किसान आंदोलन और जनजातीय विद्रोह (संथाल, मुंडा, ताना भगत) — BPSC PT हेतु विस्तृत नोट्स
प्रिय अभ्यर्थी, BPSC प्रारंभिक परीक्षा में बिहार केंद्रित जनजातीय विद्रोह से प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। संथाल विद्रोह, मुंडा विद्रोह (उलगुलान) और ताना भगत आंदोलन तीनों बिहार-झारखंड क्षेत्र की महत्वपूर्ण घटनाएँ हैं। 66वीं BPSC PT में बिहार के किसान आंदोलन से प्रश्न पूछे गए थे । नीचे दिए गए नोट्स आपकी तैयारी को दिशा देंगे।
1. संथाल विद्रोह (हूल) — 1855-56 ई.
पृष्ठभूमि
- क्षेत्र: भागलपुर से राजमहल के बीच का क्षेत्र — दामन-ए-कोह (संथाल बहुल क्षेत्र)
- कारण: जमींदारों, महाजनों (साहूकारों) और अंग्रेजों के अत्याचार; चिरस्थाई बंदोबस्त द्वारा अत्यधिक राजस्व वसूली
- रेल परियोजना: भागलपुर से वर्द्धमान तक रेल लाइन में ठेकेदारों द्वारा संथालों से बेगार मजदूरी कराना और उचित मजदूरी न देना
नेतृत्व
- मुख्य नेता: सिद्धू और कान्हू मुर्मू (भगनाडीह गाँव)
- सहयोगी: चाँद, भैरव, फूलो और झानो (सिद्धू और कान्हू की बहनें)
- आध्यात्मिक प्रेरणा: ठाकुर (संथालों के दिव्य रक्षक) — सिद्धू ने स्वयं को ठाकुर का अवतार घोषित किया
विद्रोह की घटनाएँ
- 30 जून 1855: भगनाडीह गाँव में 10,000 संथालों की सभा; स्वतंत्रता की घोषणा — “अब हमारे ऊपर कोई सरकार नहीं है, संथाल राज्य स्थापित हो गया है”
- जुलाई 1855: विद्रोह प्रारंभ; 60,000 हथियारबंद संथाल एकत्रित
- दीसी: अत्याचारी दरोगा महेश लाल की हत्या से सशस्त्र विद्रोह का आरंभ
- सरकारी दफ्तरों, महाजनों के घरों और अंग्रेजों की बस्तियों पर आक्रमण
- रेल सेवा भंग: भागलपुर और राजमहल के बीच रेल सेवा बाधित
दमन एवं परिणाम
- कलकत्ता और पूर्णिया से सेना बुलाकर विद्रोह कुचला गया
- 5,000 से अधिक संथाल मारे गए
- परिणाम: संथाल परगना जिले का गठन (1855 के बाद) — संथालों के लिए पृथक प्रशासनिक इकाई
- 1876 का संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम — जनजातीय भूमि अधिकारों की रक्षा
- 1908 का छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम
- हूल दिवस: प्रतिवर्ष 30 जून को संथाल बलिदान को श्रद्धांजलि
BPSC के लिए महत्वपूर्ण: संथाल विद्रोह 1857 की क्रांति को प्रभावित करने वाला पहला बड़ा जनजातीय विद्रोह था ।
2. मुंडा विद्रोह (उलगुलान) — 1899-1900 ई.
पृष्ठभूमि
- क्षेत्र: छोटानागपुर (राँची, खूँटी, तमाड़, बसिया)
- कारण: खूँटकट्टी (सामुदायिक भूमि व्यवस्था) पर ब्रिटिश हस्तक्षेप; जमींदारों, ठेकेदारों और साहूकारों का शोषण
- बेगार प्रथा: बलात श्रम के विरुद्ध 1890 के दशक में कलकत्ता के वकीलों की मदद से मुकदमा लड़ा गया, परंतु विफल
बिरसा मुंडा
विद्रोह की घटनाएँ
- 24 दिसंबर 1899 (क्रिसमस की पूर्वसंध्या): तीरों से प्रहार और आगजनी की घटनाएँ प्रारंभ
- 25 दिसंबर 1899: ईसाई मिशनरियों पर आक्रमण
- खूँटी क्षेत्र: आंदोलन का मुख्य केंद्र
- मुरहू मिशन स्कूल: दो तीर चलाए गए
- 9 जनवरी 1900: डुम्बारी पर्वत पर अंग्रेजी सेना से सामना; उपायुक्त स्ट्रीटफील्ड ने आत्मसमर्पण की चेतावनी दी, किंतु विद्रोही अड़े रहे
- मुंडा सेना: 6,000 मुंडा (बरछे, भाले, तलवार, तीर-कमान, कुल्हाड़ियों से लैस)
- गिरफ्तारी: बिरसा को सिंहभूम से राँची लाया गया
दमन एवं परिणाम
- 8 जनवरी 1900: विद्रोह कुचला गया; 200 पुरुष एवं महिलाएँ मारे गए; 300 बंदी
- परिणाम: जनजातियों के लिए सुधारात्मक कार्य प्रारंभ
- ताना भगत आंदोलन (1914) का प्रेरणा स्रोत बना
3. ताना भगत आंदोलन — 1914 ई.
