चौरी-चौरा कांड (1922) – BPSC PT के लिए संपूर्ण नोट्स

1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

BPSC में अक्सर पूछा जाता है कि चौरी-चौरा कांड ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की दिशा कैसे बदल दी। इसकी पृष्ठभूमि निम्नलिखित है:

पृष्ठभूमि विवरण

असहयोग आंदोलन (1920-22) गांधीजी के नेतृत्व में यह आंदोलन पूरे देश में चल रहा था

जनता में असंतोष महंगाई, बेरोजगारी और ब्रिटिश नीतियों के खिलाफ जनता में व्यापक गुस्सा था

बढ़ती हिंसा हालाँकि गांधीजी अहिंसा के पक्षधर थे, लेकिन कई जगहों पर आंदोलन हिंसक होता जा रहा था

💡 ध्यान दें: चौरी-चौरा कांड को अक्सर छात्र 1921 में लिख देते हैं, लेकिन यह 5 फरवरी 1922 को हुआ था। BPSC में यह गलती महंगी पड़ सकती है।

2. चौरी-चौरा कांड का परिचय

विवरण जानकारी

घटना की तिथि 5 फरवरी 1922 (रविवार)

स्थान चौरी-चौरा, गोरखपुर जिला, संयुक्त प्रांत (वर्तमान उत्तर प्रदेश)

आंदोलन असहयोग आंदोलन के अंतर्गत

मुख्य नेता मदारी पासी (जिसे बाबाभी कहा जाता था)

घटना का कारण मुख्य बाजार में शराब विरोधी प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गोलीबारी

3. घटना का पूरा विवरण (क्रमशः)

प्रारंभिक घटनाएँ

तिथि घटना

4 फरवरी 1922 (शनिवार) किसानों और ग्रामीणों ने चौरी-चौरा के मुख्य बाज़ार में शराब विरोधी प्रदर्शन किया

उसी दिन शाम पुलिस ने भीड़ पर लाठीचार्ज और गोलीबारी की कुछ प्रदर्शनकारी घायल हुए

🔴 5 फरवरी 1922 (मुख्य घटना)

समय घटना

सुबह क्रोधित ग्रामीण पुलिस स्टेशन के पास एकत्रित हुए

दिन में ग्रामीणों ने पुलिस स्टेशन को घेर लिया और पत्थरबाजी शुरू कर दी

पुलिस की प्रतिक्रिया पुलिस ने भीड़ पर गोली चलाई; कई लोग घायल हुए

प्रतिक्रियावश ग्रामीणों ने पुलिस स्टेशन में आग लगा दी

परिणाम उस समय अंदर मौजूद 22 पुलिसकर्मी जिंदा जल गए

⚠️ महत्वपूर्ण: आग लगाने के बाद भीड़ ने पुलिसकर्मियों को बाहर निकलने से रोकने के लिए दरवाजे बंद कर दिए थे। यही कारण है कि यह कांड भारतीय इतिहास में सबसे हिंसक घटनाओं में से एक माना जाता है।

4. घटना के तत्काल परिणाम

परिणाम विवरण

गांधीजी का आघात यह घटना गांधीजी के लिए बड़ा सदमा थी; उन्होंने इसे “दुर्भाग्यपूर्ण घटना” और “राष्ट्रीय अपमान” कहा

आंदोलन वापस 11-12 फरवरी 1922 को बारडोली (गुजरात) में कांग्रेस कार्यकारिणी समिति की बैठक में असहयोग आंदोलन को वापस लेने का निर्णय लिया गया

गांधीजी की गिरफ्तारी 10 मार्च 1922 को गांधीजी को गिरफ्तार कर लिया गया

सजा 6 साल की कैद (हालाँकि फरवरी 1924 में बीमारी के कारण रिहा कर दिए गए)

दोषियों का मुकदमा 19 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई, जिसे बाद में कम कर दिया गया

5. ऐतिहासिक महत्व और प्रभाव

राष्ट्रीय स्तर पर

प्रभाव विवरण

असहयोग आंदोलन का अंत फरवरी 1922 में ही आंदोलन को वापस ले लिया गया

गांधीजी की अहिंसा पर सवाल कई नेताओं ने गांधीजी की अहिंसा की रणनीति पर सवाल उठाने शुरू कर दिए

स्वराज पार्टी का उदय गया अधिवेशन (1922) के बाद सी.आर. दास और मोतीलाल नेहरू ने स्वराज पार्टी बनाई, जो परिषद् प्रवेश के पक्ष में थी

विचारधारात्मक बदलाव कांग्रेस में दो गुट बन गए – एक अहिंसा के पक्ष में, दूसरा सशस्त्र संघर्ष के पक्ष में

BPSC के लिए विशिष्ट महत्व

पहलू महत्व

अहिंसा का सिद्धांत चौरी-चौरा ने साबित कर दिया कि जनता में इतना गुस्सा है कि वह अहिंसा की सीमा को पार कर सकती है

गांधीजी का दूरदर्शिता गांधीजी को पहले ही लगने लगा था कि आंदोलन हिंसक हो रहा है – चौरी-चौरा ने उनकी आशंकाओं को सही साबित किया

चरणबद्ध स्वतंत्रता संग्राम इस घटना ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की दिशा बदल दी – आंदोलन को वापस लेने के बाद, कांग्रेस ने फिर से संगठित होना शुरू किया

6. विवाद और आलोचनाएँ

आलोचना विवरण

नेताओं में मतभेद चित्तरंजन दास, मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू जैसे नेता आंदोलन वापस लेने के सख्त खिलाफ थे

समय पर प्रश्न क्या आंदोलन को वापस लेना सही था, जब देशभर में जनसमर्थन था?

