उत्सर्जन तंत्र (Excretory System) – BPSC PT नोट्स
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1. परिचय एवं परिभाषा
· उत्सर्जन (Excretion): शरीर के चयापचय से उत्पन्न अपशिष्ट पदार्थों (जैसे– यूरिया, यूरिक अम्ल, क्रिएटिनिन, अतिरिक्त लवण, जल) को रक्त से निकालने की प्रक्रिया।
· उत्सर्जी पदार्थ (Excretory Products):
· यूरिया (Urea) – सबसे प्रमुख (प्रोटीन चयापचय से) – विषैला, जल में घुलनशील
· यूरिक अम्ल (Uric Acid) – प्यूरीन चयापचय से (पक्षी, सरीसृप – पेस्ट रूप में)
· क्रिएटिनिन (Creatinine) – मांसपेशियों के चयापचय से
· अमोनिया (Ammonia) – अत्यधिक विषैला (मछलियाँ सीधे जल में उत्सर्जित करती हैं)
· मुख्य उत्सर्जी अंग:
· वृक्क (Kidney) – मुख्य उत्सर्जी अंग (मूत्र बनाना)
· त्वचा (Skin) – पसीना (जल, लवण, यूरिया)
· फेफड़े (Lungs) – CO₂, जल वाष्प
· यकृत (Liver) – यूरिया बनाना (यूरिया चक्र), पित्त में अपशिष्ट
· आंत (Intestine) – मल में कुछ अपशिष्ट
2. वृक्क (Kidney) – संरचना एवं स्थान
विशेषता विवरण
संख्या 2 (दाएँ और बाएँ)
स्थान उदर गुहा के पीछे, कटि प्रदेश में (T12-L3 कशेरुकाओं के स्तर पर)
आकार लगभग 10-12 सेमी लंबा, 5-7 सेमी चौड़ा, 3 सेमी मोटा
भार प्रत्येक लगभग 120-170 ग्राम
बाहरी आवरण वृक्क कैप्सूल (रेशेदार सुरक्षा)
आंतरिक भाग बाह्य भाग (Cortex) – नेफ्रॉन का केन्द्रकीय भाग आंतरिक भाग (Medulla) – पिरामिडनुमा संरचनाएँ श्रोणिका (Pelvis) – मूत्र एकत्रित करता है
वृक्क को रक्त आपूर्ति:
· वृक्क धमनी (Renal Artery) – महाधमनी (Aorta) से निकलती है → गंदा रक्त लाती है
· वृक्क शिरा (Renal Vein) – नीचली महाशिरा (IVC) में जाती है → स्वच्छ रक्त ले जाती है
3. नेफ्रॉन (Nephron) – वृक्क की क्रियात्मक इकाई
· प्रत्येक वृक्क में लगभग 10-12 लाख नेफ्रॉन होते हैं।
· नेफ्रॉन के भाग एवं कार्य:
भाग (Part) स्थान कार्य
माल्पीघियन कणिका (Malpighian Corpuscle) कॉर्टेक्स में ग्लोमेरुलस (केशिकाओं का गुच्छा) + बोमैन कैप्सूल – निस्यंदन (Filtration)
समीपस्थ कुंडलित नलिका (PCT) कॉर्टेक्स पुनःअवशोषण – ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, Na⁺, K⁺, HCO₃⁻, जल (80%)
हेनले लूप (Loop of Henle) मेडुला जल एवं लवण पुनःअवशोषण – मूत्र का सांद्रण
दूरस्थ कुंडलित नलिका (DCT) कॉर्टेक्स चयनात्मक पुनःअवशोषण एवं स्राव – pH नियमन
एकत्रित नलिका (Collecting Duct) कॉर्टेक्स→मेडुला अंतिम जल पुनःअवशोषण (ADH के नियंत्रण में) → मूत्र का निर्माण
4. मूत्र निर्माण (Urine Formation) – तीन प्रक्रियाएँ
प्रक्रिया (Process) कहाँ होती है क्या होता है
ग्लोमेरुलर निस्यंदन (Glomerular Filtration) ग्लोमेरुलस + बोमैन कैप्सूल रक्त से जल, ग्लूकोज, यूरिया, लवण, छोटे अणु बोमैन कैप्सूल में आते हैं (प्रोटीन, RBC नहीं) – निस्यन्द (Filtrate) बनता है। निस्यंदन दर (GFR) ~125 मिली/मिनट
चयनात्मक पुनःअवशोषण (Selective Reabsorption) PCT, लूप, DCT आवश्यक पदार्थ (ग्लूकोज, जल, Na⁺, अमीनो अम्ल) रक्त में वापस अवशोषित होते हैं
