BPSC प्रारंभिक परीक्षा: हर्षवर्धन, पाल वंश एवं दिल्ली सल्तनत – विस्तृत नोट्स एवं मॉडल प्रश्न

प्रिय अभ्यर्थी, BPSC प्रारंभिक परीक्षा में प्राचीन एवं मध्यकालीन भारत से प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। हर्षवर्धन, पाल वंश तथा दिल्ली सल्तनत से संबंधित प्रश्न विशेष रूप से बिहार के संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि पाल वंश बिहार से ही उठा और दिल्ली सल्तनत का बिहार पर गहरा प्रभाव पड़ा। नीचे दिए गए नोट्स आपकी तैयारी को दिशा देंगे।


हर्षवर्धन (606-647 ईस्वी)

स्थापना एवं विस्तार

  • राजवंश: वर्धन वंश (थानेसर/हरियाणा)
  • पिता: प्रभाकर वर्धन
  • भाई: राज्यवर्धन (जिसकी हत्या के बाद हर्ष सिंहासन पर बैठा)
  • राजधानी: कन्नौज (हर्ष ने थानेसर से कन्नौज स्थानांतरित की)
  • शासनकाल: 606-647 ईस्वी (लगभग 41 वर्ष)

साम्राज्य विस्तार:

  • पूर्व में कामरूप (असम) तक
  • पश्चिम में गुजरात एवं पंजाब तक
  • दक्षिण में नर्मदा नदी तक (दक्षिण विजय में असफल रहा)
  • पुलकेशिन द्वितीय (चालुक्य शासक) ने हर्ष को नर्मदा के तट पर पराजित किया

हर्ष का प्रशासन

  • केंद्रीकृत राजतंत्र: राजा सर्वोच्च सत्ता, मंत्रिपरिषद द्वारा सहयोग
  • प्रांत एवं जिले: प्रशासनिक विभाजन; ग्राम प्रशासन को महत्व
  • भूमि राजस्व: राज्य की आय का मुख्य स्रोत
  • सैन्य व्यवस्था: विशाल सेना (ह्वेनसांग के अनुसार 50,000 पैदल, 20,000 अश्वारोही, 5,000 हाथी)
  • धार्मिक सहिष्णुता: हर्ष स्वयं बौद्ध था, परंतु अन्य धर्मों का सम्मान करता था

हर्ष कालीन धर्म एवं संस्कृति

  • ह्वेनसांग (युआन च्वांग): चीनी यात्री, 630-644 ईस्वी तक भारत में; हर्ष के दरबार में आया
  • कन्नौज की सभा (643 ईस्वी): हर्ष ने बौद्ध धर्म के प्रचार हेतु आयोजित की; ह्वेनसांग को सम्मानित किया
  • प्रयाग की सभा: प्रत्येक पाँच वर्ष में आयोजित; दान एवं धार्मिक कार्य
  • नालंदा महाविहार: हर्ष ने नालंदा को दान दिया; यह बिहार में स्थित प्रमुख बौद्ध शिक्षा केंद्र था
  • बाणभट्ट: हर्ष का दरबारी कवि; ‘हर्षचरित’ एवं ‘कादम्बरी’ की रचना

हर्ष का महत्व

  • उत्तर भारत में अंतिम महान हिंदू सम्राट
  • हर्ष के बाद उत्तर भारत में राजनीतिक एकता टूट गई
  • बिहार (नालंदा, कन्नौज से संबंध) में बौद्ध धर्म के प्रचार में योगदान

पाल वंश (750-1174 ईस्वी)

स्थापना एवं पृष्ठभूमि

  • स्थापक: गोपाल (750 ईस्वी)
  • क्षेत्र: बंगाल एवं बिहार (मगध, वंग, गौड़)
  • राजधानी: गौड़ (बंगाल), विक्रमशिला (बिहार)
  • शासनकाल: लगभग 400 वर्ष

स्थापना की पृष्ठभूमि:
बंगाल एवं बिहार में मत्स्यन्याय (मछली का नियम – शक्तिशाली की सत्ता) की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। जनता ने गोपाल को राजा चुना, जिससे पाल वंश की स्थापना हुई।