गांधीजी की भूमिका क्या गांधीजी जनता को नियंत्रित करने में असफल रहे?

📝 परीक्षा ट्रिक: याद रखने के लिए – “चौरी में 5 फरवरी को 22 पुलिसकर्मी जले”

· चौ – चौरी-चौरा

· 5 – 5 फरवरी

· 22 – 22 पुलिसकर्मी

7. महत्वपूर्ण तिथियाँ (एक नज़र में)

तिथि घटना

5 फरवरी 1922 चौरी-चौरा कांड

11-12 फरवरी 1922 बारडोली में कांग्रेस कार्यकारिणी की बैठक असहयोग आंदोलन वापस

10 मार्च 1922 गांधीजी को गिरफ्तार किया गया

मार्च 1922 गांधीजी को 6 साल की सजा

दिसंबर 1922 गया अधिवेशन (स्वराज पार्टी का उदय)

फरवरी 1924 गांधीजी को बीमारी के कारण रिहा किया गया

8. BPSC में पूछे गए प्रश्नों का विश्लेषण

BPSC में चौरी-चौरा कांड से संबंधित प्रश्न अक्सर निम्नलिखित प्रारूप में पूछे जाते हैं:

1. तिथि और स्थान – “चौरी-चौरा कांड किस तिथि को हुआ था?”

2. परिणाम – “चौरी-चौरा कांड के परिणामस्वरूप क्या हुआ?”

3. मुख्य व्यक्ति – “उस समय स्थानीय नेता कौन था?”

4. घटनाक्रम – “कितने पुलिसकर्मी मारे गए?”

📝 BPSC PT मॉडल प्रश्न पत्र (चौरी-चौरा कांड पर आधारित)

निम्नलिखित प्रश्न BPSC की पैटर्न के अनुसार बनाए गए हैं:

प्रश्न 1

चौरी-चौरा कांड किस वर्ष और तिथि को हुआ था?

(A) 5 फरवरी 1921

(B) 5 फरवरी 1922

(C) 4 फरवरी 1922

(D) 10 मार्च 1922

उत्तर: (B) 5 फरवरी 1922

व्याख्या: चौरी-चौरा कांड 5 फरवरी 1922 (रविवार) को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा गाँव में हुआ था।

प्रश्न 2

चौरी-चौरा कांड के परिणामस्वरूप गांधीजी ने क्या किया?

(A) भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया

(B) असहयोग आंदोलन वापस ले लिया

(C) सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया

(D) गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया

उत्तर: (B) असहयोग आंदोलन वापस ले लिया

व्याख्या: चौरी-चौरा कांड (5 फरवरी 1922) के बाद, 11-12 फरवरी 1922 को बारडोली (गुजरात) में हुई कांग्रेस कार्यकारिणी समिति की बैठक में गांधीजी ने असहयोग आंदोलन को वापस लेने का निर्णय लिया।

प्रश्न 3

चौरी-चौरा कांड के दौरान कितने पुलिसकर्मी मारे गए थे?

(A) 19

(B) 22

(C) 25

(D) 30

उत्तर: (B) 22

व्याख्या: चौरी-चौरा में प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस स्टेशन में आग लगाने के बाद उस समय अंदर मौजूद 22 पुलिसकर्मी जिंदा जल गए थे।

प्रश्न 4

चौरी-चौरा कांड के समय वहाँ के स्थानीय नेता कौन थे?

(A) महात्मा गांधी

(B) जवाहरलाल नेहरू

(C) मदारी पासी

(D) चित्तरंजन दास

उत्तर: (C) मदारी पासी

व्याख्या: चौरी-चौरा कांड के समय वहाँ के मुख्य स्थानीय नेता मदारी पासी (जिन्हें बाबाभी कहा जाता था) थे। गांधीजी और नेहरू क्रमशः राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर के नेता थे, स्थानीय नहीं।

प्रश्न 5

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन चौरी-चौरा कांड के बारे में सही नहीं है?

(A) यह घटना 5 फरवरी 1922 को हुई थी

(B) यह असहयोग आंदोलन के दौरान हुई थी

(C) इसके बाद गांधीजी ने असहयोग आंदोलन तेज कर दिया

(D) इसमें 22 पुलिसकर्मी मारे गए थे

उत्तर: (C) इसके बाद गांधीजी ने असहयोग आंदोलन तेज कर दिया

व्याख्या: यह कथन गलत है। चौरी-चौरा कांड के बाद गांधीजी ने आंदोलन को वापस ले लिया, तेज नहीं किया।

प्रश्न 6

चौरी-चौरा कांड के बाद गांधीजी को कितने वर्ष की सजा सुनाई गई थी?

