मधुबनी पेंटिंग और मंजूषा कला
September 20, 2026
मधुबनी पेंटिंग और मंजूषा कला बिहार की दो अत्यंत महत्वपूर्ण लोक चित्रकला परंपराएँ हैं। मधुबनी मिथिला क्षेत्र की है, जो स्त्रियों द्वारा दीवारों पर की जाती थी, जबकि मंजूषा भागलपुर (अंग प्रदेश) की है, जिसमें बिहुला-विषहरी की लोककथा को बक्सों और कागजों पर चित्रित किया जाता है।
🎨 मधुबनी पेंटिंग (मिथिला पेंटिंग)
उत्पत्ति और परंपरा
- क्षेत्र: बिहार का मिथिला क्षेत्र (दरभंगा, मधुबनी, मुजफ्फरपुर आदि) ।
- मान्यता: इसका प्रारंभ भगवान राम और सीता के विवाह के समय हुआ माना जाता है ।
- रूप: पारंपरिक रूप से स्त्रियों द्वारा घर की मिट्टी की दीवारों पर बनाई जाती थी। विवाह और उपनयन जैसे शुभ अवसरों पर विशेष रूप से बनाई जाती है ।
विषय-वस्तु और विशेषताएँ
- विषय: पौराणिक कथाएँ (राम, कृष्ण, दुर्गा), प्राकृतिक तत्व (सूर्य, चंद्रमा, तुलसी), और सामाजिक समारोह (शाही दरबार, विवाह) ।
- विशेष शैलियाँ: मिथिला पेंटिंग के पाँच रूप माने जाते हैं – भरवी, कचनी, तांत्रिक, गोदना (दलित समुदाय की शैली) और शोहवर ।
- कोहबर: विवाह के समय बनाई जाने वाली विशेष दीवार कला, जिसमें सूर्य, चंद्रमा और बाँस के चित्र होते हैं ।
आधुनिक पहचान और कलाकार
- प्रदर्शनी: 1942 में लंदन की आर्ट गैलरी में पहली बार मधुबनी पेंटिंग की प्रदर्शनी लगाई गई थी ।
- अंतरराष्ट्रीय पहचान: जापान के तोकामाची सिटी में मधुबनी पेंटिंग का एक संग्रहालय बना है। जापानी नागरिक हासेगावा ने इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई ।
- प्रसिद्ध कलाकार: जगदंबा देवी को 1975 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था, जो यह पुरस्कार पाने वाली पहली मिथिला कलाकार थीं । अन्य प्रमुख कलाकारों में सीता देवी, महासुंदरी देवी और गंगा देवी शामिल हैं ।
🎨 मंजूषा कला
उत्पत्ति और परंपरा
- क्षेत्र: बिहार का भागलपुर क्षेत्र, जिसे प्राचीन काल में अंग प्रदेश कहा जाता था ।
- नाम का अर्थ: ‘मंजूषा’ का अर्थ है छोटा पिटारा, संदूक या बक्सा, जिस पर यह चित्रकारी की जाती थी ।
- पौराणिक संबंध: यह विषहरी पूजा से जुड़ी है और इसमें बिहुला-विषहरी की लोककथा को चित्रित किया जाता है ।
विषय-वस्तु और विशेषताएँ
- लोककथा: बिहुला अपने पति लखिंदर को सांप काटने से हुई मृत्यु के बाद जीवित कराने के लिए देवताओं के पास जाती है। मंजूषा चित्रों में इसी यात्रा को दर्शाया जाता है ।
- रंग: पारंपरिक रूप से केवल तीन रंगों – हरा, गुलाबी और पीला – का प्रयोग होता है ।
- आकृतियाँ: मानव आकृतियाँ अंग्रेजी के वर्ण “X” जैसी दिखती हैं। पुरुष और स्त्री की पहचान शिखा, मूँछ और वक्ष के चिह्नों से की जाती है ।
- प्रतीक: पंचमुखी नाग मनसा (पाँच बहनों) का प्रतीक है। सूर्य और चाँद सांप्रदायिक सद्भाव के चिह्न माने जाते हैं ।
आधुनिक पहचान
- खोज: आधुनिक समय में मंजूषा कला की खोज 1941 में आई.सी.एस. पदाधिकारी डब्ल्यू.जी. आर्चर ने की थी ।
- विक्रमशिला संबंध: विक्रमशिला मठ की खुदाई के बाद इस कला को ब्रिटिश सरकार का संरक्षण मिला ।
- वर्तमान स्थिति: आज यह कला साड़ियों, स्कार्फ, वॉल हैंगिंग और यहाँ तक कि विक्रमशिला एक्सप्रेस ट्रेन की बोगियों पर भी देखी जा सकती है ।
📝 BPSC PT के लिए मॉडल प्रश्न
- मधुबनी पेंटिंग मुख्य रूप से किस क्षेत्र से संबंधित है?
- उत्तर: मिथिला क्षेत्र (उत्तरी बिहार)।
- मंजूषा कला का संबंध बिहार के किस क्षेत्र से है?
- उत्तर: भागलपुर (अंग प्रदेश)।
- मंजूषा चित्रकला में मुख्य रूप से किस लोककथा को दर्शाया जाता है?
- उत्तर: बिहुला-विषहरी की कथा।
- मधुबनी पेंटिंग को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में किस जापानी नागरिक का नाम उल्लेखनीय है?
- उत्तर: हासेगावा।
💡 BPSC PT के लिए रणनीति
- क्षेत्र और नाम: मधुबनी = मिथिला (उत्तर बिहार), मंजूषा = भागलपुर (पूर्वी बिहार)।
- पौराणिक संदर्भ: मधुबनी = राम-सीता विवाह, मंजूषा = बिहुला-विषहरी।
- विशिष्ट तथ्य: मंजूषा के तीन रंग (हरा, गुलाबी, पीला) और “X” आकार की आकृतियाँ याद रखें।
- पहचान: मधुबनी की पहली पद्मश्री कलाकार जगदंबा देवी थीं।