स्राव (Secretion) DCT और एकत्रित नलिका अतिरिक्त H⁺, K⁺, दवाएँ, विषाक्त पदार्थ रक्त से नलिका में छोड़े जाते हैं
अंतिम मूत्र (Urine): 95% जल, 2.5% यूरिया, 2.5% अन्य (क्रिएटिनिन, यूरिक अम्ल, लवण)
5. वृक्क के कार्य (संक्षेप)
· अपशिष्ट पदार्थों (यूरिया, क्रिएटिनिन) का उत्सर्जन
· जल एवं इलेक्ट्रोलाइट संतुलन (Na⁺, K⁺, Ca⁺⁺)
· अम्ल-क्षार संतुलन (pH नियमन)
· रक्तचाप का नियमन (रेनिन-एंजियोटेंसिन प्रणाली)
· हार्मोन का उत्पादन – एरिथ्रोपोइटिन (EPO) (RBC निर्माण), रेनिन (रक्तचाप), कैल्सीट्रिऑल (विटामिन D सक्रिय रूप)
6. डायलिसिस (Dialysis)
· आवश्यकता: जब वृक्क कार्य करना बंद कर दें (किडनी फेल्योर – GFR <15 मिली/मिनट)।
· सिद्धांत: अपवाहन (Diffusion) और अल्ट्राफिल्ट्रेशन – रोगी के रक्त और डायलिसिस द्रव के बीच अर्ध-पारगम्य झिल्ली के माध्यम से अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकलते हैं।
· प्रकार:
· हेमोडायलिसिस (Hemodialysis) – रक्त को मशीन से साफ किया जाता है (सप्ताह में 2-3 बार)
· पेरिटोनियल डायलिसिस (Peritoneal Dialysis) – पेरिटोनियम झिल्ली का उपयोग
7. उत्सर्जन तंत्र से संबंधित रोग (BPSC PT हेतु)
रोग (Disease) कारण / विवरण लक्षण / परिणाम
वृक्काश्मरी (Renal Calculi / Kidney Stones) कैल्शियम ऑक्सालेट, यूरिक अम्ल के क्रिस्टल जमना तीव्र पीठ/पेट दर्द (शूल), मूत्र में रक्त
नेफ्राइटिस (Nephritis) वृक्क की सूजन (प्रायः स्ट्रेप्टोकोकस संक्रमण से) प्रोटीन एवं RBC का मूत्र में आना, सूजन
यूरीमिया (Uremia) रक्त में यूरिया का अत्यधिक बढ़ना (किडनी फेल्योर) मतली, थकान, कोमा – डायलिसिस की आवश्यकता
नेफ्रोटिक सिंड्रोम (Nephrotic Syndrome) ग्लोमेरुलस क्षति → प्रोटीन मूत्र में जाना शरीर में सूजन (Edema), कम प्रोटीन
डायबिटीज नेफ्रोपैथी (Diabetic Nephropathy) लंबे समय तक मधुमेह से ग्लोमेरुलस क्षति प्रोटीनूरिया → किडनी फेल्योर
हाइड्रोनेफ्रोसिस (Hydronephrosis) मूत्र मार्ग में अवरोध (पथरी, ट्यूमर) – वृक्क में सूजन वृक्क का बढ़ना, दर्द
8. महत्वपूर्ण तथ्य (BPSC PT के लिए)
तथ्य विवरण
मूत्र का pH सामान्यतः 6.0 (4.5 से 8.0 के बीच) – अम्लीय
मूत्र की मात्रा (24 घंटे) 1-2 लीटर (औसत 1.5 लीटर)
GFR (ग्लोमेरुलर निस्यंदन दर) 125 मिली/मिनट (180 लीटर/दिन) – 99% पुनःअवशोषित
ADH (एंटीडाइयूरेटिक हार्मोन) जल पुनःअवशोषण बढ़ाता है → मूत्र कम, सांद्र
एल्डोस्टेरोन (Aldosterone) Na⁺ पुनःअवशोषण बढ़ाता है, K⁺ स्राव
रेनिन (Renin) रक्तचाप कम होने पर स्रावित – रक्तचाप बढ़ाता है
मूत्र में नहीं होना चाहिए ग्लूकोज (मधुमेह), प्रोटीन (नेफ्राइटिस), RBC, WBC
सबसे अधिक पुनःअवशोषण समीपस्थ कुंडलित नलिका (PCT) में (~65-70% Na⁺ एवं जल)
मूत्र को सांद्र करने वाला भाग हेनले लूप (Loop of Henle) और एकत्रित नलिका
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📄 BPSC PT हेतु मॉडल प्रश्न पत्र – उत्सर्जन तंत्र
कुल प्रश्न – 15 | प्रत्येक प्रश्न – 2 अंक | प्रकार – बहुविकल्पीय (MCQ) | व्याख्या सहित उत्तर
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1. मानव शरीर का मुख्य उत्सर्जी अंग कौन-सा है?
