कांग्रेस का गया अधिवेशन (1922) – BPSC PT के लिए संपूर्ण नोट्स और पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र

1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

BPSC में अक्सर पूछा जाता है कि गया अधिवेशन इतना महत्वपूर्ण क्यों है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

पृष्ठभूमि विवरण

असहयोग आंदोलन की वापसी फरवरी 1922 में चौरी-चौरा कांड के बाद गांधीजी ने असहयोग आंदोलन को वापस ले लिया था

गांधीजी की गिरफ्तारी आंदोलन वापसी के बाद गांधीजी को गिरफ्तार कर लिया गया, जिससे राष्ट्रवादी शिविर में असंगठन और निराशा फैल गई

भविष्य की रणनीति पर बहस कांग्रेस के सामने प्रश्न था – अब आगे का रास्ता क्या हो? क्या विधान परिषदों का बहिष्कार जारी रखा जाए या उनमें प्रवेश किया जाए?

2. गया अधिवेशन का परिचय

विवरण जानकारी

अधिवेशन संख्या 37वां (सत्ताईसवां नहीं – 1912 का पटना अधिवेशन 27वां था)

स्थान गया, बिहार (वर्तमान में बोधगया के निकट)

तिथियाँ 26, 27, 29, 30 और 31 दिसंबर 1922

अध्यक्ष देशबंधु चित्तरंजन दास (सी.आर. दास)

स्वागत समिति अध्यक्ष बाबू ब्रजकिशोर प्रसाद

प्रतिनिधि 3248 प्रतिनिधि

⚠️ सावधानी: BPSC में अक्सर 1912 का पटना अधिवेशन और 1922 का गया अधिवेशन दोनों पूछे जाते हैं। दोनों को मिलाकर न देखें!

· 1912 – पटना (बांकीपुर) – अध्यक्ष: रघुनाथ नरसिंह मुधोलकर

· 1922 – गया – अध्यक्ष: चित्तरंजन दास

3. अधिवेशन का मुख्य मुद्दा: काउंसिल प्रवेश पर बहस

यह अधिवेशन भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। मुख्य विवादास्पद मुद्दा था – क्या कांग्रेस को विधान परिषदों (लोक सभाओं) में प्रवेश करना चाहिए?

दो गुटों का उदय

गुट नेता रुख तर्क

प्रो-चेंजर (स्वराजवादी) चित्तरंजन दास, मोतीलाल नेहरू परिषदों में प्रवेश के पक्ष में अंग्रेजों की नीतियों का भीतर से विरोध करें, परिषदों को “नकली संसद” के रूप में उजागर करें

नो-चेंजर (असहयोगी) वल्लभभाई पटेल, राजेंद्र प्रसाद, सी. राजगोपालाचारी परिषदों के बहिष्कार के पक्ष में गांधीजी के मूल अहिंसा और असहयोग के सिद्धांतों पर कायम रहें

4. अधिवेशन के निर्णय और परिणाम

🔴 मुख्य प्रस्ताव और निर्णय

1. परिषद् बहिष्कार जारी रखने का प्रस्ताव पारित – बहुमत से “नो-चेंजर” गुट की जीत हुई

2. सी.आर. दास का इस्तीफा – अपने प्रस्ताव की हार के बाद, दास ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया

3. स्वराज पार्टी का गठन – 1 जनवरी 1923 को सी.आर. दास और मोतीलाल नेहरू ने “कांग्रेस-खिलाफत स्वराज पार्टी” (जिसे बाद में केवल स्वराज पार्टीकहा गया) का गठन किया

   · अध्यक्ष: चित्तरंजन दास

   · सचिव: मोतीलाल नेहरू

अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव

प्रस्ताव विवरण

जनता से अपील सरकार द्वारा जारी नए ऋणों (लोन) में योगदान न करने की अपील

अकालियों को बधाई अकाली आंदोलनकारियों के अद्वितीय साहस और अहिंसा की भावना की सराहना

कमाल पाशा को बधाई तुर्की के नेता कमाल पाशा को बधाई संदेश

5. स्वराज पार्टी का गठन और उसके बाद

गया अधिवेशन के तुरंत बाद की घटनाएँ:

घटना विवरण

ए.आई.सी.सी. बैठक (बॉम्बे) दास का इस्तीफा स्वीकार किया गया; डॉ. अंसारी कार्यवाहक अध्यक्ष बने

विशेष अधिवेशन बाद में एक विशेष अधिवेशन बुलाया गया जिसने परिषद् प्रवेश की अनुमति दे दी

