सर्वोच्च न्यायालय और न्यायिक समीक्षा — BPSC PT नोट्स
सर्वोच्च न्यायालय भारतीय संविधान का संरक्षक और न्यायपालिका का शीर्ष स्तर है। BPSC PT में इसके क्षेत्राधिकार, न्यायिक समीक्षा और न्यायिक सक्रियता से प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।
🏛️ सर्वोच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार
सर्वोच्च न्यायालय को तीन प्रकार के क्षेत्राधिकार प्राप्त हैं:
- मूल क्षेत्राधिकार (Original Jurisdiction): यह संघीय विवादों से संबंधित है। इसमें केंद्र और राज्यों के बीच, या दो या दो से अधिक राज्यों के बीच के विवाद शामिल हैं। यह क्षेत्राधिकार अनुच्छेद 131 के अंतर्गत आता है। इसके अलावा, अनुच्छेद 32 के तहत मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए भी यह मूल क्षेत्राधिकार का प्रयोग करता है।
- अपीलीय क्षेत्राधिकार (Appellate Jurisdiction): सर्वोच्च न्यायालय देश का सर्वोच्च अपीलीय न्यायालय है। यह उच्च न्यायालयों के निर्णयों के विरुद्ध दीवानी और फौजदारी दोनों मामलों में अपील सुन सकता है। अनुच्छेद 132, 133 और 134 इससे संबंधित हैं। यदि उच्च न्यायालय अपील की अनुमति नहीं देता, तब भी सर्वोच्च न्यायालय स्वविवेक से अपील स्वीकार कर सकता है।
- सलाहकारी क्षेत्राधिकार (Advisory Jurisdiction): अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति लोकहित या संविधान की व्याख्या से जुड़े किसी प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय की राय मांग सकते हैं। हालांकि, न्यायालय इस राय को देने के लिए बाध्य नहीं है और न ही राष्ट्रपति इस राय को मानने के लिए बाध्य हैं।
⚖️ न्यायिक समीक्षा (Judicial Review)
न्यायिक समीक्षा का अर्थ है कि सर्वोच्च न्यायालय केंद्र और राज्य सरकारों के विधायी और कार्यकारी आदेशों की संवैधानिकता की जाँच कर सकता है। यदि कोई कानून संविधान के विरुद्ध पाया जाता है, तो उसे असंवैधानिक और अवैध घोषित किया जा सकता है। यह शक्ति संविधान के अनुच्छेद 13, 32, 131, 136 और 143 से प्राप्त होती है।
न्यायिक समीक्षा का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत आधारभूत ढाँचा (Basic Structure) है, जिसे केशवानंद भारती मामले (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने स्थापित किया। इस सिद्धांत के अनुसार, संसद संविधान में संशोधन कर सकती है, लेकिन वह संविधान के मूल ढाँचे (जैसे लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, न्यायिक समीक्षा) को नष्ट नहीं कर सकती।
📝 BPSC PT के लिए मॉडल प्रश्न
प्रश्न 1: सर्वोच्च न्यायालय का सलाहकारी क्षेत्राधिकार किस अनुच्छेद में है?
(a) अनुच्छेद 131
(b) अनुच्छेद 143
(c) अनुच्छेद 32
(d) अनुच्छेद 136
उत्तर: (b) अनुच्छेद 143
प्रश्न 2: न्यायिक समीक्षा का सिद्धांत किस मामले में स्थापित हुआ?
(a) गोलकनाथ मामला
(b) केशवानंद भारती मामला
(c) मिनर्वा मिल्स मामला
(d) शंकरी प्रसाद मामला
उत्तर: (b) केशवानंद भारती मामला
💡 BPSC PT के लिए रणनीति
- क्षेत्राधिकार याद रखें: मूल (अनुच्छेद 131), अपीलीय (132-134), सलाहकारी (143)।
- न्यायिक समीक्षा: इसका उपयोग कानूनों की संवैधानिकता जाँचने में होता है। आधारभूत ढाँचा सिद्धांत इसकी सीमा तय करता है।
- तथ्यात्मक प्रश्न: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति, कार्यकाल और योग्यता से जुड़े तथ्य भी पूछे जाते हैं।