बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म — BPSC PT हेतु विस्तृत नोट्स
प्रिय अभ्यर्थी, BPSC प्रारंभिक परीक्षा में बौद्ध एवं जैन धर्म से प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। दोनों धर्म बिहार से गहराई से जुड़े हैं — महावीर स्वामी का जन्म वैशाली के निकट कुंडग्राम में हुआ और बुद्ध ने अपने अधिकांश उपदेश बिहार में दिए। नीचे दिए गए नोट्स आपकी तैयारी को दिशा देंगे।
बौद्ध धर्म
बुद्ध का जीवन
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| जन्म | 563 ई.पू., लुम्बिनी (वर्तमान नेपाल) |
| नाम | सिद्धार्थ |
| पिता | शुद्धोधन (शाक्य गणराज्य के राजा) |
| माता | मायादेवी |
| पालक माता | महाप्रजापति गौतमी |
| पत्नी | यशोधरा |
| पुत्र | राहुल |
| महाभिनिष्क्रमण | 29 वर्ष की आयु में गृह त्याग |
| ज्ञान प्राप्ति | 35 वर्ष की आयु में बोधगया (बिहार), निरंजना नदी के तट पर पीपल वृक्ष के नीचे |
| प्रथम उपदेश | सारनाथ (वाराणसी) — धर्मचक्रप्रवर्तन |
| महापरिनिर्वाण | 483 ई.पू., कुशीनगर |
महत्वपूर्ण तथ्य:
- बुद्ध को बोधगया में ज्ञान प्राप्त हुआ, जो बिहार में स्थित है
- सारनाथ में प्रथम उपदेश दिया — इसे “धर्मचक्रप्रवर्तन” कहा जाता है
- बुद्ध ने पाली भाषा में उपदेश दिए
- बुद्ध के अष्टांगिक मार्ग में सम्यक दृष्टि, सम्यक संकल्प, सम्यक वाणी, सम्यक कर्म, सम्यक आजीविका, सम्यक प्रयास, सम्यक स्मृति और सम्यक समाधि शामिल हैं
बौद्ध संगीतियाँ (Councils)
| संगीति | स्थान | समय | अध्यक्ष | शासक |
|---|---|---|---|---|
| प्रथम | राजगृह (बिहार) | 483 ई.पू. | महाकश्यप | अजातशत्रु |
| द्वितीय | वैशाली (बिहार) | 383 ई.पू. | सबकामी | कालाशोक |
| तृतीय | पाटलिपुत्र (बिहार) | 250 ई.पू. | मोग्गलिपुत्त तिस्स | अशोक |
| चतुर्थ | कुंडलवन (कश्मीर) | 100 ई. | वसुमित्र | कनिष्क |
बौद्ध संगीतियों का महत्व:
- प्रथम संगीति: बुद्ध की मृत्यु के बाद राजगृह में; विनय पिटक एवं सुत्त पिटक का संकलन
- द्वितीय संगीति: वैशाली में; महासंघिक एवं स्थविरवादी संप्रदायों में विभाजन
- तृतीय संगीति: पाटलिपुत्र में अशोक के काल में; अभिधम्म पिटक का संकलन
- चतुर्थ संगीति: कनिष्क के काल में; महायान एवं हीनयान में विभाजन
तीनों पिटक (त्रिपिटक):
- विनय पिटक: भिक्षुओं के अनुशासन के नियम
- सुत्त पिटक: बुद्ध के उपदेशों का संग्रह
- अभिधम्म पिटक: बुद्ध की शिक्षाओं का दर्शन
बौद्ध धर्म की शिक्षाएँ
चार आर्य सत्य:
- दुःख: संसार में दुःख है
- दुःख समुदय: दुःख का कारण तृष्णा है
- दुःख निरोध: तृष्णा के नाश से दुःख का नाश
- दुःख निरोध गामिनी प्रतिपदा: अष्टांगिक मार्ग
अष्टांगिक मार्ग:
सम्यक दृष्टि, सम्यक संकल्प, सम्यक वाणी, सम्यक कर्म, सम्यक आजीविका, सम्यक प्रयास, सम्यक स्मृति, सम्यक समाधि
अनित्य (Anicca): संसार अनित्य एवं परिवर्तनशील है
अनात्म (Anatta): कोई स्थायी आत्मा नहीं है
दुःख (Dukkha): दुःख मानव जीवन का अंतर्निहित तत्व है
बौद्ध धर्म के संप्रदाय:
