राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 – पूर्ण नोट (BPSC PT हेतु) विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र

यहाँ राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का विस्तृत नोट दिया जा रहा है, जो BPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। बिहार में इसके कार्यान्वयन की स्थिति पर विशेष ध्यान दें।


राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 – पूर्ण नोट (BPSC PT हेतु)

  1. परिचय एवं पृष्ठभूमि

· घोषणा तिथि: 29 जुलाई 2020
· अध्यक्षता: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट द्वारा अनुमोदित
· प्रतिस्थापन: यह 34 वर्ष पुरानी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NPE) 1986 को प्रतिस्थापित करती है
· प्रारूप समिति अध्यक्ष: प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. के. कस्तूरीरंगन (पद्म विभूषण)
· नई शिक्षा नीति की आवश्यकता: 21वीं सदी की चुनौतियों (AI, data science, climate change) से निपटने हेतु, रट्टे से हटकर चिंतनशील और कौशल-आधारित शिक्षा पर ध्यान देने के लिए
· संबंध: यह नीति संयुक्त राष्ट्र के चौथे सतत विकास लक्ष्य (SDG-4) “गुणवत्तापूर्ण शिक्षा” से जुड़ी है

  1. नीति के पाँच आधार स्तंभ (5 Foundational Pillars) – परीक्षा में अति पूछे जाने वाले

NEP 2020 पाँच मूल स्तंभों पर आधारित है :

  1. पहुंच (Access): हर बच्चे तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करना।
  2. समानता (Equity): सभी वर्गों को समान अवसर प्रदान करना।
  3. गुणवत्ता (Quality): आधुनिक, कौशल-आधारित और व्यावहारिक शिक्षा।
  4. सामर्थ्य (Affordability): शिक्षा को किफायती बनाना।
  5. जवाबदेही (Accountability): शिक्षण संस्थानों और शिक्षकों को पारदर्शी और उत्तरदायी बनाना।

BPSC टिप: इन पाँचों स्तंभों के नाम (Access, Equity, Quality, Affordability, Accountability) याद रखना अति आवश्यक है। प्रश्न में कोई एक हटाकर पूछा जा सकता है।

  1. विद्यालयी शिक्षा में प्रमुख परिवर्तन

(क) नई पाठ्यचर्या संरचना (5+3+3+4) – सबसे महत्वपूर्ण बदलाव

पुरानी 10+2 प्रणाली को समाप्त कर 5+3+3+4 प्रणाली लागू की गई है, जो बच्चों के संज्ञानात्मक विकास के चरणों पर आधारित है :

चरण आयु सीमा कक्षाएं मुख्य विशेषता
नींव (Foundational) 3-8 वर्ष आंगनवाड़ी/प्री-स्कूल (3 वर्ष) + कक्षा 1-2 (2 वर्ष) खेल-आधारित, गतिविधि-आधारित अधिगम
प्रारंभिक (Preparatory) 8-11 वर्ष कक्षा 3-5 अनुभवात्मक अधिगम, बुनियादी गणित व भाषा
माध्यमिक (Middle) 11-14 वर्ष कक्षा 6-8 विषय-केंद्रित शिक्षा, विज्ञान, गणित, कला का परिचय
उच्च माध्यमिक (Secondary) 14-18 वर्ष कक्षा 9-12 (दो चरणों में) गहन अध्ययन, आलोचनात्मक चिंतन, विषयों में लचीलापन

(ख) बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता (FLN)

· लक्ष्य: कक्षा 3 तक के सभी बच्चों में बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता (पढ़ना, लिखना और बुनियादी गणित) सुनिश्चित करना
· कार्यान्वयन: इसके लिए राष्ट्रीय मिशन (NIPUN Bharat) स्थापित किया गया

(ग) भाषा नीति (मातृभाषा पर जोर)

· शिक्षा का माध्यम: कम से कम कक्षा 5 तक, लेकिन आदर्श रूप से कक्षा 8 तक, मातृभाषा/स्थानीय भाषा/क्षेत्रीय भाषा में होगा
· तीन-भाषा फॉर्मूले को जारी रखा गया; संस्कृत को एक विकल्प के रूप में रखा गया