प्रमुख शासक

शासकशासनकालविशेषताएँ
गोपाल750-770 ई.संस्थापक; बौद्ध धर्म का संरक्षण
धर्मपाल770-810 ई.विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना; कन्नौज के लिए संघर्ष
देवपाल810-850 ई.साम्राज्य का विस्तार; बौद्ध धर्म का प्रचार
महिपाल988-1038 ई.ओदंतपुरी महाविहार की स्थापना; बौद्ध धर्म का पुनरुत्थान
रामपाल1077-1120 ई.अंतिम शक्तिशाली पाल शासक

पाल वंश की विशेषताएँ

धार्मिक योगदान:

  • बौद्ध धर्म (महायान) का संरक्षण
  • विक्रमशिला विश्वविद्यालय (बिहार) की स्थापना – धर्मपाल द्वारा
  • ओदंतपुरी महाविहार (बिहार) – महिपाल द्वारा
  • नालंदा महाविहार का संरक्षण
  • तंत्र मत का विकास

सांस्कृतिक योगदान:

  • अतिश दीपंकर: प्रसिद्ध बौद्ध विद्वान; तिब्बत में बौद्ध धर्म का प्रचार
  • संस्कृत साहित्य: कवियों एवं विद्वानों का संरक्षण
  • मूर्तिकला: पाल कला की विशिष्ट शैली (पत्थर एवं धातु मूर्तियाँ)
  • चित्रकला: बौद्ध पांडुलिपियों पर चित्रण

बिहार से संबंध:

  • पाल वंश का मूल क्षेत्र बिहार एवं बंगाल था
  • विक्रमशिला एवं ओदंतपुरी (दोनों बिहार में) प्रमुख शिक्षा केंद्र
  • नालंदा का पुनरुद्धार

पाल वंश का पतन

  • सेन वंश का उदय (बंगाल में)
  • महमूद गजनवी के आक्रमण (11वीं सदी)
  • आंतरिक कलह एवं सामंतों का विद्रोह
  • 1174 ई. में सेन वंश ने पाल वंश को समाप्त किया

दिल्ली सल्तनत (1206-1526 ईस्वी)

आक्रमण एवं स्थापना

मुहम्मद गजनवी के आक्रमण (1000-1027 ई.):

  • 17 बार आक्रमण किए
  • सोमनाथ मंदिर (1025 ई.) का विनाश
  • पंजाब एवं गुजरात पर आक्रमण
  • बिहार पर प्रभाव: नालंदा एवं विक्रमशिला को क्षति

मुहम्मद गोरी के आक्रमण (1175-1206 ई.):

  • तराइन का प्रथम युद्ध (1191 ई.): पृथ्वीराज चौहान ने गोरी को पराजित किया
  • तराइन का द्वितीय युद्ध (1192 ई.): गोरी ने पृथ्वीराज को पराजित किया
  • बिहार पर आक्रमण: बख्तियार खिलजी ने 1200 ई. में बिहार पर आक्रमण किया; नालंदा एवं विक्रमशिला को नष्ट किया
  • 1206 ई.: गोरी की मृत्यु; कुतुबुद्दीन ऐबक ने दिल्ली सल्तनत की स्थापना की

दिल्ली सल्तनत के पाँच राजवंश

राजवंशशासनकालसंस्थापक
गुलाम वंश1206-1290कुतुबुद्दीन ऐबक
खिलजी वंश1290-1320जलालुद्दीन खिलजी
तुगलक वंश1320-1414गियासुद्दीन तुगलक
सैयद वंश1414-1451खिज्र खाँ
लोदी वंश1451-1526बहलोल लोदी

प्रमुख शासक एवं प्रशासन

कुतुबुद्दीन ऐबक (1206-1210):

  • दिल्ली सल्तनत का संस्थापक
  • कुतुब मीनार का निर्माण प्रारंभ
  • कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद का निर्माण

इल्तुतमिश (1211-1236):

  • चालीसा गुलाम (तुर्कान-ए-चिहलगनी) का गठन
  • इक्ता प्रणाली का संगठन
  • चांदी का टंका एवं तांबे का जीतल सिक्कों का प्रचलन

बलबन (1266-1286):

  • सिजदा एवं पैबोस प्रथा का कठोर पालन
  • फारसी नौरोज का आयोजन
  • सामंतों पर कठोर नियंत्रण

अलाउद्दीन खिलजी (1296-1316):

  • बाजार नियंत्रण नीति: कीमतों का नियंत्रण
  • भूमि राजस्व: 50% तक वृद्धि
  • सैन्य सुधार: घोड़ों की ब्रांडिंग (दाग) एवं हुलिया प्रणाली
  • मंगोल आक्रमणों का सफल प्रतिरोध