- हीनयान: बुद्ध के मूल उपदेशों में विश्वास; अर्हत पद की प्राप्ति का आदर्श; मूर्तिपूजा में विश्वास नहीं
- महायान: बुद्ध को देवता के रूप में पूजा; बोधिसत्व का आदर्श; मूर्तिपूजा में विश्वास
जैन धर्म
महावीर स्वामी
महत्वपूर्ण तथ्य:
- महावीर जैन धर्म के 24वें एवं अंतिम तीर्थंकर थे
- महावीर जैन धर्म के स्थापक नहीं, बल्कि धर्मसुधारक थे
- महावीर के तीन नाम मिलते हैं: वर्धमान, श्रमण, महावीर
जैन तीर्थंकर
जैन धर्म में 24 तीर्थंकर हुए हैं :
| क्र.सं. | तीर्थंकर | विशेषता |
|---|---|---|
| 1 | ऋषभदेव (आदिनाथ) | प्रथम तीर्थंकर |
| 23 | पार्श्वनाथ | 23वें तीर्थंकर; जन्म वैशाली में |
| 24 | महावीर स्वामी | अंतिम तीर्थंकर |
पार्श्वनाथ:
- 23वें तीर्थंकर, महावीर से 250 वर्ष पूर्व
- जन्म स्थान: वैशाली
- पिता: अश्वसेन (काशीनरेश)
- माता: लामा
- चार व्रत की शिक्षा: अहिंसा, सत्य, अचौर्य, अपरिग्रह
जैन संगीतियाँ (Councils)
| संगीति | स्थान | समय | अध्यक्ष |
|---|---|---|---|
| प्रथम | पाटलिपुत्र (बिहार) | 300 ई.पू. | स्थूलभद्र |
| द्वितीय | वल्लभी (गुजरात) | 512 ई. | देवर्धिगणि क्षमाश्रमण |
| तृतीय | वल्लभी | 5वीं शताब्दी ई. | देवर्धिगणि क्षमाश्रमण |
जैन ग्रंथ:
- 12 अंग: जैन धर्म के मुख्य ग्रंथ
- तत्वार्थसूत्र: जैन धर्म को जानने हेतु सर्वोत्तम ग्रंथ
- कल्पसूत्र: भद्रबाहु द्वारा रचित
- आचारांग सूत्र: जैन धर्म का प्राचीनतम ग्रंथ
जैन धर्म के सिद्धांत
सात तत्व:
जीव, अजीव, आस्रव, बंध, संवर, निर्जरा, मोक्ष
त्रिरत्न:
- सम्यक दर्शन: सच्ची श्रद्धा
- सम्यक ज्ञान: सच्चा ज्ञान
- सम्यक चारित्र: सच्चा आचरण
अहिंसा:
- जैन धर्म का मूल सिद्धांत अहिंसा है
- “अहिंसा परमो धर्म” का उपदेश जैन धर्म ने दिया
- शाकाहार अहिंसा सिद्धांत से गहराई से जुड़ा है
अनेकांतवाद:
स्यादवाद:
जीव और अजीव:
- जीव: चेतन तत्व, असंख्य आत्माएँ
- अजीव: जड़ तत्व — काल, आकाश, धर्म, अधर्म, पुद्गल
- जैन धर्म अनेकवादी है — आत्माएँ अनेक और स्वतंत्र हैं
जैन धर्म की विशेषताएँ
दार्शनिक विशेषताएँ:
- जैन धर्म वैज्ञानिक धर्म है, अंध श्रद्धा को स्थान नहीं
- आत्मनिर्भरता की शिक्षा — देवी-देवताओं पर निर्भरता नहीं
- श्रुति विरोध: वैदिक कर्मकांड का विरोध
- अनीश्वरवाद: सृष्टिकर्ता ईश्वर में विश्वास नहीं
सामाजिक विशेषताएँ:
BPSC PT के लिए मॉडल प्रश्न
प्रश्न 1: बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति कहाँ हुई?
(a) सारनाथ
(b) बोधगया
(c) कुशीनगर
(d) वैशाली
उत्तर: (b) बोधगया
व्याख्या: बुद्ध को बोधगया (बिहार) में निरंजना नदी के तट पर पीपल वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ।
प्रश्न 2: प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन कहाँ हुआ?
(a) वैशाली
(b) पाटलिपुत्र
(c) राजगृह
(d) कुंडलवन
उत्तर: (c) राजगृह
व्याख्या: प्रथम बौद्ध संगीति 483 ई.पू. में राजगृह (बिहार) में अजातशत्रु के काल में हुई।
प्रश्न 3: त्रिपिटक किस धर्म के ग्रंथ हैं?