पृष्ठभूमि
- क्षेत्र: छोटानागपुर (गुमला, चिंगरी/नवाटोली)
- कारण: अंग्रेजों द्वारा बेगारी (बलात श्रम) — नेतरहाट में गवर्नर के आरामगाह निर्माण हेतु पहाड़ों पर मार्ग एवं बंगले बनवाना
- प्रेरणा: बिरसा मुंडा का उलगुलान
जतरा भगत
ताना भगत पंथ के सिद्धांत
जतरा भगत ने उराँव समाज को निम्नलिखित उपदेश दिए :
- हिंसा मत करो
- मांस-मछली छोड़ दो
- नशा मत करो
- धरती माता की उपासना करो
- पशुबलि का त्याग
- गौ सेवा
- तुलसी चौरा लगाना
आंदोलन का स्वरूप
- प्रारंभ में: धार्मिक एवं सांस्कृतिक सुधार आंदोलन
- बाद में: राजनीतिक स्वरूप — अंग्रेजों को मालगुजारी, चौकीदार टैक्स देना बंद
- मिशनरी विरोध: धर्म परिवर्तन का खुलकर विरोध
- असहयोग: जमींदारों को लगान देना बंद; उनके खेतों में काम करने से इनकार
- गांधीवादी प्रभाव: 1917 में टाना भगत गांधीजी के संपर्क में आए; खादी और तिरंगे के प्रति आकर्षण
जतरा भगत के बाद
- देवमनी (बंधनी): बटकुरी गाँव की जतरा भगत की पली ने आंदोलन की बागडोर संभाली
- 12 फरवरी 1921: कुटू में 8,000 टाना भगतों की विशाल सभा
- अंग्रेज अधिकारियों की चिंता: टाना भगत आंदोलन और गांधी के आंदोलन के मिल जाने से समस्या बढ़ने की रिपोर्ट
4. तीनों आंदोलनों की तुलना
| पहलू | संथाल विद्रोह (1855-56) | मुंडा विद्रोह (1899-1900) | ताना भगत आंदोलन (1914) |
|---|---|---|---|
| नेता | सिद्धू-कान्हू | बिरसा मुंडा | जतरा भगत |
| क्षेत्र | दामन-ए-कोह (भागलपुर-राजमहल) | छोटानागपुर (खूँटी) | छोटानागपुर (गुमला) |
| मुख्य कारण | जमींदार-महाजन शोषण, रेल परियोजना | खूँटकट्टी पर हस्तक्षेप, बेगार | बेगारी, मिशनरी विरोध |
| स्वरूप | सशस्त्र विद्रोह | सशस्त्र विद्रोह | धार्मिक-राजनीतिक |
| परिणाम | संथाल परगना का गठन | सुधारात्मक कार्य | राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ाव |
5. BPSC PT के लिए मॉडल प्रश्न
प्रश्न 1: संथाल विद्रोह का नेतृत्व किसने किया?
(a) बिरसा मुंडा
(b) सिद्धू और कान्हू
(c) जतरा भगत
(d) तिलका मांझी
उत्तर: (b) सिद्धू और कान्हू
व्याख्या: संथाल विद्रोह (1855-56) का नेतृत्व सिद्धू और कान्हू मुर्मू ने किया, जिनके साथ चाँद, भैरव, फूलो और झानो भी थे ।
प्रश्न 2: संथाल विद्रोह कब प्रारंभ हुआ?
(a) 30 जून 1855
(b) 24 दिसंबर 1899
(c) अप्रैल 1914
(d) 1857
उत्तर: (a) 30 जून 1855
व्याख्या: 30 जून 1855 को भगनाडीह गाँव में 10,000 संथालों की सभा हुई और विद्रोह प्रारंभ हुआ ।
प्रश्न 3: मुंडा विद्रोह को किस नाम से जाना जाता है?
