ईरान और अमेरिका के संघर्ष

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष की जड़ें कई दशकों पुरानी हैं। यह सिर्फ एक सैन्य टकराव नहीं, बल्कि ऐतिहासिक कटुता, भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और वैचारिक संघर्ष का एक जटिल मिश्रण है। BPSC के लिए इसे मुख्यतः तीन स्तरों पर समझना जरूरी है।

  1. ऐतिहासिक जड़ें (1953 से 1979)

वर्तमान तनाव की नींव 20वीं सदी के मध्य में रखी गई थी।

· 1953 का CIA तख्तापलट: अमेरिका और ब्रिटेन ने मिलकर ईरान के लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसद्देक को सत्ता से हटा दिया, क्योंकि उन्होंने तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण कर दिया था। इसके बाद अमेरिका समर्थित शाह (राजा) को वापस सत्ता में बिठाया गया। यह घटना ईरान में गहरी अमेरिका-विरोधी भावना की जनक है।
· 1979 की इस्लामी क्रांति: शाह के खिलाफ जनता के विद्रोह ने अयातुल्ला खुमैनी के नेतृत्व में एक नया इस्लामी गणराज्य स्थापित किया, जो अमेरिका का कट्टर विरोधी था।
· अमेरिकी दूतावास में बंधक संकट: क्रांति के तुरंत बाद, ईरानी छात्रों ने तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर 52 अमेरिकियों को 444 दिनों तक बंधक बना लिया। इसके चलते अमेरिका ने ईरान से राजनयिक संबंध तोड़ दिए और प्रतिबंध लगाए।

  1. परमाणु कार्यक्रम और “अधिकतम दबाव” (2015 से वर्तमान)

परमाणु मुद्दा हाल के दशकों में संघर्ष का केंद्र रहा है।

· JCPOA (2015): ईरान ने अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, चीन और जर्मनी के साथ एक ऐतिहासिक समझौता किया, जिसमें उसने अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के बदले प्रतिबंधों में राहत पाई।
· अमेरिका की वापसी (2018): राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को इस समझौते से अलग कर लिया और ईरान पर भारी आर्थिक दबाव बनाने के लिए “अधिकतम दबाव” (Maximum Pressure) की नीति शुरू की।
· बढ़ती सैन्य कार्रवाई: इसके बाद तनाव चरम पर पहुंच गया:
· 2020: अमेरिका ने ईरान के शक्तिशाली जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या कर दी।
· 2025: ईरान ने अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता की, लेकिन जून 2025 में इज़राइल और फिर अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों (फोरदो, नतांज़, इस्फ़हान) पर सीधे हमले किए।
· 2026 की शुरुआत: स्थिति और खराब हुई। फरवरी 2026 में, एक संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को मार दिया गया। इसके जवाब में ईरान ने पूरे क्षेत्र में अमेरिकी और इज़राइली ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।

  1. वर्तमान गतिरोध के अन्य कारण

· हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन सुरक्षा: ईरान ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (जहां से दुनिया का ~20% तेल गुजरता है) को बंद करने या वहां जहाजों पर हमले करने की धमकी दी है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। अमेरिका इस मार्ग की सुरक्षा चाहता है।
· क्षेत्रीय प्रभुत्व की होड़: अमेरिका और ईरान मध्य पूर्व में अपने-अपने प्रभाव क्षेत्र को लेकर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। ईरान पर इज़राइल, सीरिया और लेबनान में अमेरिका-विरोधी समूहों का समर्थन करने का आरोप है।
· आंतरिक राजनीति: अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव (मिडटर्म) का दबाव, ईरान की ओर से बिना समझौता किए परमाणु क्षमता बरकरार रखने का रुख, और ईरान में आर्थिक संकट को लेकर भड़के आंतरिक विरोध प्रदर्शन (जिसे ईरान अमेरिका द्वारा भड़काना बताता है), सभी तनाव को बढ़ाते हैं।


BPSC उत्तर लेखन के लिए मुख्य बिंदु

पहलू विवरण
तात्कालिक कारण ईरान का परमाणु कार्यक्रम, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन विवाद, आपसी सैन्य हमलों का सिलसिला।
मूलभूत कारण 1953 का अमेरिकी तख्तापलट, 1979 की क्रांति, वैचारिक और सभ्यतागत टकराव।
भू-राजनीतिक आयाम मध्य पूर्व में वर्चस्व की लड़ाई, इज़राइल की भूमिका, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा।
वैश्विक प्रभाव अंतरराष्ट्रीय कानून का कमजोर पड़ना, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक व्यापार पर प्रभाव।

💡 BPSC मुख्य परीक्षा हेतु सुझाव

· दृष्टिकोण: उत्तर की शुरुआत ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (1953, 1979) से करें, फिर हालिया परमाणु और सैन्य मुद्दों की ओर बढ़ें।
· संतुलित दृष्टिकोण: अमेरिकी रुख (ईरान को परमाणु हथियार से रोकना) और ईरानी रुख (अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा) दोनों को निष्पक्षता से प्रस्तुत करें।
· भारत के लिए निहितार्थ: इस संघर्ष का भारत पर क्या प्रभाव पड़ सकता है? (तेल आयात, प्रवासी भारतीय, क्षेत्रीय सुरक्षा) – इस पहलू को जोड़ना एक अतिरिक्त लाभ हो सकता है।

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