चुनावी सफलता (1923) स्वराज पार्टी ने चुनावों में जबरदस्त सफलता पाई – बंगाल और सी.पी. में बहुमत

केंद्रीय सभा में स्वराजियों ने 48 सीटों पर जीत हासिल की

6. BPSC के लिए विशिष्ट तथ्य (बिहार का योगदान)

तथ्य विवरण

गया अधिवेशन का आयोजन स्थल बिहार – यह बिहार के लिए गौरव का विषय है कि कांग्रेस का इतना ऐतिहासिक अधिवेशन यहाँ हुआ

स्वागत समिति अध्यक्ष ब्रजकिशोर प्रसाद (बिहार के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता)

प्रारंभिक बैठक गया में बिहार प्रांतीय कांग्रेस समिति की बैठक 4 मई 1922 को दीप नारायण सिंह की अध्यक्षता में हुई

बिहार में स्वराज दल बिहार में स्वराज दल की एक शाखा बनी जिसका नेतृत्व श्रीकृष्ण सिंह ने किया

💡 परीक्षा ट्रिक: याद रखने के लिए – “गया दास का अधिवेशन”

· ग – गया (स्थान)

· य – याद रखें (1922)

· दा – दास (चित्तरंजन दास अध्यक्ष)

· स – स्वराज पार्टी (यहीं से जन्म)

7. महत्वपूर्ण तिथियाँ और तथ्य (एक नज़र में)

तिथि/तथ्य विवरण

26-31 दिसंबर 1922 गया अधिवेशन

5 फरवरी 1922 चौरी-चौरा कांड

फरवरी 1922 गांधीजी द्वारा असहयोग आंदोलन वापस

दिसंबर 1922 गया अधिवेशन में “नो-चेंजर” की जीत

1 जनवरी 1923 स्वराज पार्टी का गठन

नवंबर 1923 स्वराज पार्टी चुनावों में भारी सफल

1925 देशबंधु चित्तरंजन दास का निधन

📝 BPSC PT मॉडल प्रश्न पत्र (गया अधिवेशन पर आधारित)

निम्नलिखित प्रश्न BPSC की पैटर्न के अनुसार बनाए गए हैं। ये प्रश्न 67वीं, 69वीं और 70वीं BPSC में पूछे गए प्रश्नों पर आधारित हैं:

प्रश्न 1

1922 ई. में गया में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन के अध्यक्ष कौन थे?

(A) हकीम अजमल खान

(B) मोतीलाल नेहरू

(C) चित्तरंजन दास

(D) महात्मा गांधी

उत्तर: (C) चित्तरंजन दास

व्याख्या: दिसंबर 1922 में गया में आयोजित कांग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षता देशबंधु चित्तरंजन दास ने की थी। यह प्रश्न 67वीं BPSC (रद्द) और 70वीं BPSC (पुनः परीक्षा) में पूछा गया था।

प्रश्न 2

गया अधिवेशन (1922) के बाद किसने स्वराज पार्टी का गठन किया?

(A) महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू

(B) चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू

(C) बाल गंगाधर तिलक और गोपाल कृष्ण गोखले

(D) वल्लभभाई पटेल और राजेंद्र प्रसाद

उत्तर: (B) चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू

व्याख्या: गया अधिवेशन में परिषद् प्रवेश का प्रस्ताव हारने के बाद, सी.आर. दास ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया और 1 जनवरी 1923 को मोतीलाल नेहरू के साथ मिलकर कांग्रेस-खिलाफत स्वराज पार्टी‘ (स्वराज पार्टी) का गठन किया।

प्रश्न 3

गया अधिवेशन (1922) में निम्नलिखित में से कौन-सा मुद्दा मुख्य था?

(A) पूर्ण स्वराज की मांग

(B) विधान परिषदों में प्रवेश का मुद्दा

(C) भारत छोड़ो का प्रस्ताव

(D) मूल अधिकारों पर प्रस्ताव

उत्तर: (B) विधान परिषदों में प्रवेश का मुद्दा

व्याख्या: गया अधिवेशन का मुख्य विवादास्पद मुद्दा यह था कि क्या कांग्रेस को विधान परिषदों में प्रवेश करना चाहिए। प्रो-चेंजर‘ (सी.आर. दास, मोतीलाल नेहरू) प्रवेश के पक्ष में थे जबकि नो-चेंजर‘ (पटेल, राजेंद्र प्रसाद, राजगोपालाचारी) बहिष्कार के पक्ष में थे।