मुहम्मद बिन तुगलक (1325-1351):

  • राजधानी स्थानांतरण: दिल्ली से दौलताबाद (देवगिरि)
  • टोकन करेंसी का प्रयोग (असफल)
  • कृषि सुधार: दीवान-ए-कोही की स्थापना
  • खुरासान एवं चीन पर आक्रमण की योजना (असफल)

फिरोज शाह तुगलक (1351-1388):

  • नहरें: हिसार, सिरसा, समाना में
  • फिरोजाबाद शहर की स्थापना
  • दीवान-ए-खैरात: गरीबों की सहायता विभाग

सिकंदर लोदी (1489-1517):

  • आगरा शहर की स्थापना
  • गुलामों के व्यापार पर प्रतिबंध
  • भूमि मापन की व्यवस्था

दिल्ली सल्तनत का प्रशासन

केंद्रीय प्रशासन:

  • सुल्तान: सर्वोच्च सत्ता (राजनीतिक, सैन्य, न्यायिक)
  • वजीर: प्रधानमंत्री (वित्त एवं प्रशासन)
  • दीवान-ए-इंशा: पत्राचार विभाग
  • दीवान-ए-अर्ज: सैन्य विभाग
  • दीवान-ए-रिसालत: धार्मिक एवं विदेश विभाग

प्रांतीय प्रशासन:

  • इक्ता प्रणाली: भूमि का आवंटन; इक्तादार द्वारा राजस्व संग्रह
  • मुक्ति: छोटे प्रशासनिक इकाई
  • विलायत: प्रांत

न्याय व्यवस्था:

  • काजी: मुस्लिम कानून के अनुसार न्याय
  • मुहतसिब: बाजार एवं नैतिकता की निगरानी
  • अमीर-ए-दाद: अपील सुनने वाला अधिकारी

दिल्ली सल्तनत का बिहार पर प्रभाव

राजनीतिक प्रभाव:

  • बिहार दिल्ली सल्तनत का अभिन्न अंग बना
  • बख्तियार खिलजी ने 1200 ई. में बिहार पर आक्रमण किया
  • नालंदा एवं विक्रमशिला विश्वविद्यालयों को भारी क्षति
  • बिहार में मुस्लिम शासन की स्थापना

सांस्कृतिक प्रभाव:

  • बौद्ध धर्म का पतन; बिहार में बौद्ध केंद्रों का विनाश
  • सूफी संप्रदाय का प्रचार (बिहार में खानकाहों की स्थापना)
  • फारसी भाषा एवं संस्कृति का प्रभाव
  • इस्लामिक स्थापत्य का विकास

आर्थिक प्रभाव:

  • इक्ता प्रणाली का बिहार में विस्तार
  • कृषि एवं व्यापार में परिवर्तन
  • नए शहरों का विकास

प्रमुख स्थल (बिहार):

  • बिहार शरीफ: सूफी संत मखदूम शाह शर्फुद्दीन याहिया मनेरी का केंद्र
  • सासाराम: सूफी केंद्र
  • फुलवारी शरीफ: सूफी खानकाह

मॉडल प्रश्न (BPSC PT पैटर्न पर आधारित)

प्रश्न 1: हर्षवर्धन की राजधानी कहाँ थी?
(a) थानेसर
(b) कन्नौज
(c) पाटलिपुत्र
(d) उज्जैन

उत्तर: (b) कन्नौज
व्याख्या: हर्ष ने अपनी राजधानी थानेसर से कन्नौज स्थानांतरित की थी।


प्रश्न 2: हर्षवर्धन को नर्मदा नदी के तट पर किसने पराजित किया?
(a) पुलकेशिन प्रथम
(b) पुलकेशिन द्वितीय
(c) नरसिंह वर्मन
(d) महेंद्र वर्मन

उत्तर: (b) पुलकेशिन द्वितीय
व्याख्या: चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय ने हर्ष को नर्मदा के तट पर पराजित किया।


प्रश्न 3: पाल वंश का संस्थापक कौन था?
(a) धर्मपाल
(b) देवपाल
(c) गोपाल
(d) महिपाल

उत्तर: (c) गोपाल
व्याख्या: गोपाल ने 750 ईस्वी में पाल वंश की स्थापना की। जनता ने मत्स्यन्याय की स्थिति में उसे राजा चुना।


