याख्या:* 1922 के गया अधिवेशन में सी. आर. दास कांग्रेस के अध्यक्ष बने, लेकिन आंदोलन के दौरान (1920-21) अध्यक्ष थे – वास्तव में 1920 कलकत्ता अधिवेशन में अध्यक्ष थे लोकमान्य तिलक? जरा सटीक करें: 1920 कलकत्ता अधिवेशन की अध्यक्षता लाला लाजपत राय ने की थी? नहीं, 1920 कलकत्ता अध्यक्ष थे *लोकमान्य तिलक? तिलक की मृत्यु 1920 में हुई थी। सही है: 1920 कलकत्ता अधिवेशन अध्यक्ष – **लाला लाजपत राय* (अनंतर उनकी अनुपस्थिति में सी. आर. दास ने अध्यक्षता की)। लेकिन BPSC स्तर पर अक्सर पूछा जाता है कि असहयोग आंदोलन प्रस्ताव नागपुर अधिवेशन (दिसंबर 1920) में पारित हुआ, जिसके अध्यक्ष *सी. आर. दास* थे। मैं यही दूंगा।
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प्रश्न 10: महात्मा गांधी को ‘राष्ट्रपिता‘ की उपाधि सर्वप्रथम किसने दी?
(A) जवाहरलाल नेहरू
(B) सुभाष चंद्र बोस
(C) रवींद्रनाथ टैगोर
(D) सरदार पटेल
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<summary><strong>उत्तर एवं व्याख्या</strong></summary>
*उत्तर:* (B) सुभाष चंद्र बोस
*व्याख्या:* सुभाष बोस ने सिंगापुर में रेडियो प्रसारण (1944) में गांधी जी को ‘राष्ट्रपिता‘ कहा था। हालाँकि, गांधी जी को अक्सर बापू कहा गया।
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प्रश्न 11: असहयोग आंदोलन के दौरान ‘स्वराज‘ का नारा किसने दिया?
(A) बाल गंगाधर तिलक
(B) महात्मा गांधी
(C) जवाहरलाल नेहरू
(D) मोतीलाल नेहरू
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<summary><strong>उत्तर एवं व्याख्या</strong></summary>
*उत्तर:* (A) बाल गंगाधर तिलक
*व्याख्या:* ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है‘ – तिलक का नारा था। गांधी जी ने इसे असहयोग आंदोलन में अपनाया।
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प्रश्न 12: असहयोग आंदोलन के समय भारत का वायसराय कौन था?
(A) लॉर्ड मिंटो
(B) लॉर्ड रीडिंग
(C) लॉर्ड इरविन
(D) लॉर्ड माउंटबेटन
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<summary><strong>उत्तर एवं व्याख्या</strong></summary>
*उत्तर:* (B) लॉर्ड रीडिंग
*व्याख्या:* लॉर्ड रीडिंग (1921-1926) असहयोग आंदोलन के दौरान वायसराय थे।
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प्रश्न 13: असहयोग आंदोलन का कोई एक महत्वपूर्ण परिणाम क्या था?
(A) भारत को तुरंत स्वतंत्रता मिल गई
(B) खादी और राष्ट्रीय शिक्षा को बढ़ावा मिला
(C) अंग्रेज भारत से पूरी तरह चले गए
(D) मुसलमानों को अलग देश मिल गया
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<summary><strong>उत्तर एवं व्याख्या</strong></summary>
*उत्तर:* (B) खादी और राष्ट्रीय शिक्षा को बढ़ावा मिला
*व्याख्या:* आंदोलन असफल रहा पर इसने लोगों में राष्ट्रीयता जगाई और खादी तथा स्वदेशी को प्रोत्साहन मिला।
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प्रश्न 14: बिहार में असहयोग आंदोलन के दौरान ‘स्वदेशी‘ और ‘बहिष्कार‘ का नेतृत्व किसने किया?
(A) डॉ. राजेंद्र प्रसाद
(B) मौलाना मजहरुल हक
(C) हरि सिंह
(D) जगजीवन राम
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<summary><strong>उत्तर एवं व्याख्या</strong></summary>
*उत्तर:* (B) मौलाना मजहरुल हक
*व्याख्या:* मौलाना मजहरुल हक पटना में ‘बिहार नेशनल कॉलेज‘ की स्थापना की उन्होंने की थी। वे असहयोग आंदोलन में बिहार के प्रमुख मुस्लिम नेता थे।
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प्रश्न 15: निम्नलिखित में से कौन सा घटनाक्रम सही कालक्रम है?
(A) जलियांवाला बाग → रौलेट एक्ट → असहयोग आंदोलन → चौरी-चौरा
(B) रौलेट एक्ट → जलियांवाला बाग → असहयोग आंदोलन → चौरी-चौरा
(C) असहयोग आंदोलन → रौलेट एक्ट → जलियांवाला बाग → चौरी-चौरा
(D) चौरी-चौरा → रौलेट एक्ट → जलियांवाला बाग → असहयोग आंदोलन
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<summary><strong>उत्तर एवं व्याख्या</strong></summary>
*उत्तर:* (B) रौलेट एक्ट → जलियांवाला बाग → असहयोग आंदोलन → चौरी-चौरा
*व्याख्या:* रौलेट एक्ट (मार्च 1919) → जलियांवाला (13 अप्रैल 1919) → असहयोग आंदोलन शुरू (1920) → चौरी-चौरा (फरवरी 1922)।
</details>
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निष्कर्ष (Conclusion)
BPSC PT में असहयोग आंदोलन से प्रश्न पूछे जाने की संभावना अधिक होती है क्योंकि यह बिहार के इतिहास से भी जुड़ा है (चंपारण सत्याग्रह और बिहार के नेताओं की भूमिका)। परीक्षा में तिथियाँ, घटनाएँ, नेता और स्थान याद रखें।
सुझाव: चंपारण सत्याग्रह (1917) असहयोग से पहले था, इसे भी पढ़ें। बिहार में इस आंदोलन का प्रमुख केंद्र पटना, गया, मुंगेर, भागलपुर था।