(A) यकृत (Liver)
(B) त्वचा (Skin)
(C) वृक्क (Kidney)
(D) फेफड़े (Lungs)
✅ उत्तर: (C) – वृक्क मूत्र बनाकर यूरिया, क्रिएटिनिन आदि उत्सर्जित करता है।
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2. वृक्क की क्रियात्मक इकाई (Functional Unit) कहलाती है?
(A) न्यूरॉन
(B) नेफ्रॉन
(C) एल्वियोलस
(D) हेपैटोसाइट
✅ उत्तर: (B) – नेफ्रॉन (प्रत्येक वृक्क में ~10-12 लाख)
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3. ग्लोमेरुलर निस्यंदन (Glomerular Filtration) कहाँ होता है?
(A) PCT में
(B) DCT में
(C) बोमैन कैप्सूल + ग्लोमेरुलस में
(D) एकत्रित नलिका में
✅ उत्तर: (C) – माल्पीघियन कणिका में
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4. निम्नलिखित में से कौन-सा पदार्थ सामान्य मूत्र में नहीं पाया जाता है?
(A) यूरिया
(B) क्रिएटिनिन
(C) ग्लूकोज
(D) सोडियम क्लोराइड
✅ उत्तर: (C) – ग्लूकोज पूर्णतः पुनःअवशोषित हो जाता है; मूत्र में ग्लूकोज = मधुमेह का संकेत।
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5. वृक्काश्मरी (Kidney Stone) सबसे अधिक किसका बना होता है?
(A) कैल्शियम ऑक्सालेट
(B) यूरिक अम्ल
(C) सिस्टीन
(D) स्ट्रुवाइट
✅ उत्तर: (A) – लगभग 80% पथरी कैल्शियम ऑक्सालेट की होती है।
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6. रक्तचाप कम होने पर कौन-सा हार्मोन वृक्क से स्रावित होता है?
(A) ADH
(B) रेनिन (Renin)
(C) एरिथ्रोपोइटिन
(D) कैल्सीटोनिन
✅ उत्तर: (B) – रेनिन → एंजियोटेंसिन II → रक्तचाप बढ़ाता है।
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7. निम्नलिखित में से किस नेफ्रॉन भाग में अधिकतम पुनःअवशोषण होता है?
(A) हेनले लूप
(B) समीपस्थ कुंडलित नलिका (PCT)
(C) दूरस्थ कुंडलित नलिका (DCT)
(D) एकत्रित नलिका
✅ उत्तर: (B) – PCT ~65-70% Na⁺ एवं जल, और 100% ग्लूकोज, अमीनो अम्ल पुनःअवशोषित करता है।
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8. डायलिसिस (Dialysis) का मुख्य सिद्धांत क्या है?
(A) अवसादन
(B) आसवन
(C) अपवाहन एवं अल्ट्राफिल्ट्रेशन (Diffusion & Ultrafiltration)
(D) क्वथन
✅ उत्तर: (C) – अर्ध-पारगम्य झिल्ली के माध्यम से अपशिष्टों का बाहर निकलना।
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9. मूत्र को सांद्र (Concentrated) बनाने के लिए कौन-सा हार्मोन उत्तरदायी है?