(a) जैन
(b) बौद्ध
(c) हिंदू
(d) सिख
उत्तर: (b) बौद्ध
व्याख्या: त्रिपिटक बौद्ध धर्म के पवित्र ग्रंथ हैं — विनय पिटक, सुत्त पिटक, अभिधम्म पिटक ।
प्रश्न 4: महावीर स्वामी का जन्म कहाँ हुआ?
(a) वैशाली
(b) कुंडग्राम (वैशाली के निकट)
(c) राजगृह
(d) पावापुरी
उत्तर: (b) कुंडग्राम (वैशाली के निकट)
व्याख्या: महावीर का जन्म 599 ई.पू. में वर्तमान बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के वैशाली के निकट कुंडग्राम में हुआ ।
प्रश्न 5: जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर कौन थे?
(a) ऋषभदेव
(b) पार्श्वनाथ
(c) महावीर
(d) अजितनाथ
उत्तर: (b) पार्श्वनाथ
व्याख्या: पार्श्वनाथ जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर थे, जिनका जन्म वैशाली में हुआ ।
प्रश्न 6: जैन धर्म का मूल सिद्धांत क्या है?
(a) सत्य
(b) अहिंसा
(c) तपस्या
(d) यज्ञ
उत्तर: (b) अहिंसा
व्याख्या: जैन धर्म का मूल सिद्धांत अहिंसा है — “अहिंसा परमो धर्म” ।
प्रश्न 7: बौद्ध धर्म के अनुसार ‘अनित्य’ का क्या अर्थ है?
(a) आत्मा का अभाव
(b) संसार की अनित्यता
(c) दुःख
(d) निर्वाण
उत्तर: (b) संसार की अनित्यता
व्याख्या: ‘अनित्य’ (Anicca) का अर्थ है संसार अनित्य एवं परिवर्तनशील है ।
प्रश्न 8: जैन धर्म के अनुसार ‘स्यादवाद’ क्या है?
(a) अहिंसा का सिद्धांत
(b) सापेक्षता का सिद्धांत
(c) कर्म का सिद्धांत
(d) आत्मा का सिद्धांत
उत्तर: (b) सापेक्षता का सिद्धांत
व्याख्या: स्यादवाद सापेक्षता का सिद्धांत है, जो अनेकांतवाद पर आधारित है ।
प्रश्न 9: जैन धर्म के अनुसार ‘जीव’ और ‘अजीव’ में क्या अंतर है?
(a) जीव चेतन, अजीव जड़
(b) जीव जड़, अजीव चेतन
(c) दोनों चेतन
(d) दोनों जड़
उत्तर: (a) जीव चेतन, अजीव जड़
व्याख्या: जैन धर्म में जीव चेतन तत्व है और अजीव जड़ तत्व — काल, आकाश, धर्म, अधर्म, पुद्गल ।
प्रश्न 10: जैन धर्म की तृतीय संगीति कहाँ हुई?
(a) पाटलिपुत्र
(b) वल्लभी
(c) वैशाली
(d) राजगृह
उत्तर: (b) वल्लभी
व्याख्या: जैन धर्म की तृतीय संगीति 5वीं शताब्दी ई. में वल्लभी में हुई, जिसके अध्यक्ष देवर्धिगणि क्षमाश्रमण थे ।
BPSC PT के लिए रणनीति
- बुद्ध का जीवन: जन्म (लुम्बिनी), ज्ञान (बोधगया), प्रथम उपदेश (सारनाथ), महापरिनिर्वाण (कुशीनगर)
- बौद्ध संगीतियाँ: चारों संगीतियों के स्थान, समय एवं अध्यक्ष याद रखें
- त्रिपिटक: तीनों पिटकों के नाम एवं विषय
- महावीर: जन्म (कुंडग्राम, वैशाली), 24वें तीर्थंकर, त्रिरत्न
- जैन संगीतियाँ: तीनों संगीतियों के स्थान एवं अध्यक्ष
- जैन सिद्धांत: अहिंसा, अनेकांतवाद, स्यादवाद, सात तत्व
- बिहार संबंध: राजगृह, वैशाली, पाटलिपुत्र, बोधगया, पावापुरी — सभी बिहार में
- पिछले प्रश्न पत्र: BPSC 63वीं (त्रिपिटक), 65वीं (जैन साक्षरता) के प्रश्नों का अभ्यास करें
इन नोट्स के आधार पर तैयारी करें और नियमित रूप से मॉडल प्रश्नों का अभ्यास करें। शुभकामनाएँ!