प्रश्न 4: विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना किसने की?
(a) गोपाल
(b) धर्मपाल
(c) देवपाल
(d) महिपाल

उत्तर: (b) धर्मपाल
व्याख्या: धर्मपाल ने विक्रमशिला विश्वविद्यालय (बिहार) की स्थापना की, जो बौद्ध शिक्षा का प्रमुख केंद्र बना।


प्रश्न 5: दिल्ली सल्तनत की स्थापना किसने की?
(a) मुहम्मद गोरी
(b) कुतुबुद्दीन ऐबक
(c) इल्तुतमिश
(d) बलबन

उत्तर: (b) कुतुबुद्दीन ऐबक
व्याख्या: मुहम्मद गोरी की मृत्यु (1206 ई.) के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक ने दिल्ली सल्तनत की स्थापना की।


प्रश्न 6: बिहार पर आक्रमण कर नालंदा एवं विक्रमशिला को नष्ट करने वाला कौन था?
(a) मुहम्मद गजनवी
(b) मुहम्मद गोरी
(c) बख्तियार खिलजी
(d) अलाउद्दीन खिलजी

उत्तर: (c) बख्तियार खिलजी
व्याख्या: बख्तियार खिलजी ने 1200 ई. में बिहार पर आक्रमण किया और नालंदा एवं विक्रमशिला विश्वविद्यालयों को नष्ट किया।


प्रश्न 7: इक्ता प्रणाली का संबंध किससे है?
(a) धार्मिक कर
(b) भूमि राजस्व एवं प्रशासन
(c) सैन्य संगठन
(d) व्यापार

उत्तर: (b) भूमि राजस्व एवं प्रशासन
व्याख्या: इक्ता प्रणाली में भूमि का आवंटन इक्तादार को किया जाता था, जो राजस्व संग्रह एवं प्रशासन का कार्य करता था।


प्रश्न 8: अलाउद्दीन खिलजी की बाजार नियंत्रण नीति का मुख्य उद्देश्य क्या था?
(a) व्यापार को बढ़ावा
(b) कीमतों का नियंत्रण एवं सैन्य व्यय में कमी
(c) किसानों की सहायता
(d) धार्मिक कर

उत्तर: (b) कीमतों का नियंत्रण एवं सैन्य व्यय में कमी
व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी ने बाजार नियंत्रण नीति अपनाई, जिससे कीमतें नियंत्रित रहीं और सेना का व्यय कम हुआ।


प्रश्न 9: मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी कहाँ स्थानांतरित की?
(a) आगरा
(b) दौलताबाद
(c) फिरोजाबाद
(d) लाहौर

उत्तर: (b) दौलताबाद
व्याख्या: मुहम्मद बिन तुगलक ने दिल्ली से दौलताबाद (देवगिरि) राजधानी स्थानांतरित की, परंतु यह प्रयोग असफल रहा।


प्रश्न 10: बिहार में सूफी संत मखदूम शाह शर्फुद्दीन याहिया मनेरी का केंद्र कहाँ था?
(a) पटना
(b) बिहार शरीफ
(c) गया
(d) भागलपुर

उत्तर: (b) बिहार शरीफ
व्याख्या: बिहार शरीफ सूफी संत मखदूम शाह शर्फुद्दीन याहिया मनेरी का प्रमुख केंद्र था।


BPSC PT के लिए रणनीति

  1. हर्षवर्धन: ह्वेनसांग, कन्नौज सभा, नालंदा से संबंध याद रखें
  2. पाल वंश: विक्रमशिला एवं ओदंतपुरी (बिहार) की स्थापना, बौद्ध धर्म का संरक्षण
  3. दिल्ली सल्तनत: पाँच राजवंश, प्रमुख शासक, प्रशासनिक प्रणालियाँ (इक्ता, बाजार नियंत्रण)
  4. बिहार संबंध: बख्तियार खिलजी का आक्रमण, नालंदा-विक्रमशिला का विनाश, सूफी केंद्र (बिहार शरीफ)
  5. पिछले प्रश्न पत्र: BPSC 71वें CCE तक के प्रश्न पत्रों का अभ्यास करें

इन नोट्स के आधार पर तैयारी करें और नियमित रूप से मॉडल प्रश्नों का अभ्यास करें। शुभकामनाएँ!

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