(A) एल्डोस्टेरोन
(B) ADH (Vasopressin)
(C) रेनिन
(D) एरिथ्रोपोइटिन
✅ उत्तर: (B) – ADH एकत्रित नलिका में जल पुनःअवशोषण बढ़ाता है → मूत्र गाढ़ा, कम मात्रा।
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10. यूरीमिया (Uremia) क्या है?
(A) मूत्र में यूरिया का आना
(B) रक्त में यूरिया का अत्यधिक बढ़ना
(C) वृक्क में पथरी
(D) मूत्र मार्ग संक्रमण
✅ उत्तर: (B) – गंभीर किडनी फेल्योर में होता है; डायलिसिस आवश्यक।
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11. नेफ्रॉन का कौन-सा भाग हेनले लूप (Loop of Henle) के बाद आता है?
(A) PCT
(B) DCT
(C) बोमैन कैप्सूल
(D) एकत्रित नलिका
✅ उत्तर: (B) – क्रम: बोमैन → PCT → लूप → DCT → एकत्रित नलिका
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12. सामान्य वयस्क में 24 घंटे में कितना मूत्र बनता है?
(A) 500-700 मिली
(B) 1-2 लीटर
(C) 3-4 लीटर
(D) 5-6 लीटर
✅ उत्तर: (B) – औसत 1.5 लीटर (द्रव सेवन पर निर्भर)
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13. एरिथ्रोपोइटिन (EPO) हार्मोन किस अंग से स्रावित होता है और इसका क्या कार्य है?
(A) यकृत – पित्त बनाना
(B) वृक्क – RBC निर्माण को उत्तेजित करना
(C) अग्न्याशय – इंसुलिन स्राव
(D) पीयूषिका – वृद्धि हार्मोन
✅ उत्तर: (B) – वृक्क में O₂ कम होने पर EPO स्रावित → अस्थि मज्जा में RBC बनना।
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14. नेफ्राइटिस (Nephritis) रोग में क्या होता है?
(A) वृक्क में पथरी
(B) वृक्क की सूजन
(C) मूत्राशय का संक्रमण
(D) मूत्र नली में अवरोध
✅ उत्तर: (B) – प्रायः संक्रमण या ऑटोइम्यून कारणों से ग्लोमेरुलस की सूजन।
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15. निम्नलिखित में से कौन-सा मूत्र निर्माण की प्रक्रिया नहीं है?
(A) ग्लोमेरुलर निस्यंदन
(B) चयनात्मक पुनःअवशोषण
(C) स्राव
(D) ऑस्मोरगुलेशन
✅ उत्तर: (D) – ऑस्मोरगुलेशन (जल संतुलन) मूत्र निर्माण की प्रक्रियाओं का परिणाम है, कोई अलग प्रक्रिया नहीं। मूत्र निर्माण की तीन प्रक्रियाएँ हैं – निस्यंदन, पुनःअवशोषण, स्राव।
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🎯 BPSC PT परीक्षा हेतु विशेष टिप्स (उत्सर्जन तंत्र)
1. नेफ्रॉन का चित्र बनाने और उसके चार भागों (PCT, लूप, DCT, एकत्रित नलिका) को पहचानने का अभ्यास करें।
2. तीन प्रक्रियाओं (निस्यंदन, पुनःअवशोषण, स्राव) को क्रम से याद रखें।
3. हार्मोन (ADH, एल्डोस्टेरोन, रेनिन, EPO) – कहाँ बनते हैं और क्या करते हैं, यह अक्सर पूछा जाता है।
4. मूत्र की सामान्य संरचना (जल, यूरिया, क्रिएटिनिन, लवण) बनाम असामान्य (ग्लूकोज, प्रोटीन, RBC, WBC) याद करें।
5. डायलिसिस के सिद्धांत एवं आवश्यकता को समझें।
6. वृक्काश्मरी (किडनी स्टोन) – कैल्शियम ऑक्सालेट सबसे आम – BPSC में पूछा जा चुका है।