(घ) मूल्यांकन सुधार (PARAKH)

· निकाय: PARAKH (Performance Assessment, Review, and Analysis of Knowledge for Holistic Development) नामक एक राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र स्थापित किया जाएगा
· उद्देश्य: यह स्कूल बोर्डों के लिए मानक-निर्धारण निकाय होगा, जो रट्टे के बजाय योग्यता-आधारित (competency-based) आकलन पर ध्यान देगा

  1. उच्च शिक्षा में प्रमुख परिवर्तन

· स्नातक दर लक्ष्य: उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (GER) को 2035 तक 26.3% से बढ़ाकर 50% करना
· 4-वर्षीय डिग्री: लचीले प्रवेश और निकास (multiple entry/exit) विकल्पों के साथ 4-वर्षीय डिग्री कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे
· राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (NRF): पूरे देश में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया जाएगा
· अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (ABC): छात्र अब देश के किसी भी संस्थान से कोर्स करके क्रेडिट जमा कर सकते हैं। यह एक डिजिटल रिपॉजिटरी है जो क्रेडिट ट्रांसफर और मल्टीपल एंट्री-एग्जिट की सुविधा देती है

  1. बिहार के संदर्भ में कार्यान्वयन (BPSC विशेष)

बिहार में NEP 2020 के कार्यान्वयन के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं:

· प्रवेशोत्सव (Praveshotsav) – विशेष नामांकन अभियान
· बिहार सरकार ने कोविड-19 महामारी के दौरान ड्रॉपआउट बच्चों को वापस स्कूल लाने के लिए ‘प्रवेशोत्सव’ अभियान चलाया।
· परिणाम: इस अभियान के तहत लगभग 36.77 लाख बच्चों का स्कूलों में नामांकन कराया गया।
· यह NEP 2020 के “सार्वभौमिक पहुंच” (Universal Access) लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
· शिक्षकों की बहाली में नीतिगत बदलाव
· दिसंबर 2020 में बिहार सरकार ने शिक्षक भर्ती में बिहार डोमिसाइल को अनिवार्य कर दिया था।
· हालाँकि, जून 2023 में इस नीति को उलटते हुए, सरकार ने शिक्षकों (विशेषकर गणित और विज्ञान) की भर्ती देशभर से करने की अनुमति दे दी।
· कारण: राज्य में गणित और विज्ञान विषयों के योग्य शिक्षकों की कमी। यह निर्णय शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया, जो NEP 2020 की भावना के अनुरूप है।

  1. कार्यान्वयन में चुनौतियाँ (परीक्षा उपयोगी)

· वित्त पोषण: शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 6% खर्च करने का लक्ष्य अभी भी दूर है
· बुनियादी ढाँचा: ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त संसाधनों, स्मार्ट क्लासरूम और प्रयोगशालाओं की कमी
· शिक्षक प्रशिक्षण: नई 5+3+3+4 संरचना के लिए शिक्षकों को पुनः प्रशिक्षित करना एक बड़ी चुनौती
· क्षेत्रीय असमानता: बिहार जैसे राज्यों में उच्च शिक्षा का GER राष्ट्रीय औसत से कम है


प्रीलिम्स परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य (एक नजर में)

विषय तथ्य
घोषणा वर्ष 2020
प्रतिस्थापित नीति NPE 1986
समिति अध्यक्ष डॉ. के. कस्तूरीरंगन
नई शिक्षा संरचना 5+3+3+4 (पुरानी 10+2 के स्थान पर)
आयु सीमा (नींव चरण) 3-8 वर्ष
मूल्यांकन निकाय PARAKH
GER लक्ष्य 2035 50%
साक्षरता लक्ष्य (कक्षा 3 तक) FLN (बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता)
बिहार – प्रवेशोत्सव नामांकन (2021) लगभग 36.77 लाख बच्चे

BPSC टिप: परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों में ‘5+3+3+4’ प्रणाली, PARAKH, बिहार में प्रवेशोत्सव जैसे स्थानीय क्रियान्वयन के उदाहरण, तथा नीति के पाँच आधार स्तंभों पर विशेष फोकस रखें।

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