बिहार में 1942 का आंदोलन: एक अनोखा अध्याय

भारत छोड़ो आंदोलन (1942) में बिहार की भूमिका अत्यंत सक्रिय और विशिष्ट रही। जब शीर्ष कांग्रेस नेतृत्व को गिरफ्तार कर लिया गया, तो बिहार के युवाओं और किसानों ने आंदोलन की बागडोर अपने हाथों में ले ली -3

पटना सचिवालय पर तिरंगा (11 अगस्त, 1942)

  • यह बिहार के आंदोलन का सबसे चर्चित प्रसंग है। पटना विश्वविद्यालय के छात्रों ने अंग्रेज़ों के ‘यूनियन जैक’ को हटाकर पटना सचिवालय पर तिरंगा फहराने का निश्चय किया -3
  • अंग्रेज़ अधिकारियों ने इस जुलूस पर गोली चलवा दी, जिसमें सात छात्र शहीद हो गए। बलिदान देने वालों में उमाकांत प्रसाद सिंह, रामानंद सिंह, सतीश प्रसाद झा, जगपति कुमार, देवीपद चौधरी, राजेंद्र सिंह और राम गोविंद सिंह शामिल थे -3

जयप्रकाश नारायण और ‘आज़ाद दस्ता’

  • यह बिहार के आंदोलन की सबसे अनूठी विशेषता थी। जयप्रकाश नारायण (जेपी) हजारीबाग सेंट्रल जेल से साहसिक भाग निकले और अंग्रेज़ों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध के लिए ‘आज़ाद दस्ता‘ का गठन किया -3-8
  • इस दस्ते ने नेपाल की तराई के जंगलों को अपना आधार बनाया। इसका मुख्य कार्य रेलवे लाइनें, तार के खंभे और सरकारी संचार व्यवस्था को नष्ट करना था, जिससे प्रशासनिक कामकाज ठप हो जाए -3-6
  • BPSC के लिए खास: ‘आज़ाद दस्ता’ केवल 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन से जुड़ा था -8। जेपी की इस भूमिगत गतिविधि ने आंदोलन को नई ऊर्जा दी -3-8

नेतृत्वविहीन जन-आंदोलन

  • डॉ. राजेंद्र प्रसाद और श्री कृष्ण सिंह जैसे बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था, फिर भी जनता ने स्वयं आंदोलन की कमान संभाली। किसानों और महिलाओं ने बड़े पैमाने पर भाग लिया -3

🚩 2. तेवरी आंदोलन (1920)

“तेवरी” का अर्थ बटाईदारी (Sharecropping) से है। यह आंदोलन स्वामी विद्यानंद के नेतृत्व में बिहार के किसानों का एक बड़ा संघर्ष था।

दरभंगा किसान आंदोलन (1919-20)

  • यह आंदोलन दरभंगा राज की विशाल जमींदारी के खिलाफ था, जिसके शासक महाराजा रामेश्वर सिंह थे -10
  • किसानों की मुख्य समस्याएं थीं—अत्यधिक कर, जमींदारी प्रथा का शोषण, और जंगल से फल-लकड़ी लेने के अधिकारों पर रोक -10
  • स्वामी विद्यानंद ने रैयतों (किसानों) को उनके अधिकारों के प्रति सचेत किया और उत्तर बिहार के कई जिलों (खासकर दरभंगा) में उन्हें संगठित किया -1-10

असहयोग आंदोलन से संबंध

  • किसानों का यह आंदोलन कुछ समय के लिए असहयोग आंदोलन (1920-22) से जुड़ गया। स्वामी विद्यानंद इस आंदोलन के प्रबल समर्थक थे और उन्होंने किसानों के साथ असहयोग का प्रचार किया -4

BPSC ट्रिक: स्वामी विद्यानंद → तेवरी/दरभंगा किसान आंदोलन (1919-20) और स्वामी सहजानंद → बिहार किसान सभा (1929)—इन दोनों स्वामियों और उनके आंदोलनों को कभी मिलाएं नहीं -1-2!