प्रश्न 4

गया अधिवेशन (1922) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

(A) इस अधिवेशन के अध्यक्ष चित्तरंजन दास थे

(B) इस अधिवेशन में परिषद् प्रवेश के पक्ष में प्रस्ताव पारित हुआ

(C) इस अधिवेशन के बाद स्वराज पार्टी का गठन हुआ

(D) इस अधिवेशन में अकालियों के साहस की सराहना की गई

उत्तर: (B) इस अधिवेशन में परिषद् प्रवेश के पक्ष में प्रस्ताव पारित हुआ

व्याख्या: वास्तव में, गया अधिवेशन में नो-चेंजरगुट की जीत हुई और परिषद् बहिष्कार जारी रखने का प्रस्ताव पारित हुआ। सी.आर. दास के प्रस्ताव की हार के बाद ही उन्होंने इस्तीफा दिया और बाद में स्वराज पार्टी बनाई।

प्रश्न 5

निम्नलिखित में से कौन नो-चेंजरगुट के नेता नहीं थे?

(A) वल्लभभाई पटेल

(B) राजेंद्र प्रसाद

(C) चित्तरंजन दास

(D) सी. राजगोपालाचारी

उत्तर: (C) चित्तरंजन दास

व्याख्या: चित्तरंजन दास प्रो-चेंजरगुट (स्वराजवादी) के नेता थे, जो परिषद् प्रवेश के पक्ष में थे। नो-चेंजरगुट में वल्लभभाई पटेल, राजेंद्र प्रसाद, सी. राजगोपालाचारी और एम.ए. अंसारी शामिल थे।

प्रश्न 6

गया अधिवेशन (1922) के बाद गठित स्वराज पार्टी का अध्यक्ष किसे बनाया गया?

(A) मोतीलाल नेहरू

(B) जवाहरलाल नेहरू

(C) चित्तरंजन दास

(D) हकीम अजमल खान

उत्तर: (C) चित्तरंजन दास

व्याख्या: 1 जनवरी 1923 को गठित स्वराज पार्टी के अध्यक्ष चित्तरंजन दास बनाए गए, जबकि मोतीलाल नेहरू इसके सचिवों में से एक थे।

प्रश्न 7

गया अधिवेशन (1922) कांग्रेस का कौन-सा अधिवेशन था?

(A) 27वां

(B) 37वां

(C) 47वां

(D) 57वां

उत्तर: (B) 37वां

व्याख्या: गया अधिवेशन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का 37वां अधिवेशन था। (नोट: 1912 का पटना अधिवेशन 27वां था – दोनों को भूलकर भी मिलाना नहीं है)।

प्रश्न 8

निम्नलिखित में से किस अधिवेशन में प्रथम बार मूल अधिकारों (Fundamental Rights) से संबंधित प्रस्ताव पारित किए गए थे?

(A) सूरत अधिवेशन (1907)

(B) गया अधिवेशन (1922)

(C) कराची अधिवेशन (1931)

(D) लखनऊ अधिवेशन (1916)

उत्तर: (C) कराची अधिवेशन (1931)

व्याख्या: यह प्रश्न ट्रिकी है – छात्र अक्सर गया अधिवेशन को मूल अधिकारों से जोड़कर भूल करते हैं। वास्तव में, मूल अधिकारों से संबंधित प्रस्ताव पहली बार 1931 के कराची अधिवेशन (अध्यक्ष: सरदार पटेल) में पारित किए गए थे।

निष्कर्ष (परीक्षा हेतु सारांश)

तत्व एक पंक्ति में याद रखें

कब 26-31 दिसंबर 1922

कहाँ गया, बिहार

अध्यक्ष चित्तरंजन दास (देशबंधु)

मुख्य मुद्दा विधान परिषदों में प्रवेश या बहिष्कार

विजेता गुट नो-चेंजर (बहिष्कार के पक्ष में)

परिणाम सी.आर. दास का इस्तीफा स्वराज पार्टी का गठन

बिहार कनेक्शन स्वागत समिति अध्यक्ष: ब्रजकिशोर प्रसाद; बिहार में स्वराज दल के नेता: श्रीकृष्ण सिंह

सुझाव: BPSC PT में गया अधिवेशन से संबंधित प्रश्न लगातार पूछे जाते रहे हैं। विशेष ध्यान दें:

1. अध्यक्ष – चित्तरंजन दास (67वीं और 70वीं BPSC में पूछा गया)

2. यह असहयोग आंदोलन वापसी के बाद का पहला अधिवेशन था

3. स्वराज पार्टी यहीं से जन्म लेती है

4. बिहार में श्रीकृष्ण सिंह ने स्वराज दल का नेतृत्व किया

5. 1912 के पटना अधिवेशन से इसे भूलकर भी मिलाना नहीं है

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