जलियांवाला बाग हत्याकांड विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र
यहाँ जलियांवाला बाग हत्याकांड का विस्तृत नोट दिया जा रहा है, जो BPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस घटना ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की दिशा पूरी तरह बदल दी थी।
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जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919) – पूर्ण नोट (BPSC PT हेतु)
1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (घटना के कारण)
(क) रॉलेट एक्ट (Rowlatt Act) – 1919
· पूरा नाम: “एनार्किकल एंड रिवोल्यूशनरी क्राइम्स एक्ट, 1919″ (Anarchical and Revolutionary Crimes Act)
· अध्यक्षता: सर सिडनी रॉलेट की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों पर पारित
· प्रावधान: यह “ब्लैक एक्ट” था जिसने ब्रिटिश सरकार को बिना मुकदमे 2 वर्ष तक किसी भी व्यक्ति को हिरासत में रखने की शक्ति दी
· विशेषता: No Vakil, No Appeal, No Daleel (न वकील, न अपील, न दलील)
· विरोध: गांधीजी ने इसके खिलाफ अखिल भारतीय “रॉलेट सत्याग्रह” का आह्वान किया (6 अप्रैल 1919 को हड़ताल)
BPSC टिप: परीक्षा में प्रश्न आता है – “जलियांवाला बाग हत्याकांड किस सत्याग्रह के संदर्भ में हुआ?” उत्तर होगा – रॉलेट सत्याग्रह
(ख) पंजाब में बढ़ता तनाव
· गिरफ्तारियाँ (10 अप्रैल 1919): दो लोकप्रिय नेता डॉ. सैफुद्दीन किचलू और डॉ. सत्यपाल को गिरफ्तार कर धर्मशाला निर्वासित कर दिया गया
· प्रदर्शन: अमृतसर में जबरदस्त आक्रोश फैल गया; ब्रिटिश बैंकों में आगजनी, कई यूरोपीय मारे गए
· मार्शल लॉ: पंजाब में प्रभावी रूप से मार्शल लॉ लागू कर दिया गया
2. हत्याकांड की घटना – 13 अप्रैल 1919 (बैसाखी का दिन)
(क) स्थान: जलियांवाला बाग
· यह लगभग 7 एकड़ में फैला एक अनियमित भूखंड था, जो चारों तरफ मकानों की दीवारों से घिरा था
· निकास की समस्या: बाग में केवल 5 संकरे रास्ते थे, जिनमें से अधिकांश स्थायी रूप से बंद थे
(ख) भीड़ का जमावड़ा
· तिथि: रविवार, 13 अप्रैल 1919 (बैसाखी का पर्व)
· संख्या: 15,000 से 20,000 लोग
· भीड़ की प्रकृति: इसमें बैसाखी मनाने आए तीर्थयात्री, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल थे – सभी निहत्थे थे
· उद्देश्य: रॉलेट एक्ट के विरोध और किचलू-सत्यपाल की रिहाई के लिए शांतिपूर्ण सभा
(ग) जनरल डायर का कृत्य
· समय: शाम लगभग 5:15 बजे
· सेना: 50 सैनिक (गोरखा, बलूच, राजपूत, सिख रेजिमेंट) .303 ली-एनफील्ड राइफलों से लैस
· दृष्टिकोण: डायर ने बिना किसी चेतावनी के, बैरिकेड पर एक ऊंचे स्थान से गोलीबारी शुरू कर दी
· अवधि: लगभग 10 मिनट तक लगातार गोलीबारी
· गोलियां: 1,650 राउंड दागे गए (करीब एक-तिहाई गोला-बारूद समाप्त)
डायर की निर्दयता: हंटर कमीशन में डायर ने कहा – “अगर मैं बख्तरबंद गाड़ी अंदर ले जा सकता, तो मशीन गन से फायर करता। मेरा इरादा पूरे पंजाब में आतंक फैलाने का था।”
3. हताहतों की संख्या (अलग-अलग अनुमान)
स्रोत मृतक घायल
ब्रिटिश हंटर कमीशन 379 लगभग 1,200
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (मालवीय-नेहरू जांच) 1,000+ से अधिक 1,500+ से अधिक
तथ्य: सबसे कम उम्र का शहीद 9 वर्षीय सोहन लाल था, सबसे अधिक उम्र 80 वर्षीय नाथू
· कुआं (Martyr’s Well): भागने के लिए सैकड़ों लोगों ने बाग के एक कोने में स्थित कुएं में छलांग लगा दी
4. हत्याकांड के बाद – निर्ममता जारी
(क) कर्फ्यू और कोई सहायता नहीं
· डायर ने तुरंत कर्फ्यू लगा दिया – घायलों को अस्पताल ले जाने वालों को गोली मारने का आदेश
· उस रात पूरा बाग घायलों के कराहने से भरा रहा; कोई दवा, पानी या एम्बुलेंस नहीं थी
(ख) “क्रॉलिंग ऑर्डर” (19 अप्रैल 1919)
· डायर ने आदेश दिया कि जिस गली में एक ब्रिटिश महिला पर हमला हुआ था, उस गली से गुजरने के लिए भारतीयों को हाथ-घुटनों के बल रेंगना होगा
· डायर का कथन: “मैं चाहता था कि वे जानें कि एक ब्रिटिश महिला हिंदू देवता के समान पवित्र है।”
5. ब्रिटिश सरकार की प्रतिक्रिया और जांच