(a) हूल
(b) उलगुलान
(c) ताना
(d) सत्याग्रह
उत्तर: (b) उलगुलान
व्याख्या: मुंडा विद्रोह को उलगुलान (महान हलचल) कहा जाता है, जिसका नेतृत्व बिरसा मुंडा ने किया ।
प्रश्न 4: बिरसा मुंडा को किस उपाधि से जाना जाता है?
(a) धरती आबा
(b) भगवान बिरसा
(c) ठाकुर
(d) देवदूत
उत्तर: (a) धरती आबा
व्याख्या: बिरसा मुंडा को धरती आबा (पृथ्वी के पिता) कहा जाता है ।
प्रश्न 5: बिरसा मुंडा की मृत्यु कब और कहाँ हुई?
(a) 9 जून 1900, राँची जेल
(b) 8 जनवरी 1900, खूँटी
(c) 3 मार्च 1900, सिंहभूम
(d) 24 दिसंबर 1899, डुम्बारी
उत्तर: (a) 9 जून 1900, राँची जेल
व्याख्या: बिरसा मुंडा को 3 मार्च 1900 को गिरफ्तार किया गया और 9 जून 1900 को राँची जेल में हैजा से मृत्यु हो गई ।
प्रश्न 6: ताना भगत आंदोलन के संस्थापक कौन थे?
(a) बिरसा मुंडा
(b) सिद्धू
(c) जतरा भगत
(d) देवमनी
उत्तर: (c) जतरा भगत
व्याख्या: ताना भगत आंदोलन की शुरुआत अप्रैल 1914 में जतरा भगत ने की ।
प्रश्न 7: ताना भगत आंदोलन का मुख्य स्वरूप क्या था?
(a) केवल धार्मिक
(b) केवल राजनीतिक
(c) धार्मिक से राजनीतिक
(d) केवल सांस्कृतिक
उत्तर: (c) धार्मिक से राजनीतिक
व्याख्या: ताना भगत आंदोलन मूलतः धार्मिक एवं सांस्कृतिक सुधार आंदोलन था, जो बाद में अंग्रेजों के विरुद्ध राजनीतिक स्वरूप धारण कर गया ।
प्रश्न 8: जतरा भगत के बाद ताना भगत आंदोलन का नेतृत्व किसने किया?
(a) फूलो
(b) झानो
(c) देवमनी (बंधनी)
(d) चाँद
उत्तर: (c) देवमनी (बंधनी)
व्याख्या: जतरा भगत की मृत्यु के बाद बटकुरी गाँव की देवमनी (बंधनी) ने आंदोलन की बागडोर संभाली ।
प्रश्न 9: संथाल विद्रोह के परिणामस्वरूप किस जिले का गठन हुआ?
(a) राँची
(b) संथाल परगना
(c) गुमला
(d) खूँटी
उत्तर: (b) संथाल परगना
व्याख्या: संथाल विद्रोह के बाद संथालों के लिए पृथक प्रशासनिक इकाई संथाल परगना जिला बनाया गया ।
प्रश्न 10: BPSC 66वीं PT में बिहार के किसान आंदोलन से संबंधित किससे प्रश्न पूछे गए थे?
(a) बिरसा मुंडा
(b) सहजानंद सरस्वती
(c) जतरा भगत
(d) सिद्धू-कान्हू
उत्तर: (b) सहजानंद सरस्वती
व्याख्या: 66वीं BPSC PT में बिहार में किसान आंदोलन और सहजानंद सरस्वती से जुड़े प्रश्न पूछे गए थे । 70वीं BPSC PT में सहजानंद सरस्वती द्वारा प्रकाशित समाचार पत्र “लोक संग्रह” से प्रश्न पूछा गया ।
6. BPSC PT के लिए रणनीति
- संथाल विद्रोह: 30 जून 1855, सिद्धू-कान्हू, हूल दिवस, संथाल परगना का गठन
- मुंडा विद्रोह: उलगुलान, बिरसा मुंडा (धरती आबा), 24 दिसंबर 1899, डुम्बारी पर्वत, 9 जून 1900
- ताना भगत: जतरा भगत, अप्रैल 1914, देवमनी, गांधीवादी प्रभाव
- बिहार संबंध: सहजानंद सरस्वती (बिहार किसान सभा), “लोक संग्रह” समाचार पत्र
- तुलना: तीनों आंदोलनों के नेता, क्षेत्र, कारण और परिणाम
- पिछले प्रश्न पत्र: BPSC 66वीं (2020) और 70वीं (2024) के प्रश्नों का अभ्यास करें
इन नोट्स के आधार पर तैयारी करें और नियमित रूप से मॉडल प्रश्नों का अभ्यास करें। शुभकामनाएँ!