🌾 3. किसान सभा के बाद के चरण (1930-40)

बिहार किसान सभा (1929) की स्थापना के बाद, स्वामी सहजानंद सरस्वती के नेतृत्व में यह आंदोलन पूरे बिहार में फैल गया और अधिक संगठित हो गया।

बकाश्त आंदोलन (1937-38)

  • “बकाश्त” का अर्थ स्व-खेती (Self-cultivated) भूमि है। इस आंदोलन का नेतृत्व स्वामी सहजानंद ने किया -5-7
  • इसका मुख्य उद्देश्य जमींदारों द्वारा किसानों की उस भूमि से बेदखली का विरोध करना था, जिसे वे खुद जोतते थे -5-7
  • इस आंदोलन की सफलता के परिणामस्वरूप ‘बिहार काश्तकारी अधिनियम’ पारित हुआ और बकाश्त भूमि पर कर लागू किया गया -7

अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) का गठन (1936)

  • 1936 में लखनऊ में अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) का गठन किया गया, जिसके पहले अध्यक्ष स्वामी सहजानंद सरस्वती चुने गए -2-7
  • AIKS ने जमींदारी प्रथा के उन्मूलन और किसानों के कर्ज को माफ करने की मांग की -2-5

किसान सभा और कांग्रेस के बीच दरार

  • 1930 के दशक के अंत तक, किसान सभा और कांग्रेस के बीच मतभेद बढ़ गए। कांग्रेस सरकारें किसानों से किए गए अपने वादों को पूरा करने में विफल रहीं, जिससे किसानों का मोहभंग हो गया -2
  • 1942 में, जब गांधीजी ने ‘भारत छोड़ो’ का आह्वान किया, तो स्वामी सहजानंद और किसान सभा ने किसानों से कांग्रेस का समर्थन न करने की अपील की, जो इस दरार को स्पष्ट रूप से दर्शाता है -2

📜 4. मॉडल अभ्यास प्रश्न (Model Questions)

  1. ‘आज़ाद दस्ता’ का गठन बिहार में किस आंदोलन के दौरान हुआ था?
    • (a) असहयोग आंदोलन
    • (b) सविनय अवज्ञा आंदोलन
    • (c) भारत छोड़ो आंदोलन
    • (d) खेड़ा सत्याग्रह
    उत्तर: (c)
  2. तेवरी आंदोलन (1919-20) का नेतृत्व किसने किया था?
    • (a) स्वामी सहजानंद सरस्वती
    • (b) स्वामी विद्यानंद
    • (c) जयप्रकाश नारायण
    • (d) डॉ. राजेंद्र प्रसाद
    उत्तर: (b) -1-4
  3. 11 अगस्त, 1942 को पटना सचिवालय पर तिरंगा फहराने के दौरान शहीद हुए सात छात्रों में से कौन-सा नाम शामिल नहीं था?
    • (a) उमाकांत प्रसाद सिंह
    • (b) सतीश प्रसाद झा
    • (c) राम मनोहर लोहिया
    • (d) राजेंद्र सिंह
    उत्तर: (c) -3
  4. ‘बकाश्त आंदोलन’ (1937-38) बिहार में किस नेता से जुड़ा है?
    • (a) जयप्रकाश नारायण
    • (b) स्वामी सहजानंद सरस्वती
    • (c) श्री कृष्ण सिंह
    • (d) अनुग्रह नारायण सिन्हा
    उत्तर: (b) -5-7
  5. अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) के प्रथम अध्यक्ष कौन बने थे?
    • (a) एन.जी. रंगा
    • (b) पंडित यमुना करजी
    • (c) स्वामी सहजानंद सरस्वती
    • (d) सरदार वल्लभभाई पटेल
    उत्तर: (c) -2-7

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