1917 (चंपारण), 1918 (खेड़ा + अहमदाबाद) – तीनों गांधीवादी आंदोलन लगभग एक साथ हुए

1. खेड़ा सत्याग्रह (1918)

📍 पृष्ठभूमि

  • स्थान: खेड़ा जिला, गुजरात
  • समस्या: 1917 में खेड़ा में भयंकर सूखा पड़ा, फसलें बर्बाद हो गईं, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने किसानों से बकाया राजस्व (Land Revenue) वसूलने पर जोर दिया।
  • किसानों की मांग: फसल खराब होने के कारण राजस्व में पूर्ण छूट की मांग।

🗓️ आंदोलन

  • नेतृत्व: गांधीजी (अहमदाबाद में असहयोग के बाद), उनके साथ वल्लभभाई पटेल और इंदुलाल याज्ञनिक थे।
  • सत्याग्रह: गांधीजी ने किसानों को सरकार को राजस्व न देने का आह्वान किया और एक समझौते के लिए तैयार थे।
  • समर्थन: गांधीजी ने ‘गुजरात सत्याग्रह सभा’ का गठन किया और स्वयंसेवकों ने किसानों को प्रेरित किया।
  • अंतिम परिणाम: सरकार ने किसानों को राजस्व देने से स्थगन (Moratorium) देने और भूमि जब्ती रोकने पर सहमति जताई।

📝 BPSC के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • वर्ष: 1918 (चंपारण के ठीक एक साल बाद)।
  • साथी: सरदार वल्लभभाई पटेल ने पहली बार इस आंदोलन में राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया।
  • स्वामी: गांधीजी के आह्वान पर बिहार के स्वामी सहजानंद सरस्वती ने भी इसमें भाग लिया और बाद में बिहार किसान सभा के संस्थापक बने।

🏭 2. अहमदाबाद मिल हड़ताल (1918)

📍 पृष्ठभूमि

  • स्थान: अहमदाबाद, गुजरात।
  • समस्या: प्लेग महामारी के बाद, मिल मालिकों ने मजदूरों की मजदूरी नहीं बढ़ाई, जबकि महंगाई बढ़ गई थी।

🗓️ आंदोलन

  • नेतृत्व: गांधीजी ने पहली बार ‘भूख हड़ताल’ (Hunger Strike) का प्रयोग किया और मजदूरों के लिए 35% मजदूरी बढ़ोतरी की मांग की।
  • गहन: जब मजदूर हड़ताल छोड़ने लगे, तो गांधीजी ने अनशन शुरू किया, जिससे मजदूर उत्साहित हुए।
  • परिणाम: मजदूरों को 35% मजदूरी वृद्धि मिली और पहली बार ‘पंचायत प्रणाली’ (निर्णय समिति) की शुरुआत हुई।

📝 BPSC के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • वर्ष: 1918।
  • महत्व: यह गांधीजी का पहला अनशन था और उन्होंने इसे ‘आमरण अनशन’ (Fast unto death) कहा।
  • अन्य नेताअंबालाल साराभाई (मजदूर नेता) और शंकरलाल बैंकर (व्यवसायी) इसमें शामिल थे।
  • BPSC संदर्भ: इस आंदोलन ने गांधीजी को ‘मजदूरों के नेता’ के रूप में स्थापित किया।

🚩 3. बिहार में अन्य महत्वपूर्ण आंदोलन

BPSC में बिहार के अपने आंदोलनों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यहाँ दो प्रमुख आंदोलनों का विवरण है:


(A) स्वदेशी आंदोलन (1905-1908) – बिहार में

  • पृष्ठभूमि: 1905 में बंगाल के विभाजन के विरोध में पूरे भारत में स्वदेशी आंदोलन शुरू हुआ।
  • बिहार में प्रभाव: बिहार (जो तब बंगाल का हिस्सा था) में भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ा। विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया गया और स्वदेशी वस्त्रों (खादी, देशी कपड़े) को अपनाया गया।
  • शिक्षा का प्रसार: राष्ट्रवादी भावना से प्रेरित होकर, बिहार में कई ‘नेशनल स्कूल’ खोले गए, जिनमें पटना के ‘बिहार नेशनल कॉलेज’ (जिसे पंडित मदन मोहन मालवीय ने खोला था) और भागलपुर के स्कूल प्रमुख थे।
  • प्रमुख नेतासच्चिदानंद सिन्हामजहर-उल-हकमौलाना मजहर-उल-हक और रामानंद चटर्जी सक्रिय थे।

📝 BPSC के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • वर्ष: 1905-1908।
  • बिहार विशेष: बिहार में पटना की स्वदेशी समिति ने स्वदेशी वस्तुओं के प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • महात्मा गांधी से पहले: यह आंदोलन गांधीजी के आगमन से पहले का था, इसलिए इसमें अहिंसा के साथ-साथ हिंसक विरोध भी हुआ, लेकिन बिहार में यह काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा।