(क) हंटर कमीशन (Disorders Inquiry Committee)
· गठन: ब्रिटिश सरकार द्वारा जांच के लिए गठित
· निष्कर्ष: डायर के कार्यों को “गंभीर त्रुटि” (grave error) बताया गया
· सजा: डायर को सेवा से हटा दिया गया लेकिन कोई औपचारिक सजा नहीं दी गई
(ख) ब्रिटिश संसद में बहस (8 जुलाई 1920)
· विंस्टन चर्चिल ने इसे “unutterably monstrous” (अकथनीय राक्षसी कृत्य) कहा
· वोट: 247 सांसदों ने डायर के खिलाफ, 37 ने समर्थन में वोट किया
(ग) हाउस ऑफ लॉर्ड्स का समर्थन (विवादास्पद)
· ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स ने डायर का समर्थन किया
· मॉर्निंग पोस्ट अखबार ने डायर के लिए £26,000 का कोष जुटाया – उसे “Saviour of the Punjab” कहा गया
6. हत्याकांड के परिणाम (भारतीय प्रतिक्रिया)
व्यक्ति/संस्था प्रतिक्रिया
रवींद्रनाथ टैगोर नाइटहुड (Knighthood) लौटाया – लिखा: “सम्मान के प्रतीक अब हमारी शर्म को और उजागर करते हैं”
महात्मा गांधी Kaiser-i-Hind की उपाधि लौटाई; ब्रिटिश सरकार में विश्वास खो दिया; कहा: “यह शैतानी सरकार नहीं सुधरी जा सकती, इसे समाप्त किया जाना चाहिए”
मोहम्मद अली जिन्ना सेंट्रल लेजिस्लेटिव काउंसिल से इस्तीफा दिया
भारतीय जनता अंग्रेजों के प्रति विश्वास पूरी तरह समाप्त; कोमल सुधारों की अपेक्षा समाप्त
7. स्वतंत्रता संग्राम पर प्रभाव
· असहयोग आंदोलन (1920-22): इस हत्याकांड ने नरमपंथियों का भरोसा भी तोड़ दिया और गांधीजी ने “सत्याग्रह” से “असहयोग” की ओर कदम बढ़ाया
· उधम सिंह का बदला: घटना के समय 20 वर्षीय उधम सिंह ने मिट्टी में भीगा खून लेकर बदला लेने की कसम खाई। 21 साल बाद (1940 में लंदन के कैक्सटन हॉल) में उसने पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ’डायर की हत्या कर दी
8. मुआवजा और ब्रिटिश माफी
(क) मुआवजा प्रणाली
· ब्रिटिश सरकार ने लगभग ₹22 लाख का मुआवजा दिया
· आय के आधार पर भेदभाव: अमीरों को अधिक, गरीबों को कम मुआवजा
· उदाहरण: लक्ष्मी चंद (दुकानदार, ₹11,500/वर्ष आय) को ₹60,000 मिले
· उदाहरण: 22 वर्षीय बुनकर मुहम्मद दीन (बायां हाथ निष्क्रिय) को ₹4,126 मिले
(ख) ब्रिटिश माफी – अब तक नहीं
· 2013 (डेविड कैमरून): “deeply shameful event” (गहरी शर्मनाक घटना)
· 2019 (थेरेसा मे): “deep regret” (गहरा खेद) व्यक्त किया
· औपचारिक माफी (Apology): अब तक नहीं
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9. BPSC प्रीलिम्स हेतु महत्वपूर्ण तथ्य (एक नजर में)
तथ्य विवरण
तिथि 13 अप्रैल 1919 (बैसाखी)
स्थान जलियांवाला बाग, अमृतसर, पंजाब
प्रत्यक्ष कारण रॉलेट एक्ट के विरुद्ध रॉलेट सत्याग्रह
जनरल डायर का आदेश 50 सैनिक, .303 राइफल, 1,650 राउंड, 10 मिनट, बिना चेतावनी
ब्रिटिश मृतक संख्या 379 (हंटर कमीशन)
भारतीय मृतक संख्या 1,000+ (INC जांच)
प्रमुख प्रतिक्रिया टैगोर ने नाइटहुड लौटाया; गांधी ने Kaiser-i-Hind लौटाया
प्रभाव असहयोग आंदोलन (1920) की नींव
उधम सिंह की कार्रवाई 1940 में लंदन में माइकल ओ’डायर की हत्या
ब्रिटिश माफी “Deep regret” (2019) – कोई औपचारिक माफी नहीं
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BPSC परीक्षा के लिए विशेष सुझाव:
1. रॉलेट एक्ट और रॉलेट सत्याग्रह में अंतर समझें। हत्याकांड रॉलेट सत्याग्रह के संदर्भ में हुआ था ।
2. हंटर कमीशन (जांच करने वाला) और हंटर कमेटी (1919 – दंगों की जांच) को भ्रमित न करें।
3. माइकल ओ’डायर (पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर) को उधम सिंह ने मारा था – डायर को नहीं।
4. टैगोर (नाइटहुड) और गांधी (Kaiser-i-Hind) – दोनों ने अपनी-अपनी उपाधियाँ लौटाईं।
5. 1919 का वर्ष – गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट (मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार) भी इसी वर्ष पारित हुआ था ।
इस हत्याकांड को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का “टर्निंग पॉइंट” (निर्णायक मोड़) माना जाता है, जिसने भारतीय जनता को पूरी तरह से अंग्रेजों से अलग कर दिया और स्वराज की मांग को चरम पर पहुंचा दिया ।