गांधीजी का आगमन और चंपारण सत्याग्रह: विस्तृत नोट्स
August 17, 2026
1. पृष्ठभूमि: चंपारण की दयनीय स्थिति
- ‘तिनकठिया’ प्रथा (Tinkathia System) -4-5: ब्रिटिश जमींदारों (प्लांटर्स) द्वारा किसानों पर जबरन 3/20 भाग (तिनकठिया) भूमि पर नील (Indigo) की खेती करने के लिए मजबूर किया जाता था। यह फसल किसानों की खाद्यान्न जरूरतों के लिए नहीं, बल्कि पूरी तरह से निर्यात के लिए थी।
- शोषण: किसानों को नील की फसल के बदले बहुत कम कीमत दी जाती थी, जिससे वे अत्यधिक गरीबी का शिकार हो गए थे-2।
- अकाल और कर: भयानक अकाल के समय भी अंग्रेज सरकार ने भारी कर वसूला और दरें बढ़ा दीं, जिससे स्थिति और असहनीय हो गई-2।
- पूर्व विद्रोह: किसानों का शोषण इतना अधिक था कि 1914 में पिपरा और 1916 में तुरकौलिया में पहले ही विद्रोह हो चुके थे-2।
2. गांधीजी का आगमन और नेतृत्व
- आमंत्रण: 1916 में लखनऊ में कांग्रेस अधिवेशन के दौरान, राजकुमार शुक्ल (एक स्थानीय नील किसान) ने गांधीजी को चंपारण आने के लिए लगातार आग्रह किया-2-10-12। अंततः गांधीजी मान गए और 1917 में चंपारण पहुंचे-2-7।
- जांच शुरू: 10 अप्रैल, 1917 को गांधीजी चंपारण पहुंचे और बाबू गोरख प्रसाद के घर (मोतिहारी) से अपना काम शुरू किया-4।
- साथी: इस जांच में उनके साथ डॉ. राजेंद्र प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिन्हा, बृजकिशोर प्रसाद और आचार्य जे.बी. कृपलानी जैसे प्रमुख वकील और नेता शामिल हुए-2-6-9।
3. सत्याग्रह और उसकी सफलता
- प्रशासनिक विरोध: गांधीजी के जांच कार्य को रोकने के लिए स्थानीय अधिकारियों ने उन्हें चंपारण छोड़ने का आदेश दिया और उन पर मुकदमा चलाया-4।
- अदालत में उपस्थिति: 18 अप्रैल, 1917 को जब गांधीजी मोतिहारी कोर्ट में पेश हुए, तो उनके साथ लगभग 2000 स्थानीय लोग जमा हो गए-4। गांधीजी ने आदेश का उल्लंघन करने की बात स्वीकार की और सजा भुगतने को तैयार थे।
- विजय: इस अभूतपूर्व जनसमर्थन को देखते हुए, बिहार के तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर ने गांधीजी के खिलाफ मुकदमा वापस लेने का आदेश दिया और उन्हें अपनी जांच जारी रखने की अनुमति दे दी-4। 19 अप्रैल, 1917 को आंदोलन औपचारिक रूप से शुरू हुआ-4।
- परिणाम: सरकार को ‘तिनकठिया’ प्रथा को समाप्त करने और किसानों को हुए शोषण के लिए 25% मुआवजा देने पर सहमत होना पड़ा-4-5-8।
4. चंपारण सत्याग्रह का महत्व
- पहला सत्याग्रह: यह गांधीजी का भारत में पहला सत्याग्रह आंदोलन था, जिसमें उन्होंने सविनय अवज्ञा (Civil Disobedience) का प्रयोग किया-2-5-8।
- गांधीवादी युग की शुरुआत: चंपारण की सफलता ने भारत के राष्ट्रीय आंदोलन में गांधीजी को एक राष्ट्रीय नेता के रूप में स्थापित कर दिया-8।
- बिहार में राजनीतिक जागृति: इस आंदोलन ने बिहार के नेताओं को पहली बार राष्ट्रीय मंच पर सक्रिय किया और बिहार को स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना दिया।
📜 पिछले वर्षों के BPSC प्रश्न (PYQs) और उनके हल
- प्रश्न (64वीं BPSC प्रारंभिक, 2018): महात्मा गांधी का भारत में पहला सत्याग्रह कौन-सा था? -8
- (a) खेड़ा
- (b) अहमदाबाद
- (c) चंपारण
- (d) रॉलेट सत्याग्रह
- प्रश्न (BPSC DSO, 2025): चंपारण सत्याग्रह (1917) में किस प्रमुख नेता की सक्रिय भागीदारी रही? -3
- (a) अनुग्रह नारायण सिन्हा
- (b) राजेंद्र प्रसाद
- (c) जयप्रकाश नारायण
- (d) श्री कृष्ण सिंह
- प्रश्न (BPSC Assistant, 2014): गांधीजी ने चंपारण सत्याग्रह किस वर्ष किया था? -2
- (a) 1915
- (b) 1916
- (c) 1917
- (d) 1918
- प्रश्न (67वीं BPSC प्रारंभिक, रद्द): गांधीजी को चंपारण आने के लिए किसने आमंत्रित किया था? -10-12
- (a) राजेंद्र प्रसाद
- (b) जयप्रकाश नारायण
- (c) राजकुमार शुक्ल
- (d) कृष्ण सहाय
- प्रश्न (BPSC CDPO, 2018): महात्मा गांधी पर चंपारण में कब मुकदमा चलाया गया था? -4
- (a) 1915
- (b) 1916
- (c) 1917
- (d) 1918
🎯 मॉडल अभ्यास प्रश्न (Model Questions)
- चंपारण सत्याग्रह का मुख्य कारण क्या था?
- (a) चौकीदारी कर
- (b) तिनकठिया प्रथा
- (c) विदेशी वस्त्रों का आयात
- (d) भूमि राजस्व में वृद्धि
- चंपारण सत्याग्रह के परिणामस्वरूप किस प्रणाली को समाप्त कर दिया गया?
- (a) दास प्रथा
- (b) तिनकठिया प्रथा
- (c) खेतिहर मजदूरी प्रथा
- (d) स्थायी बंदोबस्त
- निम्नलिखित में से कौन चंपारण सत्याग्रह (1917) से जुड़ा नहीं था?
- (a) जे.बी. कृपलानी
- (b) राजकुमार शुक्ल
- (c) राम मनोहर लोहिया
- (d) डॉ. राजेंद्र प्रसाद
- गांधीजी के चंपारण सत्याग्रह के दौरान मोतिहारी कोर्ट में उनके साथ कितने लोग जमा हुए थे?
- (a) 500
- (b) 1000
- (c) 2000
- (d) 5000