(B) बिहार किसान सभा (1929) और किसान आंदोलन

  • पृष्ठभूमि: बिहार में किसानों का शोषण (जमींदारों, महाजनों और अंग्रेज अधिकारियों द्वारा) पुरानी समस्या थी। चंपारण के बाद, किसानों में चेतना आई।
  • स्थापना: 1929 में स्वामी सहजानंद सरस्वती (जिन्होंने खेड़ा सत्याग्रह में भी भाग लिया था) ने ‘बिहार प्रांतीय किसान सभा’ की स्थापना की। इसका पहला अधिवेशन बिहारशरीफ (नालंदा) में हुआ।
  • उद्देश्य: जमींदारों के अत्याचारों, ऊँची ब्याज दरों और करों के खिलाफ किसानों को संगठित करना।
  • प्रमुख नेता: स्वामी सहजानंद, रामवृक्ष बेनीपुरीजगजीवन राम (जो बाद में हरिजनों के नेता बने), पंडित यमुना करजी (गया जिले से)।

📝 BPSC के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • सहजानंद: उन्होंने ‘किसान’ (मासिक पत्रिका) प्रकाशित की और किसानों को संगठित करने के लिए ‘हिंदी साहित्य सम्मेलन’ से जुड़े।
  • गया जिले में आंदोलन: 1930 के दशक में गया में किसान आंदोलन बहुत तीव्र हुआ, जिसमें पंडित अच्युतानंद और योगेंद्र शुक्ल ने नेतृत्व किया।
  • कांग्रेस से संबंध: 1936 में, किसान सभा ने अखिल भारतीय स्तर पर कांग्रेस के ‘किसान सम्मेलन’ के साथ गठबंधन किया, लेकिन बाद में उसमें मतभेद हुए।

🎯 सभी आंदोलनों की तुलना (BPSC के लिए त्वरित तालिका)

आंदोलनवर्षस्थाननेतृत्वमुख्य मुद्दाBPSC के लिए विशेष
चंपारण सत्याग्रह1917बिहार (चंपारण)गांधी, राजेंद्र प्रसाद, राजकुमार शुक्लतिनकठिया प्रथा (नील)पहला सत्याग्रह, बिहार का पहला बड़ा आंदोलन
खेड़ा सत्याग्रह1918गुजरातगांधी, वल्लभभाई पटेलभू-राजस्व में छूटपटेल का पहला राष्ट्रीय आंदोलन
अहमदाबाद मिल हड़ताल1918गुजरातगांधीमजदूरों की मजदूरीपहला अनशन, पंचायत प्रणाली
स्वदेशी आंदोलन (बिहार)1905-08बिहारसच्चिदानंद, मजहर-उल-हकबंगाल विभाजन, विदेशी वस्त्र बहिष्कारगांधी पूर्व आंदोलन, पटना की स्वदेशी समिति
बिहार किसान सभा1929बिहार (बिहारशरीफ)स्वामी सहजानंदजमींदारों का अत्याचार, करबिहार में संगठित किसान आंदोलन

📜 पिछले वर्षों के BPSC प्रश्न (PYQs)

  1. प्रश्न (64वीं BPSC)अहमदाबाद मिल हड़ताल (1918) के दौरान गांधीजी ने किस रणनीति को अपनाया था?उत्तर: ‘भूख हड़ताल’ (Hunger Strike)
  2. प्रश्न (65वीं BPSC)खेड़ा सत्याग्रह (1918) के दौरान गांधीजी के प्रमुख सहयोगी कौन थे?उत्तर: सरदार वल्लभभाई पटेल
  3. प्रश्न (BPSC CDPO, 2018)बिहार में स्वदेशी आंदोलन (1905-08) किससे प्रभावित था?उत्तर: बंगाल के विभाजन (1905) से।
  4. प्रश्न (BPSC Assistant, 2014)‘बिहार प्रांतीय किसान सभा’ के संस्थापक कौन थे?
    • (a) डॉ. राजेंद्र प्रसाद (b) स्वामी सहजानंद सरस्वती (c) अनुग्रह नारायण सिन्हा (d) श्री कृष्ण सिंह
    सही उत्तर: (b) स्वामी सहजानंद सरस्वती।

🎯 मॉडल अभ्यास प्रश्न (Model Questions)

  1. गांधीजी का पहला ‘आमरण अनशन’ किस आंदोलन के दौरान हुआ था?
    • (a) चंपारण (b) खेड़ा (c) अहमदाबाद (d) असहयोग
    उत्तर: (c) अहमदाबाद।
  2. ‘बिहार प्रांतीय किसान सभा’ का पहला अधिवेशन कहाँ हुआ था?
    • (a) पटना (b) भागलपुर (c) बिहारशरीफ (d) मोतिहारी
    उत्तर: (c) बिहारशरीफ।
  3. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
    • (a) चंपारण – तिनकठिया प्रथा
    • (b) खेड़ा – भू-राजस्व छूट
    • (c) अहमदाबाद – 25% मजदूरी वृद्धि
    • (d) स्वदेशी आंदोलन – बंगाल विभाजन
    उत्तर: (c) अहमदाबाद – 35% मजदूरी वृद्धि हुई थी।

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