(A) 2 वर्ष

(B) 4 वर्ष

(C) 6 वर्ष

(D) 8 वर्ष

उत्तर: (C) 6 वर्ष

व्याख्या: चौरी-चौरा कांड के बाद गांधीजी को 10 मार्च 1922 को गिरफ्तार किया गया और 6 वर्ष की सजा सुनाई गई। हालाँकि, फरवरी 1924 में बीमारी के कारण उन्हें रिहा कर दिया गया।

प्रश्न 7

निम्नलिखित में से कौन-सी घटना चौरी-चौरा कांड के बाद घटी?

(A) खिलाफत आंदोलन शुरू हुआ

(B) असहयोग आंदोलन शुरू हुआ

(C) गया अधिवेशन हुआ

(D) रौलेट एक्ट लागू हुआ

उत्तर: (C) गया अधिवेशन हुआ

व्याख्या: क्रम:

· रौलेट एक्ट (1919)

· खिलाफत आंदोलन (1919-20)

· असहयोग आंदोलन (1920-22)

· चौरी-चौरा (5 फरवरी 1922)

· असहयोग आंदोलन वापस (फरवरी 1922)

· गया अधिवेशन (दिसंबर 1922)

प्रश्न 8

गांधीजी ने चौरी-चौरा कांड को क्या कहा था?

(A) “राष्ट्रीय अपमान”

(B) “स्वतंत्रता का अमृत पत्र”

(C) “अहिंसा की जीत”

(D) “घातक दस्तावेज”

उत्तर: (A) “राष्ट्रीय अपमान”

व्याख्या: गांधीजी ने चौरी-चौरा कांड को “दुर्भाग्यपूर्ण घटना” और “राष्ट्रीय अपमान” कहा था। उन्होंने इस घटना से गहरा आघात महसूस किया था।

प्रश्न 9

निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?

(A) चौरी-चौरा – 5 फरवरी 1922

(B) असहयोग आंदोलन वापसी – फरवरी 1922

(C) गया अधिवेशन – दिसंबर 1922

(D) चौरी-चौरा में पुलिसकर्मी – 20

उत्तर: (D) चौरी-चौरा में पुलिसकर्मी – 20

व्याख्या: चौरी-चौरा कांड में 22 पुलिसकर्मी मारे गए थे, 20 नहीं। इसलिए यह जोड़ा गलत है।

प्रश्न 10

निम्नलिखित में से कौन-सी घटना के बाद गांधीजी ने असहयोग आंदोलन वापस लिया था?

(A) नील आंदोलन

(B) चौरी-चौरा कांड

(C) जलियांवाला बाग हत्याकांड

(D) खिलाफत आंदोलन

उत्तर: (B) चौरी-चौरा कांड

व्याख्या: जलियांवाला बाग (1919) और खिलाफत (1919-20) के बाद असहयोग आंदोलन शुरू हुआ था। चौरी-चौरा कांड (1922) के कारण ही गांधीजी ने असहयोग आंदोलन वापस लिया था।

प्रश्न 11

BPSC (70वीं) में पूछे गए प्रश्न का स्वरूप:

1922 के चौरी-चौरा कांड के बाद महात्मा गांधी ने निम्नलिखित में से किस आंदोलन को वापस ले लिया था?

(A) सविनय अवज्ञा आंदोलन

(B) भारत छोड़ो आंदोलन

(C) असहयोग आंदोलन

(D) खिलाफत आंदोलन

उत्तर: (C) असहयोग आंदोलन

व्याख्या: यह BPSC के पिछले प्रश्नों पर आधारित एक विशिष्ट प्रश्न है। चौरी-चौरा के बाद असहयोग आंदोलन वापस लिया गया था।

निष्कर्ष (परीक्षा हेतु सारांश)

तत्व एक पंक्ति में याद रखें

तिथि 5 फरवरी 1922

स्थान चौरी-चौरा, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

घटना पुलिस स्टेशन में आग 22 पुलिसकर्मी जले

स्थानीय नेता मदारी पासी

गांधीजी की प्रतिक्रिया आंदोलन वापस + “राष्ट्रीय अपमान”

आंदोलन वापसी फरवरी 1922 (बारडोली बैठक)

गांधीजी की सजा 6 वर्ष (मार्च 1922 में)

सुझाव: BPSC PT में चौरी-चौरा कांड से संबंधित प्रश्न लगातार पूछे जाते हैं। विशेष ध्यान दें:

1. 5 फरवरी 1922 – यह तिथि लगभग हर बार पूछी जाती है

2. 22 पुलिसकर्मी – संख्या पर विशेष ध्यान दें

3. असहयोग आंदोलन का अंत – इसी घटना ने आंदोलन खत्म किया

4. स्थानीय नेता मदारी पासी – इसे अन्य नेताओं से न मिलाएँ

5. बारडोली बैठक (गुजरात) – आंदोलन वापसी का निर्णय यहाँ हुआ

इन नोट्स का बार-बार अवलोकन करें

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